पाली में चाची की हत्या का 6 साल बाद फैसला, भतीजे को उम्रकैद; चाकू और हथौड़े से किया था हमला
पाली जिले के बाली क्षेत्र में करीब छह साल पहले हुई लक्ष्मी देवी की हत्या के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। पाली सेशन कोर्ट ने मृतका के भतीजे नरेश परिहार को हत्या का दोषी माना है। कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कठोर कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माना लगाया। वहीं, धारा 449 के तहत 10 साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई।
23 दिसंबर 2018 को हुई थी वारदात
अभियोजन के अनुसार 23 दिसंबर 2018 की सुबह नरेश बूसी गांव में दूध लेने गया था। करीब साढ़े दस बजे वह वापस घर पहुंचा।इसी दौरान उसकी नजर चाची लक्ष्मी देवी पर पड़ी। आरोप है कि नरेश ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में लक्ष्मी देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनकी मौत हो गई।वारदात के दौरान जीवाराम भी मौके पर पहुंचा। उसे देखकर नरेश वहां से भागने लगा। बताया गया कि उसने मौके पर हथियार छोड़ दिए थे। पुलिस ने पीछा कर उसे पकड़ लिया।
घटनास्थल से जुटाए गए अहम साक्ष्य
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कई साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल चाकू और हथौड़े सहित अन्य सामग्री को जांच के लिए भेजा।पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लक्ष्मी देवी की मौत अत्यधिक रक्तस्राव और न्यूरोजेनिक शॉक के कारण होने की बात सामने आई।इसके बाद मामले की वैज्ञानिक जांच भी कराई गई। एफएसएल रिपोर्ट ने अभियोजन के मामले में अहम भूमिका निभाई।
कपड़ों और हथियारों पर मिले रक्त के निशान
एफएसएल जांच के दौरान मृतका के कपड़ों और आरोपी के कपड़ों की जांच की गई। इसके अलावा चाकू और हथौड़े की भी जांच हुई।रिपोर्ट के अनुसार इन वस्तुओं पर मानव रक्त पाया गया। जांच में मिले रक्त समूह के समान होने की बात भी सामने आई।अभियोजन ने इन वैज्ञानिक साक्ष्यों को मामले से जुड़े अन्य सबूतों के साथ अदालत के सामने रखा।
प्रत्यक्षदर्शी की गवाही भी अहम रही
अदालत में अभियोजन पक्ष ने जीवाराम सहित अन्य गवाहों के बयान पेश किए। इसके साथ ही चिकित्सकीय और वैज्ञानिक साक्ष्य भी रिकॉर्ड पर रखे गए।अदालत ने मौखिक गवाही, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट सहित उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। कोर्ट ने इन साक्ष्यों को एक-दूसरे की पुष्टि करने वाला माना।इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर नरेश परिहार को हत्या और हत्या के इरादे से घर में प्रवेश करने का दोषी ठहराया गया।
दोनों धाराओं में सुनाई सजा
कोर्ट ने धारा 302 के तहत नरेश को आजीवन कठोर कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी। वहीं धारा 449 के तहत 10 साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया।इस फैसले के साथ वर्ष 2018 में हुई लक्ष्मी देवी की हत्या के मामले में करीब छह साल बाद न्यायिक प्रक्रिया में अहम पड़ाव आया है।