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अलवर जिला परिषद का गजब सिस्टम! जिस शिकायत पर 2 बार सस्पेंड हुआ कर्मचारी, रिकॉर्ड में वही शिकायत गायब

अलवर। अलवर जिला परिषद में विभागीय कार्रवाई से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। डीआरडीए में कार्यरत एक लिपिक को तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से कथित अभद्रता के आरोप में एक महीने के भीतर दो बार निलंबित किया गया। इतना ही नहीं, कर्मचारी को एक ही दिन में तीन आरोप-पत्र भी जारी किए गए। कर्मचारी करीब 16 महीने तक निलंबित रहा। लेकिन बाद में जब उसने संबंधित शिकायत के दस्तावेज मांगे, तो जिला परिषद ने लिखित जवाब में कहा कि ऐसी कोई शिकायत कार्यालय में प्राप्त नहीं हुई और न ही रिकॉर्ड में दर्ज है। अब इस मामले में विभागीय कार्रवाई के आधार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कार्यवाहक सीईओ से अभद्रता का लगा था आरोप

मामला जिला परिषद के डीआरडीए में कार्यरत एक लिपिक से जुड़ा है। कर्मचारी पर 29 नवंबर 2022 को तत्कालीन कार्यवाहक सीईओ के साथ अभद्रता करने का आरोप लगा था। अगले दिन, 30 नवंबर को जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में अध्यक्ष ने बताया कि कर्मचारी के खिलाफ एसीईओ की ओर से लिखित शिकायत दी गई है।इसके बाद 2 दिसंबर 2022 को कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया। शिकायत के आधार पर की गई इस कार्रवाई के बाद मामला विभागीय और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया।

निलंबन पर स्टे के बाद फिर हुई कार्रवाई

पहले निलंबन आदेश को कर्मचारी ने राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण में चुनौती दी। अधिकरण ने 22 दिसंबर 2022 को निलंबन पर स्टे दे दिया। इसके महज पांच दिन बाद, 27 दिसंबर को डीईसी ने कर्मचारी को दोबारा निलंबित करने का फैसला किया।इसके बाद 4 जनवरी 2023 को कर्मचारी को फिर से निलंबित कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में विभागीय कार्रवाई भी जारी रही। कर्मचारी को एक ही दिन में तीन आरोप-पत्र दिए जाने का मामला भी सामने आया।

करीब 16 महीने बाद बहाली

निलंबन के बाद कर्मचारी करीब 16 महीने तक विभागीय कार्रवाई का सामना करता रहा। मार्च 2024 में उसे बहाल किया गया। बहाली के बाद उसने अपने खिलाफ जारी आरोप-पत्रों और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी।कर्मचारी ने खास तौर पर उस शिकायत की प्रति और रिकॉर्ड की जानकारी मांगी, जिसके आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके बाद जिला परिषद की ओर से दिया गया जवाब पूरे मामले में महत्वपूर्ण बन गया।

जिला परिषद ने लिखित जवाब में क्या कहा?

कर्मचारी को दिए गए लिखित जवाब में जिला परिषद ने बताया कि संबंधित शिकायत कार्यालय में प्राप्त नहीं हुई थी और न ही कार्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज है। परिषद ने इस संबंध में आवक पंजिका के संबंधित पृष्ठों की प्रतियां भी उपलब्ध कराईं।यानी जिस शिकायत का हवाला देकर कर्मचारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई थी, उसकी प्रविष्टि उपलब्ध रिकॉर्ड में नहीं मिली। इस जवाब के बाद विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

अब कार्रवाई के आधार पर उठ रहे सवाल

इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि यदि संबंधित शिकायत जिला परिषद के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थी, तो कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई किस दस्तावेज या आधार पर की गई? इसके अलावा एक महीने के भीतर दो बार निलंबन और एक ही दिन में तीन आरोप-पत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया भी जांच का विषय है।हालांकि, शिकायत का रिकॉर्ड नहीं मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि शिकायत कभी की ही नहीं गई थी। यह स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों के पास उपलब्ध अन्य दस्तावेजों, पत्राचार और विभागीय रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।

जांच से स्पष्ट होगी पूरी स्थिति

अलवर जिला परिषद का यह मामला विभागीय कार्रवाई में रिकॉर्ड संधारण और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करता है। कर्मचारी को करीब 16 महीने तक निलंबित रखने के बाद संबंधित शिकायत का रिकॉर्ड नहीं मिलना प्रशासनिक प्रक्रिया की समीक्षा की जरूरत दर्शाता है।अब महत्वपूर्ण होगा कि विभाग संबंधित शिकायत, निलंबन आदेशों और आरोप-पत्रों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करे। इससे पता चल सकेगा कि कार्रवाई किस आधार पर की गई और रिकॉर्ड में शिकायत दर्ज नहीं होने के पीछे क्या वजह रही।

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Stv News Rajasthan

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