बारां: नरेश मीणा के खिलाफ छबड़ा थाने में FIR, बोले- किरोड़ी लाल मीणा के दबाव में दर्ज हुआ केस
बारां: भगत सिंह सेना के प्रमुख और युवा नेता नरेश मीणा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनके खिलाफ छबड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। अधिकारियों ने नरेश मीणा पर भीड़ को उकसाने और धमकाने के आरोप लगाए हैं। वहीं, नरेश मीणा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के दबाव में उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई उनका चुनाव खराब करने और उन्हें दोबारा जेल भेजने की साजिश है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने छबड़ा थाने में दर्ज कराया मुकदमा
बारां जिले के छबड़ा थाना क्षेत्र में कृषि विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर नरेश मीणा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने उन पर भीड़ को उकसाने और धमकाने के आरोप लगाए हैं।मामले की पुष्टि छबड़ा के डीएसपी ताराचंद ने की है। हालांकि, एफआईआर में दर्ज धाराओं और घटना से जुड़े विस्तृत तथ्यों की जानकारी सामने आना बाकी है। पुलिस अब शिकायत के आधार पर मामले की जांच करेगी।इस कार्रवाई के बाद नरेश मीणा ने अपने एक्स हैंडल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि करते हुए इसके पीछे राजनीतिक दबाव होने का आरोप लगाया।
नरेश मीणा बोले- चुनाव खराब करने की साजिश
नरेश मीणा ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के पीछे चुनावी नुकसान पहुंचाने की मंशा है। उनका कहना है कि उन्हें दोबारा जेल भेजने के लिए यह कार्रवाई कराई गई है।उन्होंने दावा किया कि जनता का समर्थन उनके साथ है। मीणा ने कहा कि यदि उन्हें जेल भी जाना पड़ा, तब भी समर्थक उनका साथ देंगे और हाथी चुनाव चिह्न पर मतदान करेंगे।उनके मुताबिक, पंचायत चुनाव में उनके समर्थक जीत हासिल कर अपना बोर्ड बनाने का प्रयास करेंगे। हालांकि, चुनाव में किसे कितना समर्थन मिलता है, यह मतदाताओं के फैसले और आधिकारिक परिणामों से ही स्पष्ट होगा।
किरोड़ी लाल मीणा पर दबाव डालने का आरोप
नरेश मीणा ने कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया होता, तो स्थिति अलग होती। लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज होना उनके अनुसार राजनीतिक दबाव का संकेत है।मीणा ने दावा किया कि मामले में ऐसी धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें उन्हें सात साल तक की सजा हो सकती है। हालांकि, संभावित सजा का निर्धारण एफआईआर में दर्ज धाराओं, आरोपों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।फिलहाल, कृषि मंत्री की ओर से इन आरोपों पर कोई पक्ष सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए नरेश मीणा के दावों और मुकदमे के पीछे कथित दबाव की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
बोले- मुकदमों से डरने वाला नहीं हूं
मुकदमा दर्ज होने के बाद नरेश मीणा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वह कानूनी मामलों से डरने वाले नहीं हैं।उन्होंने अपने बयान में कहा, “तुम नरेश मीणा को जेल में डाल सकते हो, हत्या करवा सकते हो, मगर नरेश मीणा अब नरेश मीणा नहीं रहा, नरेश मीणा अब एक सोच, एक विचार है।”उन्होंने आगे दावा किया कि हाड़ौती के घर-घर से लोग उठेंगे और सत्ताधारी नेताओं को बेनकाब करेंगे। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर उनकी प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।
अब पुलिस जांच पर टिकी नजरें
नरेश मीणा के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद मामले की जांच अहम होगी। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, घटना से जुड़े साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।दूसरी ओर, नरेश मीणा ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है। अब यह देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पुलिस आगे क्या कदम उठाती है।फिलहाल, मुकदमा दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।