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कर्नाटक कांग्रेस: सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मुलाकात से उठे सवाल…

कर्नाटक में कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और पूर्व सीएम सिद्धारमैया की मुलाकात राजनीतिक पिच पर चर्चा का विषय बन गई है। ब्रेकफास्ट टेबल पर दोनों ने ‘सबकुछ ठीक है’ का मैसेज दिया, लेकिन तस्वीरें और बॉडी लैंग्वेज कुछ और ही कहानी बयान कर रही हैं।

ब्रेकफास्ट मीटिंग में सबकुछ ठीक दिखाने की कोशिश

सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने एक साथ बैठकर ब्रेकफास्ट किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जताने की कोशिश की कि पार्टी में कोई अनबन नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीके शिवकुमार आत्मविश्वास से भरे नजर आए, जबकि दोनों की बॉडी लैंग्वेज कुछ और ही संकेत दे रही थी।

फोटो में छुपे राजनीतिक संकेत

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद की फोटो में दोनों एक ही दरवाजे से बाहर निकलते दिखाई दिए। दरवाजे की चौड़ाई कम होने के बावजूद सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार को पहले जाने का इशारा किया। दोनों की नजरें नीचे थीं, जो राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सम्मान और पॉलिटिकल संतुलन का संकेत है।

मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान का अंत निकट

सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी खींचतान लगभग समाप्त हो चुकी है। पार्टी आलाकमान ने अगले कदम तय कर लिए हैं और अब केवल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे कांग्रेस के भीतर तनाव कम करने का प्रयास मान रहे हैं।

नाश्ते की बैठक: औपचारिक चर्चा से ज्यादा

सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार को अपने घर ‘कावेरी रेसिडेंस’ पर नाश्ते के लिए बुलाया। यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं थी बल्कि पार्टी में संतुलन बनाने और संभावित नेतृत्व विकल्पों पर सहमति बनाने का रणनीतिक कदम था।

डीके शिवकुमार समर्थकों की बाइक रैली

सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मुलाकात के दौरान मैसूर में डीके शिवकुमार के समर्थक बाइक रैली कर रहे थे। रैली में समर्थकों ने अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग के नारे लगाए, जो पार्टी में खींचतान और दबाव की स्थिति को स्पष्ट करता है।

कांग्रेस के भीतर सियासी संतुलन

हाल के दिनों में कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान बढ़ी है। डीके शिवकुमार के खेमे के लोग अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में दबाव डाल रहे थे। सिद्धारमैया की यह मुलाकात पार्टी के भीतर चल रही गुत्थी को सुलझाने और नेताओं के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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