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दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन से पहले सियासी संग्राम तेज, जूली बोले- जेलें छोटी पड़ जाएंगी

अलवर। दिल्ली में कांग्रेस और विपक्षी दलों के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजस्थान में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश हुई तो जेलें छोटी पड़ जाएंगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने देश में तानाशाही जैसे हालात होने का आरोप लगाया। वहीं, भरतपुर सांसद संजना जाटव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन कई दिनों से जारी है। 12 अक्टूबर को भी बड़े प्रदर्शन की घोषणा की गई है।

वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का हल्ला बोल

कांग्रेस और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।कांग्रेस इन आरोपों को लोकतंत्र और मताधिकार से जोड़कर उठा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को उठाए गए सवालों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण को वैध मतदाताओं के नाम शामिल करने और अपात्र प्रविष्टियां हटाने की प्रक्रिया बताता रहा है। इन आरोपों और दावों पर राजनीतिक बहस जारी है।

टीकाराम जूली बोले- रोकने की कोशिश हुई तो जेलें छोटी पड़ जाएंगी

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार पर प्रदर्शनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया। जूली ने सवाल उठाया कि यदि सरकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा है, तो प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश क्यों की जा रही है।जूली ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा। उनका कहना है कि कांग्रेस को भाजपा नेताओं के बजाय एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण चाहिए।उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। जूली ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि यदि सरकार ने कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को दिल्ली पहुंचने से रोकने की कोशिश की, तो जेलें छोटी पड़ जाएंगी। उनका यह बयान प्रदर्शन से पहले राजनीतिक टकराव को और चर्चा में ले आया है।

जितेंद्र सिंह ने लगाए तानाशाही जैसे हालात होने के आरोप

पूर्व केंद्रीय मंत्री और अलवर के पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में तानाशाही जैसे हालात बन रहे हैं। सिंह ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की।जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने महिलाओं के साथ पुलिस के कथित दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।सिंह ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को याद रखना चाहिए कि वे जनता के वोट से सरकार में पहुंचे हैं। उनके मुताबिक, यह आंदोलन केवल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता और आम लोग बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचेंगे।

संजना जाटव ने पीएम मोदी, अमित शाह और CEC के इस्तीफे की मांग की

भरतपुर से कांग्रेस सांसद संजना जाटव ने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर भाजपा और केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।संजना जाटव ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी महाराष्ट्र, हरियाणा और अन्य राज्यों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर भी प्रश्न उठाए।सांसद ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर देशभर में आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान सत्ता में बने रहने पर केंद्रित है, जबकि चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के बीच सुरक्षा व्यवस्था सख्त

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है। इससे पहले प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर जाने से रोकने और नेताओं को हिरासत में लेने की घटनाएं भी सामने आईं। विपक्षी नेताओं ने इन कार्रवाइयों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस और विपक्षी दलों का कहना है कि वे चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जवाब मिलने तक विरोध जारी रखेंगे। दूसरी ओर, प्रदर्शन की अनुमति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक आवाजाही को लेकर प्रशासनिक फैसले भी बहस का विषय बने हुए हैं।

अब दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन पर नजर

राजस्थान के कांग्रेस नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी SIR, कथित वोट चोरी और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपने अभियान को आगे बढ़ाना चाहती है। टीकाराम जूली की चेतावनी, जितेंद्र सिंह के आरोप और संजना जाटव की इस्तीफे की मांग ने इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज कर दी है।अब नजर 12 अक्टूबर को प्रस्तावित विपक्षी प्रदर्शन पर रहेगी। यह देखना होगा कि इसमें कितनी भागीदारी होती है और केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल, कथित वोट चोरी के आरोप विपक्ष के राजनीतिक अभियान का प्रमुख मुद्दा बने हुए हैं, जबकि उनकी तथ्यात्मक और कानूनी स्थिति संबंधित जांच तथा आधिकारिक प्रक्रियाओं से स्पष्ट होगी।

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Stv News Rajasthan

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