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CM भजनलाल शर्मा के निर्देश, नागौर की लिग्नाइट माइंस फिर होंगी शुरू; भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को राहत की उम्मीद

राजस्थान के भीलवाड़ा के कपड़ा प्रोसेस उद्योग को ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में कमी के बीच राहत मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नागौर स्थित राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की लिग्नाइट माइंस को तत्काल दोबारा शुरू कराने के प्रशासनिक निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि आवश्यक अनुमतियों के नवीनीकरण में देरी के कारण माइंस का संचालन प्रभावित हुआ था। स्थानीय लिग्नाइट की आपूर्ति बहाल होने पर उद्योगों की ईंधन लागत घट सकती है। हालांकि, वास्तविक राहत माइंस के संचालन और नियमित आपूर्ति शुरू होने पर निर्भर करेगी।

ईंधन की बढ़ती कीमतों से दबाव में भीलवाड़ा का कपड़ा उद्योग

भीलवाड़ा देश के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में शामिल है। यहां कपड़े की रंगाई, छपाई और प्रोसेसिंग से जुड़ी कई इकाइयां संचालित होती हैं। इन इकाइयों में उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में ईंधन की जरूरत पड़ती है।पिछले कुछ समय से महंगे कोयले और ईंधन की उपलब्धता में कमी के कारण प्रोसेस हाउसों की लागत बढ़ने की बात सामने आई है। इससे घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और निर्यात कारोबार में लागत नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर उत्पादन और कारोबार की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर सस्ता ईंधन उपलब्ध होना उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अनुमतियों के नवीनीकरण में देरी से प्रभावित हुआ माइंस संचालन

नागौर में RSMML की लिग्नाइट माइंस की नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद संचालन में रुकावट आने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि संबंधित दस्तावेजों और पर्यावरणीय तथा प्रशासनिक अनुमतियों के नवीनीकरण में देरी के कारण माइंस का काम प्रभावित हुआ।स्थानीय लिग्नाइट की आपूर्ति रुकने से बाजार में उपलब्ध विकल्पों पर दबाव बढ़ा। उद्योगों को अन्य स्रोतों से ईंधन जुटाना पड़ा, जिससे परिवहन और खरीद लागत बढ़ने की आशंका रही।उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जरूरी औपचारिकताएं समय पर पूरी होतीं, तो आपूर्ति में इस तरह की बाधा से बचा जा सकता था। अब माइंस को दोबारा शुरू कराने के निर्देश के बाद संचालन बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

आयातित कोयले की कमी से बढ़ी परेशानी

भीलवाड़ा के कपड़ा प्रोसेस उद्योग में घरेलू कोयले, बीकानेर क्षेत्र से आने वाले लिग्नाइट और आयातित कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, इंडोनेशिया से आने वाले कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से बाजार में दबाव बढ़ा है।नागौर से लिग्नाइट की आपूर्ति रुकने के बाद बीकानेर और दूसरे स्रोतों पर निर्भरता बढ़ने की बात कही गई है। इससे उपलब्ध ईंधन के दाम बढ़ने का असर प्रोसेस हाउसों की लागत पर पड़ रहा है।उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि ईंधन के कई स्रोत उपलब्ध रहने से किसी एक क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने पर कारोबार पर पड़ने वाला असर कम किया जा सकता है। नागौर माइंस का दोबारा संचालन इसी लिहाज से अहम माना जा रहा है।

नागौर का लिग्नाइट सस्ता, परिवहन खर्च में भी कमी की उम्मीद

उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, भीलवाड़ा में कोयले और लिग्नाइट की मासिक खपत लगभग 75 हजार टन है। वर्तमान में बीकानेर से आने वाले लिग्नाइट, घरेलू कोयले और इंडोनेशिया से आयातित कोयले की कीमत 8,500 से 12,000 रुपये प्रति टन के बीच बताई जा रही है।इसके मुकाबले नागौर के लिग्नाइट की कीमत लगभग 6,000 रुपये प्रति टन बताई गई है। यदि यह ईंधन नियमित रूप से उपलब्ध होता है, तो उद्योगों को खरीद लागत में राहत मिल सकती है।नागौर से भीलवाड़ा की दूरी अपेक्षाकृत कम होने के कारण परिवहन खर्च में भी कमी की संभावना है। हालांकि, वास्तविक बचत ईंधन की गुणवत्ता, उपलब्ध मात्रा, परिवहन दरों और आपूर्ति की शर्तों पर निर्भर करेगी।

हर महीने 50 हजार टन लिग्नाइट मिलने से मिल सकती है राहत

उद्योग प्रतिनिधियों के अनुमान के अनुसार, यदि नागौर से हर महीने करीब 50 हजार टन लिग्नाइट उपलब्ध होने लगे, तो भीलवाड़ा के कपड़ा प्रोसेस उद्योग की ईंधन जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा हो सकता है।इससे महंगे विकल्पों पर निर्भरता घटाने और उत्पादन लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। कम लागत से उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में सुधार की संभावना भी जताई जा रही है।हालांकि, इस अनुमानित लाभ के लिए माइंस का नियमित संचालन, पर्याप्त उत्पादन और उद्योगों तक समय पर आपूर्ति जरूरी होगी। माइंस दोबारा शुरू होने के बाद उपलब्ध वास्तविक मात्रा से ही राहत का आकलन किया जा सकेगा।

लघु उद्योग भारती ने मुख्यमंत्री के सामने उठाया मुद्दा

लघु उद्योग भारती ने नागौर माइंस के संचालन में आ रही बाधा का मुद्दा राज्य सरकार के सामने रखा। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रकाश चंद्र के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को उद्योगों की स्थिति से अवगत कराया।संगठन की ओर से ईंधन की बढ़ती लागत और आपूर्ति में कमी को देखते हुए प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने माइंस को तत्काल दोबारा शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।लघु उद्योग भारती के राजस्थान प्रदेश संयुक्त सचिव रवीन्द्र जाजू के अनुसार, इस कदम से भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है। अब संबंधित विभागों की कार्रवाई और माइंस के संचालन की बहाली पर नजर रहेगी।

माइंस चालू होने के बाद आपूर्ति पर रहेगी नजर

नागौर की लिग्नाइट माइंस को दोबारा शुरू कराने के निर्देश से भीलवाड़ा के कपड़ा प्रोसेस उद्योग को राहत की उम्मीद मिली है। स्थानीय ईंधन की नियमित आपूर्ति से खरीद और परिवहन लागत कम हो सकती है।हालांकि, अंतिम लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि माइंस कब तक पूरी तरह चालू होती है और उद्योगों को कितनी मात्रा में लिग्नाइट उपलब्ध कराया जाता है। अब आवश्यक अनुमतियों, संचालन और आपूर्ति व्यवस्था की प्रगति महत्वपूर्ण होगी।

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Stv News Rajasthan

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