Rajasthan Panchayat Election: अकेले चुनाव लड़ेगी RLP, हनुमान बेनीवाल ने किया बड़ा ऐलान
जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने भी चुनावी तैयारियों को गति दे दी है। पार्टी प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को जयपुर में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई। इसमें जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में पार्टी ने आगामी चुनाव अपने दम पर लड़ने और प्रत्याशियों की पहली सूची जल्द जारी करने की तैयारी के संकेत दिए। RLP का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने और अधिक से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारने पर है।
पंचायत चुनाव अकेले लड़ेगी RLP
बैठक में हनुमान बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी आगामी पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव अकेले लड़ेगी। पार्टी गठबंधन के बजाय अपने उम्मीदवारों के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।बैठक में जिलावार संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा हुई। टिकट वितरण को लेकर चुनाव समिति के सदस्यों और जिला प्रभारियों से जानकारी ली गई। पार्टी की ओर से जल्द ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी किए जाने की संभावना जताई गई है। हालांकि, सूची जारी होने की आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है।
जिला परिषद और पंचायत समिति के टिकटों पर मंथन
जयपुर में हुई बैठक में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया गया। पार्टी स्थानीय स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं और संभावित प्रत्याशियों की जानकारी जुटा रही है।RLP ने टिकट के इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन और बायोडाटा लेने की प्रक्रिया भी शुरू की है। नागौर समेत कई जिलों में जिला प्रभारी स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में उम्मीदवारों की सक्रियता, क्षेत्र में उनकी पहचान और संगठन से जुड़ाव जैसे पहलुओं पर चर्चा की जा रही है।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर भी जोर दिया गया। पार्टी के प्रदेश प्रभारी और पूर्व मंत्री दिलीप चौधरी ने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की बैठकें आयोजित की जाएंगी।ओसियां, जैतारण और लूणकरणसर सहित अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियां तेज की जा रही हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाना और चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित करना है।हनुमान बेनीवाल ने जिला प्रभारियों, सह-प्रभारियों और चुनाव समिति के सदस्यों से कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखने को कहा। उन्होंने सक्रिय और संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।
किसान और युवा होंगे पार्टी के प्रमुख मुद्दे
RLP आगामी पंचायत चुनाव में किसानों, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है। पार्टी की रणनीति में स्थानीय जनसमस्याओं को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाना शामिल है।ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पार्टी स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क बढ़ाकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
2020 के पंचायत चुनाव में RLP का प्रदर्शन
राजस्थान में 2020-21 के पंचायतीराज चुनावों में RLP ने पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर सीटें हासिल की थीं। उपलब्ध समेकित आंकड़ों के अनुसार पार्टी ने पंचायत समिति सदस्य की 101 सीटों और जिला परिषद सदस्य की 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी।नागौर और बाड़मेर जैसे क्षेत्रों में पार्टी की ग्रामीण राजनीति में मौजूदगी चर्चा में रही थी। अब आगामी चुनावों में RLP अपने पुराने प्रदर्शन को आधार बनाकर संगठन के विस्तार की कोशिश कर रही है। हालांकि, इस बार पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, इसका आकलन चुनाव परिणाम आने के बाद ही किया जा सकेगा।
चुनाव समिति की बैठक में कई नेता रहे मौजूद
बैठक में पूर्व मंत्री दिलीप चौधरी, पूर्व विधायक अशोक तंवर, नारायण बेनीवाल, इंदिरा देवी बावरी, आर.के. मेहर और प्रिय सिंह मेघवाल सहित पार्टी के कई नेता और चुनाव समिति के सदस्य मौजूद रहे।बैठक में चुनावी कार्ययोजना, संभावित प्रत्याशियों और संगठन की तैयारियों पर चर्चा हुई। अब पार्टी की अगली महत्वपूर्ण प्रक्रिया उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करना होगी।
पहली सूची पर टिकी नजर
राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी तैयारियां आगे बढ़ा रहे हैं। इसी बीच RLP ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला दोहराते हुए प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया तेज की है।अब पार्टी की पहली सूची, उम्मीदवारों के चयन और जिला स्तर पर संगठन की सक्रियता पर नजर रहेगी। RLP की चुनावी रणनीति का असर ग्रामीण क्षेत्रों में किस तरह दिखाई देता है, यह आगामी चुनावों के दौरान स्पष्ट होगा।