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पालीघाट में 30 घड़ियालों की वापसी: वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने शुरू की चम्बल में नई संरक्षण पहल…

राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा ने सवाई माधोपुर जिले के पालीघाट स्थित राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य में 30 घड़ियाल शावकों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा। यह पहल राज्य में वन्यजीव संरक्षण और चम्बल नदी पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

घड़ियालों का पुनर्वास: चम्बल में लौटी जीवन की धारा

पालीघाट अभयारण्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के तहत पाँच माह के 30 घड़ियाल शावकों को “रेयरिंग फास्ट ट्रैक–हेड स्टार्टिंग कार्यक्रम” के अंतर्गत चम्बल नदी में छोड़ा गया। यह कार्यक्रम उन शावकों को प्राकृतिक परिवेश में जीवित रहने के लिए प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है।

वरिष्ठ वन अधिकारियों की मौजूदगी में सफल कार्यक्रम

कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्रीमती शिखा मेहरा, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री राजेश गुप्ता, और रणथम्भौर बाघ परियोजना के उप क्षेत्र निदेशक डॉ. रामानंद भाकर उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने इस प्रयास को राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में मील का पत्थर बताया।

संजय शर्मा ने घड़ियाल प्रजनन तकनीकों की सराहना की

राज्यमंत्री संजय शर्मा ने घड़ियाल पालन केंद्र का निरीक्षण करते हुए वहां अपनाई जा रही कृत्रिम प्रजनन और संरक्षण तकनीकों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “घड़ियाल चम्बल नदी के पारिस्थितिक संतुलन के प्रतीक हैं। इनके संरक्षण से नदी तंत्र और जैव विविधता दोनों को मजबूती मिलेगी।”

संरक्षण की नई दिशा: अन्य जिलों में भी होंगे प्रयास

श्री शर्मा ने कहा कि पालीघाट की तरह धौलपुर और अन्य नदी क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य घड़ियालों की संख्या में निरंतर वृद्धि कर राजस्थान को वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी बनाना है।

पालीघाट में 30 घड़ियालों का पुनर्वास न केवल राजस्थान के पर्यावरणीय प्रयासों की झलक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और संतुलित प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित करने की दिशा में भी एक प्रेरणादायी कदम है।

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