नैनवां उपजिला अस्पताल में डॉक्टरों का संकट, 28 पदों में सिर्फ 3 चिकित्सक
बूंदी। नैनवां उपजिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। 100 बेड के इस अस्पताल में चिकित्सकों के 28 पद स्वीकृत हैं। लेकिन मरीजों के उपचार के लिए फिलहाल सिर्फ तीन डॉक्टर उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी डॉक्टर के अवकाश या कोर्ट एविडेंस पर जाने से व्यवस्था और बिगड़ जाती है। कई बार दो डॉक्टरों को ही प्रतिदिन करीब 600 मरीजों का आउटडोर संभालना पड़ता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली होने से अस्पताल की कई ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर की सेवाएं भी प्रभावित हैं।
28 पद स्वीकृत, मरीजों के लिए सिर्फ तीन डॉक्टर
नैनवां उपजिला अस्पताल को 100 बेड की क्षमता के साथ संचालित किया जा रहा है। इसके लिए चिकित्सा विभाग ने 28 चिकित्सकों के पद स्वीकृत किए हैं। लेकिन वर्तमान में मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं।अस्पताल प्रशासन के अनुसार चार डॉक्टरों में से एक महिला चिकित्सक शगुफ्ता बिना अवकाश स्वीकृत कराए अनुपस्थित चल रही हैं। इसके चलते मरीजों को देखने के लिए तीन डॉक्टर ही उपलब्ध रह जाते हैं।
एक दिन में 600 मरीजों का आउटडोर
नैनवां अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन करीब 600 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों की संख्या और उपलब्ध चिकित्सकों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।किसी डॉक्टर के अवकाश या अन्य ड्यूटी पर जाने की स्थिति में दो डॉक्टरों पर ही बड़ी संख्या में मरीजों को देखने की जिम्मेदारी आ जाती है। इससे मरीजों को ओपीडी में अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
दो घंटे तक मरीजों को करना पड़ रहा इंतजार
शनिवार को भी अस्पताल के आउटडोर के बाहर मरीजों की लंबी कतारें देखी गईं। मरीजों को डॉक्टर को दिखाने के लिए करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल का दर्जा बढ़ने के बाद उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद थी। लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण कई सेवाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
विशेषज्ञों के पद खाली, ओपीडी कक्षों पर ताले
उपजिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए अलग-अलग ओपीडी कक्ष तैयार किए जा रहे हैं। इनमें सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, ईएनटी, शिशु रोग और स्त्री रोग जैसी सेवाओं के लिए व्यवस्था की गई है।लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण कई ओपीडी कक्षों का नियमित उपयोग नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में वरिष्ठ और कनिष्ठ विशेषज्ञों के कुल 11 पद स्वीकृत बताए गए हैं। इनमें दंत, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ ही नियुक्त हैं। बाकी पद रिक्त हैं।
ट्रॉमा सेंटर में एक भी डॉक्टर नहीं
नैनवां में एनएच-148डी और स्टेट हाईवे-34 पर होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की गई थी। लेकिन यहां चिकित्सकों के सभी पद खाली बताए जा रहे हैं।ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकों के छह पद स्वीकृत हैं। इनमें सर्जरी के कनिष्ठ विशेषज्ञ का एक पद, सर्जरी के दो चिकित्साधिकारी और ऑर्थोपेडिक के तीन पद शामिल हैं। फिलहाल एक भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होने से दुर्घटना में घायल मरीजों को विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल पा रहा है।
गंभीर मरीजों को करना पड़ रहा रेफर
ट्रॉमा सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सीधा असर सड़क हादसों में घायल मरीजों पर पड़ रहा है। आवश्यक उपचार उपलब्ध नहीं होने पर गंभीर घायलों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।नैनवां जिले का महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को कई बार बूंदी और अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों की ओर जाना पड़ता है।
पीएमओ ने बताई वर्तमान स्थिति
उपजिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार प्रजापत के अनुसार अस्पताल में वर्तमान में चार चिकित्सक हैं। इनमें महिला चिकित्सक शगुफ्ता बिना अवकाश स्वीकृत कराए अनुपस्थित चल रही हैं।इसके चलते मरीजों के उपचार और ओपीडी संचालन के लिए तीन डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
दर्जा बढ़ा, लेकिन सुविधाओं का इंतजार
नैनवां अस्पताल का दर्जा बढ़ने के बाद क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि यहां विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होगा। हालांकि डॉक्टरों के रिक्त पदों के कारण यह उम्मीद पूरी तरह साकार नहीं हो पाई है।100 बेड के अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक, विशेषज्ञ डॉक्टर और ट्रॉमा सेंटर में मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति अब बड़ी जरूरत बन गई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि रिक्त पद जल्द भरे जाएं, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर न होना पड़े।