हनुमान बेनीवाल किसान आंदोलन बीच में छोड़कर क्यों लौटे नागौर? दो दिन बाद फिर आने का किया ऐलान
राजस्थान के अनूपगढ़ में सिंचाई पानी की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सांसद हनुमान बेनीवाल नागौर लौट गए। किसानों और प्रशासन के बीच देर रात तक चली वार्ता बेनतीजा रहने के बाद भी आंदोलन जारी है। बेनीवाल ने किसानों को संबोधित करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि पंचायती राज चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन की प्रक्रिया के चलते उन्हें वापस जाना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने दो दिन बाद फिर धरना स्थल पर लौटने का भरोसा दिया। किसानों की मुख्य मांग रबी की फसल के लिए पर्याप्त सिंचाई पानी उपलब्ध कराने और पानी की बारी का स्पष्ट निर्धारण करने की है।
अनूपगढ़ में सिंचाई पानी के लिए किसानों का पक्का मोर्चा
श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ और घड़साना क्षेत्र में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। रबी की फसलों की बुवाई और पकाव के लिए पर्याप्त पानी सुनिश्चित करने की मांग पर किसान नेशनल हाईवे-911 पर 12 एमडी टोल नाके के पास धरने पर बैठे हैं। यहां चक्काजाम और प्रदर्शन के कारण यातायात भी प्रभावित हो रहा है। आंदोलन को समर्थन देने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी पहुंचे थे। किसान संगठनों का कहना है कि फसल की जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिला, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रशासन के साथ देर रात तक चली वार्ता, नहीं निकला समाधान
किसानों की मांगों पर सहमति बनाने के लिए रविवार शाम प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। खेत बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति की कोर कमेटी के 15 सदस्य वार्ता में शामिल हुए। इस दौरान जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता अमरजीत मेहरड़ा से भी फोन पर संपर्क किया गया। बैठक में सिंचाई पानी की बारी और रेगुलेशन को लेकर चर्चा हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। रात करीब 10:45 बजे तक चली वार्ता विफल रही। इसके बाद किसानों ने आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया। वार्ता में समाधान नहीं निकलने से प्रशासन के सामने भी गतिरोध दूर करने की चुनौती बनी हुई है।
छह बारी पानी की मांग पर अड़े किसान
आंदोलन का मुख्य मुद्दा रबी की फसल के लिए सिंचाई पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। किसान छह बारी पानी देने की मांग कर रहे हैं। साथ ही वे चाहते हैं कि जनवरी में स्थिति की समीक्षा कर जरूरत पड़ने पर दो अतिरिक्त बारी पानी देने का फैसला किया जाए। दूसरी ओर, सिंचाई विभाग की ओर से पांच बारी पानी के रेगुलेशन और जनवरी में समीक्षा के बाद एक अतिरिक्त बारी देने का प्रस्ताव बताया गया है। दोनों पक्षों के बीच पानी की बारी को लेकर यही अंतर विवाद का प्रमुख कारण बना हुआ है। किसानों का कहना है कि फसल की जरूरत के अनुसार पानी का स्पष्ट कार्यक्रम तय होना चाहिए, ताकि खेती प्रभावित न हो।
हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर साधा निशाना
धरना स्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने सिंचाई पानी के मुद्दे पर सरकार की कार्यशैली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि घड़साना और रावला क्षेत्र के किसान लंबे समय से अपने हिस्से के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। बेनीवाल ने संकेत दिया कि केवल मौखिक आश्वासन से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक नहरों में पानी की नियमित आपूर्ति और बारी को लेकर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन का मुद्दा बना रहेगा। किसानों की मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं होने से आंदोलन समाप्त होने के आसार फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं।
चुनावी जिम्मेदारियों के कारण नागौर लौटे सांसद
किसान आंदोलन के बीच हनुमान बेनीवाल के नागौर लौटने को लेकर सवाल उठे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने इसकी वजह पंचायती राज चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन से जुड़ी जिम्मेदारियों को बताया। उन्होंने कहा कि नामांकन की प्रक्रिया के लिए समय कम बचा है, इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए लौटना पड़ रहा है। बेनीवाल ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वह दो दिन बाद फिर धरना स्थल पर पहुंचेंगे। उनका कहना था कि वह किसानों के संघर्ष के साथ खड़े हैं। हालांकि, उनकी वापसी के बाद आंदोलन की अगली रणनीति और प्रशासन के साथ होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी।
नेशनल हाईवे-911 पर चक्काजाम, बस सेवाएं प्रभावित
किसानों के प्रदर्शन और चक्काजाम का असर अनूपगढ़ क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा है। अनूपगढ़ से घड़साना, खाजूवाला और बीकानेर की ओर जाने वाले मार्गों पर आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। सड़क बंद होने के कारण रोडवेज और निजी बसों के संचालन में परेशानी हो रही है। कुछ बसों को रास्ते से वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा, निजी और व्यावसायिक वाहनों की कतारें लगने से दैनिक यात्रियों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन लंबा खिंचने पर आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। यातायात की स्थिति को लेकर यात्रियों को स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
बिरधवाल हेड पर कब्जे की चेतावनी, आंदोलन जारी
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों के अनुरूप अनूपगढ़ शाखा में सिंचाई पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने जरूरत पड़ने पर बिरधवाल हेड पर कब्जा करने की चेतावनी भी दी है। धरना स्थल पर किसानों के लिए विभिन्न गुरुद्वारों की ओर से लंगर की व्यवस्था की जा रही है। किसान नेता नरेंद्र मान, राजेश पूनियां, मांगीलाल देहडू, मीरज निठारवाल और मनफूल जाखड़ सहित अन्य लोग आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे हैं। अब आगे की स्थिति प्रशासन की बातचीत, सिंचाई पानी के रेगुलेशन और किसानों की मांगों पर होने वाले फैसले पर निर्भर करेगी।