जिला परिषद सदस्यों की दो महीने तक बाड़ाबंदी क्यों? टीकाराम जूली ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अलवर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों के बीच नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने चुनाव कार्यक्रम और नामांकन से लेकर प्रमुख पदों के चुनाव तक के लंबे अंतराल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि जिला परिषद सदस्यों को उप जिला प्रमुख के चुनाव तक लंबे समय के लिए बाड़ाबंदी में रहना पड़ सकता है। जूली ने भाजपा सरकार पर चुनाव प्रक्रिया में देरी और कथित गड़बड़ियों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “इस चुनाव में हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे।” साथ ही चेतावनी दी कि चुनाव में बेईमानी या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नामांकन से उप जिला प्रमुख के चुनाव तक लंबा अंतराल
जूली ने सवाल उठाया कि जिला परिषद सदस्य के चुनाव की प्रक्रिया और उप जिला प्रमुख के चुनाव के बीच इतना लंबा अंतर क्यों रखा गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई उम्मीदवार 8 अक्टूबर को नामांकन भरता है, तो संबंधित सदस्य को 26 नवंबर को उप जिला प्रमुख के चुनाव के बाद ही राहत मिल पाएगी।राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में होंगे। मतगणना 20 नवंबर को निर्धारित है, जबकि जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख के चुनाव क्रमशः 25 और 26 नवंबर को होने हैं। इस समय-सारणी के कारण नामांकन से लेकर शीर्ष पदों के चुनाव तक कई सप्ताह का अंतर बन रहा है।जूली ने सवाल किया कि क्या इतनी लंबी प्रक्रिया सरकार के ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के दावे के अनुरूप है। उन्होंने आशंका जताई कि इस दौरान जिला परिषद सदस्यों की बाड़ाबंदी की नौबत आ सकती है।
‘बेईमानी हुई तो ईंट का जवाब पत्थर से देंगे’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस इस बार चुनाव में पूरी सतर्कता बरतेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह की बेईमानी या गड़बड़ी हुई, तो पार्टी उसका कड़ा विरोध करेगी।जूली ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव के हर चरण पर नजर रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी चुनाव में किसी भी तरह की कथित अनियमितता को स्वीकार नहीं करेगी। उनका बयान आगामी पंचायतीराज चुनावों को लेकर कांग्रेस की रणनीति और सरकार के प्रति उसके रुख को दर्शाता है।
‘दो साल तक चुनाव नहीं कराए, संविधान की भावना का उल्लंघन’
जूली ने आरोप लगाया कि राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव करीब दो साल की देरी से कराए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, चुनाव कराने के लिए कांग्रेस को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा और अदालत के निर्देशों के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ी।उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की भावना से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि सरकार को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। हालांकि, चुनाव में देरी और उससे जुड़े प्रशासनिक कारणों को लेकर सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
नगर निकाय चुनावों में गड़बड़ी के भी लगाए आरोप
जूली ने पिछले नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए भाजपा सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और चुनाव प्रक्रिया में मनमानी के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बार पहले से अधिक सतर्कता के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी।उनके अनुसार, पार्टी कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर चुनावी गतिविधियों पर नजर रखेंगे। जूली ने दावा किया कि कांग्रेस अपने प्रत्याशियों और समर्थकों के साथ समन्वय बनाकर चुनाव प्रक्रिया में किसी भी संभावित गड़बड़ी का विरोध करेगी। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं।
पेंशन, पालनहार और किसानों के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा
जूली ने राज्य सरकार को पेंशन, पालनहार योजना, गरीब विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति और किसानों को बीज व खाद उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर भी घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन योजनाओं से जुड़े मामलों में आम लोगों को परेशानी हो रही है।उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले। जूली ने इन मुद्दों को ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव के दौरान जनता के सामने इन विषयों को उठाया जाएगा।
टिकट वितरण के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त
पंचायतीराज चुनावों की तैयारियों पर जूली ने बताया कि कांग्रेस ने प्रदेश, जिला और विधानसभा स्तर पर पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। उनका काम संभावित उम्मीदवारों से आवेदन लेना, कार्यकर्ताओं से संवाद करना और स्थानीय स्तर पर दावेदारों की राय जानना है।जूली के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस की कैंपेनिंग कमेटी की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पार्टी प्रभारी रंधावा सहित वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।उन्होंने बताया कि प्रदेश स्तर पर 20 नेताओं की सूची जारी की गई है। इन नेताओं को जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी जाएगी। अलवर जिले में भी पंचायत समिति और जिला परिषद वार्डों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं।
जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट देने पर जोर
जूली ने कहा कि कांग्रेस की प्राथमिकता जमीनी स्तर पर काम करने वाले और योग्य कार्यकर्ताओं को टिकट देना है। उनके मुताबिक, पर्यवेक्षक दावेदारों से आवेदन लेने के साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं से चर्चा कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पर्यवेक्षकों से बातचीत की है। गांवों और स्थानीय स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों के नाम अंतिम किए जाएंगे।
नामांकन के आसपास घोषित हो सकती है प्रत्याशियों की सूची
टिकटों की सूची को लेकर जूली ने कहा कि स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों में उम्मीदवारों के नाम कई बार अंतिम समय में तय होते हैं। उन्होंने संभावना जताई कि प्रमुख राजनीतिक दल नामांकन और चुनाव चिह्न आवंटन की समय-सीमा के आसपास अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर सकते हैं।जूली के अनुसार, चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ता पहले से ही अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं और जनसंपर्क कर रहे हैं। हालांकि, प्रत्याशियों की अंतिम सूची कब जारी होगी, यह पार्टी की चयन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
चुनाव कार्यक्रम और बाड़ाबंदी पर आगे भी रहेगी नजर
टीकाराम जूली ने चुनाव प्रक्रिया के लंबे अंतराल को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला परिषद सदस्यों को कई सप्ताह तक राजनीतिक गतिविधियों और संभावित बाड़ाबंदी की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सदस्यों के मतदान और मतगणना के बाद जिला प्रमुख तथा उप जिला प्रमुख के चुनाव अलग-अलग तारीखों पर निर्धारित हैं।अब इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और चुनाव प्रक्रिया के दौरान होने वाले घटनाक्रम पर नजर रहेगी। फिलहाल बाड़ाबंदी की आशंका जूली की ओर से जताई गई है; इसे वास्तविक रूप से होने वाली कार्रवाई नहीं माना जा सकता।