“कोटा में बड़ा राजनीतिक भूचाल: पूर्व मंत्री की पत्नी पर एसीबी की कर्रवाई, जांच ने उठाए कई सवाल”
कोटा की सियासत एक बार फिर गरमाती दिख रही है। दिवंगत पूर्व मंत्री भरत सिंह की पत्नी और पूर्व सरपंच मीना कुमारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा मुकदमा दर्ज होने के बाद सत्ता, प्रशासन और राजनीति—तीनों के बीच नई सरगर्मियां बढ़ गई हैं। मामला सिर्फ एक एफआईआर का नहीं, बल्कि आरोपों, साजिशों और जवाबदेही के घेरे में खड़े बड़े राजनीतिक चेहरों का भी है।
“पूर्व मंत्री की पत्नी पर एसीबी की बड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराएं दर्ज”
एसीबी ने राज्य सरकार की अनुशंसा पर मीना कुमारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। जांच रिपोर्ट के बाद एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा ने एफआईआर का ड्राफ्ट तैयार कर इसे जयपुर भेजा था, जहां 20 नवंबर को मुकदमा दर्ज किया गया।
“जांच की बागडोर डीवाईएसपी अनीस अहमद के हाथ में, पत्रावली का इंतजार”
इस मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक अनीस अहमद को सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि मुकदमा दर्ज हो चुका है, लेकिन अभी तक संबंधित पत्रावली उनके पास नहीं पहुंची है। दस्तावेज मिलते ही पूछताछ, साक्ष्य सत्यापन और तकनीकी जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शुरुआती स्तर पर विभागीय जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद सरकार ने एसीबी कार्रवाई की सिफारिश की थी।
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“मीना कुमारी ने कार्रवाई को बताया राजनीतिक षड्यंत्र, भाजपा नेताओं पर लगाए आरोप”
दूसरी ओर मीना कुमारी ने एसीबी की इस कार्रवाई को भाजपा के बड़े नेताओं की सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला सत्ता पक्ष के दबाव में आगे बढ़ाया गया है।
“सियासी गर्माहट बढ़ी, मामला बना चर्चा का केंद्र”
मुकदमा दर्ज होने के साथ ही कोटा जिले की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विपक्ष इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रहा है, जबकि सरकारी तंत्र इसे विभागीय रिपोर्ट पर आधारित कार्रवाई के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में एसीबी की विस्तृत जांच से कई नए पहलू सामने आ सकते हैं।
मामला सिर्फ एक एफआईआर नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों का टकराव ,यह केस दो स्तरों पर काम कर रहा है—
प्रशासनिक स्तर परजहां विभागीय जांच के आधार पर एसीबी ने कार्रवाई शुरू की है।
वही इसे साजिश बनाम भ्रष्टाचार के नैरेटिव में ढाला जा रहा है।
जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होगा कि मामला वास्तविक अनियमितताओं का है या राजनीतिक टकराव का परिणाम।