जयपुर में नो यूपीआई डे, दुकानों पर ढके QR कोड; व्यापारी बोले- MDR का विरोध जारी रहेगा
जयपुर में शुक्रवार को ‘नो यूपीआई डे’ का असर कई बाजारों में देखने को मिला। प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR के विरोध में कई व्यापारियों ने अपने दुकानों पर लगे UPI QR कोड कपड़े से ढक दिए। ग्राहकों से डिजिटल भुगतान के बजाय नकद में खरीदारी का भुगतान करने की अपील की गई। व्यापारिक संगठनों के मुताबिक, राजस्थान के दूसरे शहरों में भी व्यापारियों ने अपने स्तर पर इस विरोध में हिस्सा लिया। हालांकि, सभी दुकानों पर इसका एक जैसा असर नहीं रहा। कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर UPI के जरिए भुगतान स्वीकार किया जाता भी नजर आया।
QR कोड ढककर व्यापारियों ने जताया विरोध
जयपुर के कई बाजारों में शुक्रवार को दुकानों के बाहर लगे UPI QR कोड ढके हुए दिखाई दिए। व्यापारियों ने ग्राहकों को बताया कि वे प्रस्तावित MDR के विरोध में ‘नो यूपीआई डे’ मना रहे हैं। कुछ दुकानदारों ने ग्राहकों से खरीदारी के लिए नकद भुगतान करने का आग्रह किया। व्यापारियों का कहना है कि यह विरोध डिजिटल भुगतान व्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि UPI लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ है।
15 अक्टूबर से MDR लागू होने का प्रस्ताव
व्यापारी संगठनों के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपये से अधिक के कुछ बड़े मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने का प्रस्ताव है। इसी प्रस्ताव को लेकर व्यापारी संगठनों ने विरोध का फैसला किया है। उनका कहना है कि कारोबार में UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने से कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। खास तौर पर छोटे और मध्यम व्यापारियों पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
UPI पर कोई सरकारी बैन नहीं
‘नो यूपीआई डे’ को लेकर सोशल मीडिया और बाजारों में भ्रम की स्थिति भी देखने को मिली। हालांकि, यह स्पष्ट है कि UPI पर किसी तरह का सरकारी प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। UPI और उससे जुड़ी डिजिटल भुगतान सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। शुक्रवार का विरोध व्यापारिक संगठनों की ओर से प्रस्तावित MDR के खिलाफ आयोजित किया गया। यानी ग्राहक जहां UPI सुविधा उपलब्ध है, वहां सामान्य रूप से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।
व्यापारियों का तर्क- बढ़ेगा आर्थिक बोझ
व्यापारी संगठनों का कहना है कि डिजिटल भुगतान अब कारोबार का नियमित हिस्सा बन चुका है। छोटी दुकानों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक ग्राहक UPI का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भुगतान पर MDR लागू होने से व्यापारियों के खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। व्यापारियों का कहना है कि पहले से सीमित मार्जिन पर काम करने वाले छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त शुल्क परेशानी बढ़ा सकता है।
गांवों से शहरों तक UPI का बढ़ा इस्तेमाल
व्यापारियों के मुताबिक, UPI का इस्तेमाल केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। गांवों, कस्बों और छोटे बाजारों में भी डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। दुकानों पर QR कोड के जरिए भुगतान करना आम हो गया है। ऐसे में व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान से जुड़े किसी भी शुल्क का असर बड़ी संख्या में कारोबारियों पर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को देशभर में ‘नो यूपीआई डे’ के जरिए विरोध दर्ज कराने की अपील की गई।
बाबूलाल गुप्ता ने सरकार से की अपील
व्यापारिक संगठन के नेशनल प्रेसिडेंट बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि ‘नो यूपीआई डे’ के जरिए व्यापारियों की मांग सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से UPI पर MDR नहीं लगाने की अपील की। गुप्ता के मुताबिक, UPI देश के व्यापारिक लेनदेन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत नहीं डाली जानी चाहिए।
राजस्थान के अन्य शहरों में भी विरोध का दावा
व्यापारिक संगठनों ने दावा किया कि जयपुर के अलावा राजस्थान के अन्य शहरों और बाजारों में भी व्यापारियों ने अपने स्तर पर विरोध दर्ज कराया। कई जगह QR कोड को ढककर या ग्राहकों से नकद भुगतान का आग्रह करके अभियान में भाग लेने की बात कही गई। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में इसका प्रभाव अलग रहा और कई दुकानों पर डिजिटल भुगतान की सुविधा भी जारी रही।
आगे भी जारी रह सकता है विरोध
व्यापारियों का कहना है कि MDR को लेकर उनकी मांग स्पष्ट है। वे चाहते हैं कि UPI के जरिए होने वाले व्यापारिक भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाए। ‘नो यूपीआई डे’ को इसी मांग को सामने रखने के एक तरीके के तौर पर देखा जा रहा है। अब प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था और सरकार तथा संबंधित संस्थाओं के अगले कदम पर व्यापारिक संगठनों की नजर रहेगी।