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राजस्थान वनरक्षक भर्ती घोटाला: 5 लाख में डमी कैंडिडेट से दिलाई परीक्षा, SOG ने दो आरोपियों को पकड़ा

राजस्थान वनरक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2020 में डमी अभ्यर्थी बैठाकर परीक्षा दिलाने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार, नौकरी हासिल करने के लिए पांच लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। आरोप है कि मूल अभ्यर्थी भारत मीणा की जगह दिनेश कुमार विश्नोई ने परीक्षा दी। प्रवेश पत्र पर फोटो और उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर में भी कथित फर्जीवाड़ा किया गया। SOG अब इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका और अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।

वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 में गड़बड़ी का मामला

राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित वनरक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2020 में मूल अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति को बैठाने का आरोप है। इस मामले की जांच स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) कर रही है।SOG के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल के अनुसार, जांच के दौरान भरतपुर जिले के भारत मीणा और जालोर जिले के दिनेश कुमार विश्नोई की भूमिका सामने आई। पुलिस ने दोनों को 24 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर भर्ती परीक्षा में कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

पांच लाख रुपये में तय हुआ था सौदा

जांच के मुताबिक, भरतपुर जिले के भुसावर थाना क्षेत्र के निठार निवासी भारत मीणा ने वनरक्षक भर्ती परीक्षा के जरिए नौकरी पाने के लिए संपर्क किया था। आरोप है कि उसने ठेकड़ा निवासी डालूराम मीणा के माध्यम से व्यवस्था की। इसके लिए पांच लाख रुपये में सौदा तय होने की बात सामने आई है।पुलिस के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत भारत मीणा की जगह दिनेश कुमार विश्नोई को डमी अभ्यर्थी बनाकर परीक्षा में बैठाया गया। आरोप है कि डालूराम मीणा ने इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। हालांकि, सौदे से जुड़े सभी पहलुओं और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

प्रवेश पत्र और हस्ताक्षर में भी कथित फर्जीवाड़ा

SOG की जांच में आरोप है कि जालोर जिले के सांचौर थाना क्षेत्र की साहू की ढाणी निवासी दिनेश कुमार विश्नोई ने भारत मीणा के स्थान पर परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया। उसने कथित तौर पर प्रवेश पत्र और उपस्थिति पत्रक में भी गड़बड़ी की।जांच के अनुसार, प्रवेश पत्र पर दिनेश ने अपना फोटो चस्पा किया और उपस्थिति पत्रक पर भारत मीणा के फर्जी हस्ताक्षर किए। इस तरह दूसरे व्यक्ति के नाम पर परीक्षा देने का आरोप है। भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थी की पहचान और दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य और परीक्षा केंद्र के रिकॉर्ड जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

सितंबर 2025 में दर्ज हुई थी FIR

इस मामले में SOG थाना जयपुर में 26 सितंबर 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रकरण में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2022 की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।पुलिस के अनुसार, मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गठित टीम कर रही है। SOG अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं और परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों में किस स्तर पर गड़बड़ी की गई।

SOG खंगाल रही भर्ती घोटाले की अन्य कड़ियां

दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा कथित सौदे, डमी अभ्यर्थी की व्यवस्था और परीक्षा केंद्र में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों तक पहुंच गया है। पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की पहचान और दस्तावेजों की सत्यता सुनिश्चित करना जरूरी है। ऐसे मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आरोपों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होती है। फिलहाल SOG इस प्रकरण से जुड़े साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

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