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उदयपुर में स्कूल की जर्जर छत का प्लास्टर गिरा, 3 बच्चे घायल; हादसे के समय शिक्षक की मौजूदगी पर सवाल

उदयपुर। भींडर पंचायत समिति क्षेत्र के वाणिया तलाई स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नारदा में बड़ा हादसा हो गया। जर्जर कक्षा की छत का प्लास्टर अचानक नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से तीन छात्र-छात्राएं घायल हो गए। हादसे के बाद घायल बच्चे खुद पैदल घर पहुंचे। इसके बाद परिजन उन्हें राजकीय जिला चिकित्सालय भींडर लेकर गए, जहां उनका उपचार किया गया।घटना के बाद स्कूल भवन की जर्जर स्थिति सामने आई। वहीं हादसे के समय कक्षा में शिक्षक की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रशासन ने जर्जर भवन को बंद करने के निर्देश दिए हैं। स्कूल में 37 बच्चे नामांकित हैं। अब उनकी पढ़ाई के लिए सुरक्षित और छायादार वैकल्पिक स्थान तलाशा जा रहा है।

छत का प्लास्टर गिरने से तीन बच्चे घायल

हादसा ग्राम पंचायत वाणिया तलाई के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नारदा में हुआ। कक्षा-कक्ष की छत से अचानक प्लास्टर का बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा। उस समय कक्षा में मौजूद काजल (7), कृष्णा (7) और ललित (8) इसकी चपेट में आ गए।हादसे में तीनों बच्चों को चोटें आईं। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों से खून निकलने लगा। घटना के बाद बच्चे घबरा गए। इसके बावजूद वे खुद पैदल अपने घर पहुंचे और परिजनों को हादसे की जानकारी दी।इसके बाद परिजन बच्चों को लेकर राजकीय जिला चिकित्सालय भींडर पहुंचे। अस्पताल में तीनों का उपचार किया गया।

घायल बच्चों ने शिक्षक के कक्षा में नहीं होने की बात कही

घायल विद्यार्थियों ने बताया कि जिस समय छत का प्लास्टर गिरा, उस वक्त कक्षा में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था। बच्चों के अनुसार, एक शिक्षक छुट्टी पर थे, जबकि दूसरे शिक्षक वाणिया तलाई गए हुए थे।हालांकि बाद में संबंधित शिक्षक की ओर से मौके पर मौजूद होने का दावा किया गया। इस विरोधाभासी जानकारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने भी शिक्षक की मौजूदगी और हादसे के बाद बच्चों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिक्षक मौके पर मौजूद थे, तो घायल बच्चों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की पहल क्यों नहीं की गई। मामले में शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

स्कूल में 37 बच्चे, दो शिक्षक नियुक्त

राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नारदा में कुल 37 बच्चों का नामांकन बताया गया है। स्कूल में दो शिक्षक नियुक्त हैं। इनमें एक स्थायी और दूसरा संविदा शिक्षक बताया गया है।हादसे के बाद अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र खटीक ने स्कूल पहुंचकर उपस्थिति रजिस्टर की जांच की। इस दौरान एक शिक्षक की अनुपस्थिति दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद शिक्षक की ओर से छुट्टी पर होने की बात बताई गई।घटना के बाद ग्रामीणों ने स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

शिक्षक की टेबल-चेयर पर ही गिरा प्लास्टर

हादसे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छत से जिस स्थान पर प्लास्टर गिरा, वहीं शिक्षक की टेबल और चेयर रखी हुई थी। प्लास्टर गिरने से टेबल क्षतिग्रस्त हो गई।कमरे में टूटी हुई चेयर, प्लास्टर का मलबा और जंग लगे सरियों के टुकड़े दिखाई दिए। इससे कक्षा की छत की जर्जर स्थिति साफ नजर आई। गनीमत रही कि जिस समय प्लास्टर गिरा, उस वक्त शिक्षक उस कुर्सी पर नहीं बैठे थे।

2020 में भी खराब हुई थी छत

ग्रामीणों के अनुसार स्कूल भवन की छत लंबे समय से खराब स्थिति में है। वर्ष 2020 में भी छत खराब होने के बाद मरम्मत और प्लास्टर का काम कराया गया था। अब वही प्लास्टर दोबारा गिर गया।ग्रामीणों का आरोप है कि भवन को मजबूत करने के बजाय केवल रंग-रोगन कर स्थिति सुधारने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि कक्षा के अलावा स्कूल कार्यालय की छत भी जर्जर स्थिति में है।

अधिकारी को स्कूल तक पहुंचने में भी हुई परेशानी

घटना के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मौके पर पहुंचने को लेकर भी सवाल उठे। ग्रामीणों के अनुसार, मौके पर पहुंचे ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार को स्कूल तक पहुंचने का रास्ता मालूम नहीं था।ग्रामीणों का दावा है कि अधिकारी मुख्य सड़क के आसपास विद्यालय तलाशते नजर आए। इस मामले ने स्कूल की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है।

प्रशासन ने जर्जर स्कूल भवन कराया बंद

हादसे की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक टीम स्कूल पहुंची। विकास अधिकारी गुलाब सिंह गुर्जर, तहसीलदार सतीश चंद्र पाटीदार, पीईओ अमृतलाल मीणा, पटवारी वार्ता चौबीसा, ग्राम विकास अधिकारी गुलाब सिंह शक्तावत और एएनएम इन्द्रा मेघवाल सहित अधिकारी मौके पर पहुंचे।जर्जर भवन की स्थिति देखते हुए प्रशासन ने स्कूल भवन को बंद करने के निर्देश दिए। साथ ही बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो, इसके लिए सुरक्षित और छायादार वैकल्पिक परिसर तलाशने को कहा गया है।

अब स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

स्कूल में हुए हादसे ने सरकारी विद्यालयों के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। 37 बच्चों की पढ़ाई जिस भवन में हो रही थी, उसकी छत पहले से खराब बताई जा रही थी।अब प्रशासन के सामने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के साथ सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने की चुनौती है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि जर्जर भवन में कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं और समय रहते मरम्मत क्यों नहीं कराई गई।

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Stv News Rajasthan

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