अलवर मत्स्य विवि में 3 साल में 34 हजार नामांकन घटे, डिग्री में लग रहे 4 साल
अलवर के राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में 1 लाख 38 हजार 597 नामांकन हुए थे। वर्ष 2026 में यह संख्या घटकर 1 लाख 4 हजार 578 रह गई। यानी तीन साल में 34 हजार 19 नामांकन कम हुए हैं। यह गिरावट करीब 24.5 प्रतिशत है। नामांकन में कमी के साथ विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था भी विद्यार्थियों के लिए चुनौती बन रही है। तीन साल में पूरी होने वाली स्नातक डिग्री कई छात्रों को साढ़े तीन से चार साल में पूरी करनी पड़ रही है।
2023 में सबसे ज्यादा नामांकन
मत्स्य विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में संबद्ध कॉलेजों में 1 लाख 33 हजार 592 नामांकन हुए थे। इसके बाद वर्ष 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 1 लाख 38 हजार 597 तक पहुंच गया। यह तीन साल की अवधि में सबसे अधिक नामांकन रहा। इसके बाद विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट देखने को मिली। वर्ष 2024 में नामांकन 1 लाख 36 हजार 999 रहे। इसके बाद 2025 में यह संख्या तेजी से घटकर 1 लाख 2 हजार 243 रह गई।
2026 में मामूली बढ़ोतरी, फिर भी बड़ी कमी
वर्ष 2026 में नामांकन संख्या में मामूली सुधार हुआ। इस साल कुल 1 लाख 4 हजार 578 विद्यार्थियों ने नामांकन कराया। हालांकि यह संख्या वर्ष 2023 के मुकाबले 34 हजार 19 कम है। वहीं वर्ष 2024 की तुलना में भी 2026 में 32 हजार 421 नामांकन कम हुए हैं। विश्वविद्यालय से करीब 202 कॉलेज संबद्ध हैं। इनमें सरकारी और निजी दोनों तरह के कॉलेज शामिल हैं। ऐसे में नामांकन में आई कमी का असर बड़ी संख्या में संबद्ध संस्थानों पर पड़ रहा है।
परीक्षा व्यवस्था से भी विद्यार्थियों को परेशानी
नामांकन में गिरावट के बीच परीक्षा व्यवस्था भी चर्चा में है। विश्वविद्यालय की स्नातक डिग्री सामान्य तौर पर तीन साल में पूरी होनी चाहिए। लेकिन कई विद्यार्थियों को डिग्री पूरी करने में साढ़े तीन से चार साल तक लग रहे हैं। परीक्षा और प्रायोगिक परीक्षाएं समय पर नहीं होने से परिणाम जारी होने में देरी होती है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों के अगले सेमेस्टर या आगे की पढ़ाई में प्रवेश पर पड़ता है।
प्रायोगिक परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव
वर्ष 2026 में निकाय चुनाव के कारण कुछ परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव किया गया। यूजी द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर की प्रायोगिक परीक्षाओं की तिथियां भी आगे बढ़ाई गईं। जानकारी के अनुसार कुछ कॉलेजों में अब भी प्रायोगिक परीक्षाएं चल रही हैं। परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव और परिणाम जारी होने में देरी से विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र पूरा करने में अतिरिक्त समय लग रहा है।
शहर से दूर विश्वविद्यालय परिसर
मत्स्य विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर हल्दीना में स्थित है। यह अलवर शहर से काफी दूरी पर है। पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं होने से विद्यार्थियों को परिसर तक पहुंचने में परेशानी होती है। खासकर नियमित रूप से विश्वविद्यालय आने वाले विद्यार्थियों के लिए आवागमन एक चुनौती बना हुआ है। विश्वविद्यालय के नियमित कामकाज पर भी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का असर पड़ता है। चुनाव सहित अन्य सरकारी कार्यों में अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगने से विश्वविद्यालय के काम पर अतिरिक्त दबाव रहता है।
शैक्षणिक स्टाफ और संसाधनों की कमी
विश्वविद्यालय में नियमित शैक्षणिक स्टाफ के साथ जरूरी संसाधनों की कमी का मुद्दा भी सामने आता रहा है। उच्च शिक्षा संस्थान में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए पर्याप्त शिक्षक, प्रयोगशालाएं और अन्य सुविधाएं जरूरी होती हैं। संसाधनों की उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था का असर विद्यार्थियों के अनुभव पर भी पड़ सकता है। ऐसे में नामांकन में गिरावट के कारणों पर विश्वविद्यालय स्तर पर समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है।
पीएचडी शुरू नहीं होने से शोध के अवसर सीमित
मत्स्य विश्वविद्यालय में अभी तक पीएचडी कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया है। इससे उच्च शिक्षा और शोध में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय के स्तर पर आगे बढ़ने के विकल्प सीमित हैं। शोध गतिविधियों के विस्तार और पीएचडी कार्यक्रम शुरू होने से विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल विश्वविद्यालय में नामांकन बढ़ाने के साथ शैक्षणिक और शोध गतिविधियों को मजबूत करना भी चुनौती बना हुआ है।
रजिस्ट्रार बोले- नामांकन बढ़ाने के प्रयास होंगे
नामांकन में आई गिरावट को लेकर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार हेमराज परिडवाल ने कहा कि इस मामले को दिखवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नामांकन बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन नामांकन में कमी के कारणों की समीक्षा के बाद क्या कदम उठाता है और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या बदलाव किए जाते हैं।