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जयपुर-जोधपुर अग्निकांड से भी नहीं जागा राजस्थान? दिल्ली-मुंबई में रोबोट से बुझ रही आग, यहां अब भी इंतजार

जयपुर। राजस्थान में लगातार सामने आ रही भीषण आग की घटनाओं के बीच आधुनिक फायर फाइटिंग तकनीक को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में आग बुझाने के लिए रोबोट जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं राजस्थान में करीब चार साल पहले ऐसी तकनीक का डेमो होने के बावजूद इसकी खरीद अब तक आगे नहीं बढ़ सकी है।साल 2022 में जयपुर, जोधपुर और कोटा में आग बुझाने वाले रोबोट का प्रदर्शन किया गया था। उस समय इन रोबोट को संकरी गलियों और भीषण आग वाले इलाकों के लिए उपयोगी बताया गया था। इसके बावजूद खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।हाल ही में जयपुर के परकोटे में पुरोहित जी का कटला अग्निकांड ने एक बार फिर इस जरूरत को सामने ला दिया। संकरी गलियों के कारण दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी हुई। आग बुझाने के लिए छतों के ऊपर से पाइप पहुंचाना पड़ा। दमकलों को पानी भरने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़े।

पुरोहित जी का कटला अग्निकांड ने दिखाई बड़ी चुनौती

17 सितंबर को जयपुर के पुरोहित जी का कटला में आग लगने के बाद दमकल विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संकरी गलियां बनीं। बड़े दमकल वाहन सीधे आग वाली जगह तक नहीं पहुंच सके।ऐसे में दुकानों की छत के ऊपर से पाइप डालकर आग तक पानी पहुंचाया गया। आग बुझाने की प्रक्रिया के दौरान दमकल वाहनों में पानी खत्म होता रहा। उन्हें पानी भरने के लिए घाटगेट फायर स्टेशन तक जाना पड़ा।बताया गया कि दमकलों ने फायर स्टेशन और कटला के बीच करीब 42 फेरे लगाए। रास्ते में ट्रैफिक जाम भी चुनौती बना रहा। इससे आग पर काबू पाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

ऐसे हालात में रोबोट हो सकता है उपयोगी

फायर फाइटिंग रोबोट को खास तौर पर ऐसे स्थानों के लिए उपयोगी माना जाता है, जहां इंसानों या बड़े दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल होता है।यह रोबोट उच्च तापमान वाले क्षेत्र के करीब जाकर आग पर पानी की बौछार कर सकता है। संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में इसका इस्तेमाल दमकलकर्मियों के जोखिम को भी कम कर सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार रोबोट को लंबी हाई-प्रेशर पाइपलाइन से जोड़ा जा सकता है। इससे लगातार पानी की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

एक बार चार्ज होने पर लंबे समय तक काम का दावा

डेमो के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक ऐसे रोबोट एक बार चार्ज होने के बाद लंबे समय तक ऑपरेशन में रह सकते हैं। करीब 12 घंटे तक काम करने की क्षमता का दावा भी किया गया था।रोबोट को 300 से 500 मीटर तक लंबी हाई-प्रेशर पानी की पाइपलाइन से जोड़कर आग वाले स्थान तक पानी पहुंचाया जा सकता है। इससे बार-बार दमकल वाहन को आग वाली जगह से पानी भरने के लिए हटाने की जरूरत कम हो सकती है।हालांकि वास्तविक क्षमता और उपयोगिता संबंधित रोबोट के मॉडल और तकनीकी specifications पर निर्भर करेगी।

2022 में जयपुर, जोधपुर और कोटा में हुआ था डेमो

राजस्थान में इस तकनीक को लेकर करीब चार साल पहले पहल हुई थी। वर्ष 2022 में जयपुर, जोधपुर और कोटा में रोबोट से आग बुझाने का डेमो कराया गया था।उस समय स्वायत्त शासन विभाग के स्तर पर ऐसे रोबोट खरीदने पर विचार हुआ था। एक रोबोट की अनुमानित लागत करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपए बताई गई थी।डेमो के दौरान तकनीक की क्षमता दिखाई गई। इसके बावजूद खरीद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और मामला लंबे समय तक लंबित रहा।

जयपुर जैसे पुराने शहरों में ज्यादा जरूरत

राजस्थान के कई शहरों में पुराने बाजार और घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। जयपुर का परकोटा इसका प्रमुख उदाहरण है। यहां कई जगह सड़कें और गलियां इतनी संकरी हैं कि बड़े दमकल वाहन आसानी से प्रवेश नहीं कर पाते।ऐसे क्षेत्रों में आग लगने पर दमकलकर्मियों को वैकल्पिक रास्तों और लंबी पाइपलाइन का सहारा लेना पड़ता है। यदि आग तेजी से फैल रही हो तो हर मिनट महत्वपूर्ण हो जाता है।इसी वजह से आधुनिक फायर फाइटिंग तकनीक की जरूरत को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।

सिर्फ रोबोट नहीं, पूरी फायर सिस्टम की जरूरत

रोबोट आग बुझाने की क्षमता बढ़ा सकता है, लेकिन केवल एक तकनीक से अग्निशमन व्यवस्था की सभी समस्याएं खत्म नहीं होंगी। इसके साथ पर्याप्त दमकल वाहन, प्रशिक्षित कर्मचारी, पानी की उपलब्धता, संकरी गलियों में पहुंचने की व्यवस्था और बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम भी जरूरी हैं।खासकर पुराने बाजारों में फायर सेफ्टी ऑडिट और आपातकालीन पहुंच के रास्तों को भी मजबूत करना जरूरी है।

खरीद प्रस्ताव पर फिर हुई चर्चा

जयपुर नगर निगम की फायर शाखा की उपायुक्त दुर्गा कुमारी के अनुसार आग बुझाने वाले रोबोट की खरीद के प्रस्ताव पर स्वायत्त शासन विभाग में बैठक हो चुकी है।उनके अनुसार जनहित को ध्यान में रखते हुए इस तकनीक की खरीद पर जल्द निर्णय होने की उम्मीद है।अब बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2022 में हुए डेमो के बाद जिस तकनीक की खरीद आगे नहीं बढ़ सकी, वह अब कितनी जल्दी जमीन पर उतरती है।

अग्निकांडों के बाद तकनीक पर फिर नजर

जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे शहरों में पुराने और घने बाजारों की अपनी चुनौतियां हैं। ऐसे इलाकों में आग लगने पर दमकल विभाग को कई बार सामान्य व्यवस्था से अलग तरीके अपनाने पड़ते हैं।पुरोहित जी का कटला अग्निकांड ने भी संकरी गलियों, पानी की उपलब्धता और दमकल की पहुंच जैसी चुनौतियों को सामने रखा। अब फायर रोबोट की खरीद को लेकर हुई नई चर्चा के बाद निगाह स्वायत्त शासन विभाग के फैसले पर है।यदि तकनीक को मंजूरी मिलती है, तो राजस्थान के बड़े शहरों में अग्निशमन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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Stv News Rajasthan

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