डेढ़ साल से कोठरी में पढ़ रहे 180 बच्चे, 7 शिक्षक; जमीन तैयार फिर भी स्कूल भवन का इंतजार
प्रतापगढ़। जिले के पारसोला क्षेत्र के भंगाभट्ट गांव में सरकारी स्कूल की स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में करीब 180 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल से कक्षाओं के लिए पर्याप्त भवन नहीं है। बच्चे छोटे कमरे और खुले बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं।स्कूल का पुराना भवन भारी ब्लास्टिंग के कारण जर्जर होने के बाद खाली कराया गया था। इसके बाद स्कूल को एक पुराने निजी भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। अब ग्रामीण जमीन देने को तैयार हैं। गोलछा ग्रुप माइंस की ओर से नए भवन के निर्माण की घोषणा भी की गई है। इसके बावजूद जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
ब्लास्टिंग से जर्जर हुआ था पुराना भवन
भंगाभट्ट गांव का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय लंबे समय से संचालित है। स्कूल का पुराना भवन गोलछा ग्रुप माइंस के लीज क्षेत्र में बताया गया है। क्षेत्र में होने वाली भारी ब्लास्टिंग के कारण भवन जर्जर हो गया था।सुरक्षा को देखते हुए अगस्त 2025 में स्कूल को पुराने भवन से हटाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद विद्यार्थियों को एक पुराने निजी भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। तभी से स्कूल में पर्याप्त कक्षों की समस्या बनी हुई है।
डेढ़ साल से छोटे कमरे और बरामदे में पढ़ाई
वर्तमान में स्कूल में करीब 180 विद्यार्थियों का नामांकन है। इन बच्चों के लिए सिर्फ छोटे कमरे और खुले बरामदे में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश मीणा के अनुसार स्कूल में सात शिक्षक कार्यरत हैं। सीमित जगह के कारण कक्षाओं का संचालन चुनौतीपूर्ण है। छोटे कमरों में पर्याप्त हवा और रोशनी नहीं होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी होती है।गर्मी और बारिश के मौसम में खुले बरामदे में पढ़ाई और भी मुश्किल हो जाती है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीण तीन बीघा जमीन देने को तैयार
स्कूल भवन की समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने जमीन उपलब्ध कराने की पहल की है। ग्रामीणों के अनुसार भंगाभट्ट बाईपास रोड पर संचया, गुंडिया, वालिया, गोतिया और लालशंकर पुत्र हवजी मीणा अपनी पैतृक जमीन में से करीब तीन बीघा सामलात जमीन स्कूल के लिए देने को तैयार हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जमीन उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इसी वजह से नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
गोलछा ग्रुप माइंस ने की भवन निर्माण की घोषणा
ग्रामीणों के अनुसार एएसडीसी गोलछा ग्रुप माइंस की ओर से स्कूल के लिए सुविधायुक्त भवन बनाने की घोषणा की गई है। इसमें करीब 10 कक्षा-कक्ष बनाए जाने की बात कही गई है।यदि जमीन आवंटित हो जाती है और निर्माण प्रक्रिया शुरू होती है, तो विद्यार्थियों को लंबे समय से चली आ रही समस्या से राहत मिल सकती है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जमीन से जुड़ी प्रक्रिया जल्द पूरी करे।
पहले भी जमीन आवंटन की कोशिश हुई थी
प्रधानाध्यापक के अनुसार पूर्व में जिला कलेक्टर स्तर से विद्यालय के लिए जमीन आवंटित की गई थी। हालांकि ग्रामीणों की सहमति नहीं बनने के कारण वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।अब ग्रामीणों की ओर से जमीन देने की सहमति होने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद जमीन आवंटन और अन्य सरकारी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई हैं। यही वजह है कि नया भवन अभी तक धरातल पर नहीं आ सका है।
तहसीलदार बोलीं- मुझे जानकारी नहीं
स्कूल की जमीन से जुड़े मामले पर धरियावद तहसीलदार दीपिका कटारा ने कहा कि उन्हें विद्यालय की जमीन के संबंध में जानकारी नहीं है।ऐसे में सवाल यह है कि जब ग्रामीण जमीन देने को तैयार होने का दावा कर रहे हैं और भवन निर्माण की घोषणा भी हो चुकी है, तो प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है। स्कूल प्रबंधन और ग्रामीण अब प्रशासन से स्पष्ट कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर सबसे बड़ा असर
डेढ़ साल से अस्थायी व्यवस्था में चल रहे स्कूल में सबसे ज्यादा परेशानी विद्यार्थियों को हो रही है। 180 बच्चों के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं होने से शिक्षकों को भी कक्षाएं संचालित करने में मुश्किल होती है।ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन केवल एक निर्माण कार्य नहीं है। यह बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य से जुड़ा मामला है। अब उनकी उम्मीद प्रशासन की कार्रवाई और प्रस्तावित नए भवन के निर्माण पर टिकी है।