अंता उपचुनाव 2025: राजस्थान की सियासत का अगला बड़ा इम्तिहान, बीजेपी बनाम कांग्रेस आमने-सामने…
भजनलाल सरकार के सामने फिर परीक्षा का वक्त
राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार बनने के बाद उपचुनावों में लगातार जीत का सिलसिला जारी है। नवंबर 2024 के सात सीटों के उपचुनाव में बीजेपी ने पांच सीटों — झुंझुनूं, खींवसर, देवली-उनियारा, सलूंबर और रामगढ़ — पर कब्जा जमाया था। कांग्रेस केवल दौसा सीट बचा पाई थी, जबकि भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने चौरासी सीट जीती थी। अब 11 नवंबर को बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर वोटिंग होनी है, जो बीजेपी की अगली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।
कंवरलाल मीणा की सजा से खाली हुई सीट, अब मोरपाल सुमन पर दांव
अंता सीट बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा के लोकसभा चुनाव जीतने और बाद में एक पुराने मामले में सजा मिलने के कारण खाली हुई। 2023 विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस को 5861 वोटों से हराया था। इस बार बीजेपी ने स्थानीय चेहरा मोरपाल सुमन को मैदान में उतारा है, जो बारां पंचायत समिति के प्रधान और वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने पुराने खिलाड़ी प्रमोद जैन भाया को दोबारा टिकट दिया है, हालांकि उन पर ‘बाहरी उम्मीदवार’ का ठप्पा लग गया है।
त्रिकोणीय मुकाबले की आहट, निर्दलीयों ने बढ़ाई टेंशन
अंता में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा और पूर्व बीजेपी विधायक रामपाल मेघवाल भी ताल ठोक रहे हैं। खास बात यह है कि नरेश मीणा को आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल का समर्थन प्राप्त है, जिससे चुनाव में नया मोड़ आ गया है। क्षेत्र में करीब 2.27 लाख वोटर हैं, जिनमें 8,540 नए मतदाता शामिल हैं। माली, मीणा, मुस्लिम और एससी समुदाय का वोट इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
रोड शो में उतरे दिग्गज, प्रचार चरम पर
6 नवंबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मांगरोल में विशाल रोड शो किया। सीएम ने मोदी की गारंटी और सरकारी योजनाओं को जनता के समर्थन का आधार बताया। वहीं, वसुंधरा राजे ने कहा कि “जनबल की जीत तय है।” उधर, कांग्रेस की ओर से सचिन पायलट ने प्रचार की कमान संभाली और कहा कि अंता का असली विकास कांग्रेस के शासनकाल में हुआ। उन्होंने बीजेपी पर गुटबाजी और कोर्ट के फैसले को लेकर हमला बोला।
किसे होगा फायदा? जनता देगी रिपोर्ट कार्ड
2024 के उपचुनावों में बीजेपी का वोट शेयर 15% तक बढ़ा था, जिससे पार्टी के हौसले बुलंद हैं। अंता में मोदी मैजिक, भजनलाल की लोकप्रियता और वसुंधरा का स्थानीय प्रभाव पार्टी के लिए वरदान साबित हो सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस अपने पुराने चेहरों और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है। निर्दलीय उम्मीदवारों के वोट कटने से बीजेपी को सीधा फायदा मिलने के आसार हैं। यह उपचुनाव केवल एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि भजनलाल सरकार की दो साल की परफॉर्मेंस पर जनता का फैसला होगा।
कुल मिलाकर राजस्थान की सियासत में अंता सीट ‘मिनी विधानसभा’ जैसी अहमियत रखती है। हवा फिलहाल कमल के पक्ष में बहती दिख रही है, लेकिन अंतिम फैसला 14 नवंबर को मतपेटियों से ही निकलेगा। राजनीति में आखिरी मिनट तक समीकरण बदलना कोई नई बात नहीं।