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बूंदी में चार साल से साप्ताहिक अवकाश का इंतजार, स्टाफ की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा

बूंदी में पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की व्यवस्था चार साल बाद भी नियमित नहीं हो सकी है। पुलिस जवानों को तनाव से राहत और परिवार के लिए समय देने के उद्देश्य से 2022 में अजमेर के गेगल थाने से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। सफलता के बाद इसे दूसरे जिलों में भी लागू किया गया। बूंदी में जनवरी 2023 में सदर थाने से इसकी शुरुआत हुई, लेकिन विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के बाद व्यवस्था बंद हो गई। इसके बाद पुलिसकर्मियों को नियमित साप्ताहिक अवकाश देने की योजना दोबारा प्रभावी नहीं हो सकी।

2022 में गेगल थाने से शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट

पुलिसकर्मियों के तनाव को कम करने और उन्हें परिवार के लिए समय देने के उद्देश्य से तत्कालीन डीजीपी ने वर्ष 2022 में अजमेर के गेगल थाने से साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था शुरू की थी।पायलट प्रोजेक्ट के दौरान पुलिसकर्मियों को रोस्टर के आधार पर सप्ताह में एक दिन छुट्टी देने की व्यवस्था की गई। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद इसे दूसरे जिलों में भी लागू किया गया।हालांकि, समय के साथ यह व्यवस्था कई जगह नियमित नहीं रह सकी और धीरे-धीरे फाइलों तक सीमित होती गई।

बूंदी में जनवरी 2023 में शुरू हुई थी व्यवस्था

बूंदी जिले में जनवरी 2023 में सदर थाने से साप्ताहिक अवकाश व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। शुरुआती दौर में रोस्टर बनाकर जवानों को निर्धारित दिन छुट्टी दी जाती थी।विभागीय सूत्रों के अनुसार सितंबर 2023 तक कई थानों में यह व्यवस्था चलती रही। इसके बाद चुनावी ड्यूटी और अन्य जिम्मेदारियों के कारण व्यवस्था प्रभावित हुई।विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के बाद साप्ताहिक अवकाश का रोस्टर नियमित रूप से लागू नहीं हो सका।

कम नफरी बनी सबसे बड़ी बाधा

पुलिस विभाग में स्वीकृत पदों के मुकाबले कम नफरी को साप्ताहिक अवकाश व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा माना जा रहा है।कई थानों में सीमित स्टाफ पर बड़ी संख्या में गांवों और क्षेत्रों की जिम्मेदारी है। ऐसे में एक जवान को छुट्टी देने पर बाकी कर्मचारियों पर अतिरिक्त ड्यूटी का दबाव बढ़ जाता है।इसी वजह से कई थानों में नियमित साप्ताहिक अवकाश का रोस्टर बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

गश्त से लेकर कोर्ट ड्यूटी तक कई जिम्मेदारियां

पुलिसकर्मियों की ड्यूटी सिर्फ थाने तक सीमित नहीं रहती। रात की गश्त, अपराध अनुसंधान, धरने-प्रदर्शन, वीआईपी मूवमेंट और सड़क हादसों जैसी परिस्थितियों में अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत पड़ती है।इसके अलावा कोर्ट संबंधी कार्य और विशेष सरकारी ड्यूटी भी पुलिसकर्मियों की उपलब्धता को प्रभावित करती हैं।ऐसे में सीमित स्टाफ के बीच हर जवान को नियमित साप्ताहिक अवकाश देना पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

ऐसे मिलता था साप्ताहिक अवकाश

पायलट प्रोजेक्ट के तहत रोस्टर बनाकर प्रत्येक पुलिसकर्मी को सप्ताह में एक दिन अवकाश देने का प्रावधान था।व्यवस्था के अनुसार सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक अवकाश दिया जाता था। प्रतिदिन करीब पांच पुलिसकर्मियों को छुट्टी देने की व्यवस्था थी।थानाधिकारी आवश्यकता के अनुसार जवान और उसके अवकाश का दिन तय कर सकता था। हालांकि कानून-व्यवस्था, आपात स्थिति या विशेष सरकारी ड्यूटी होने पर अवकाश निरस्त करने का प्रावधान भी रखा गया था।

लगातार ड्यूटी से बढ़ता है काम का दबाव

पुलिसकर्मियों को लगातार ड्यूटी करनी पड़ने से काम का दबाव बढ़ सकता है। रात की गश्त के बाद दिन में अपराध संबंधी कार्रवाई और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है।पर्याप्त आराम नहीं मिलने से लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले जवानों पर अतिरिक्त दबाव रहता है। ऐसे में साप्ताहिक अवकाश की नियमित व्यवस्था पुलिसकर्मियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

अब भी कायम हैं कई सवाल

साप्ताहिक अवकाश व्यवस्था के बीच अब कई सवाल सामने हैं। पुलिसकर्मियों के लिए निर्धारित छुट्टियों में से वास्तव में कितनी छुट्टियां मिल रही हैं?कितनी बार और किन परिस्थितियों में अवकाश निरस्त किए गए? एएसआई, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल स्तर के कर्मचारियों को निर्धारित अवकाश में से कितनी छुट्टियां मिलीं?इसके अलावा पुलिस विभाग में कांस्टेबल से इंस्पेक्टर तक पदोन्नति के लिए डीपीसी की प्रक्रिया को लेकर भी कर्मचारियों के बीच सवाल बने हुए हैं।

ASP बोले- जरूरत के अनुसार दिया जा रहा अवकाश

बूंदी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय सिंह चम्पावत के अनुसार पुलिसकर्मियों को समय-समय पर अवकाश दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि वीआईपी मूवमेंट, त्योहार और अन्य विशेष परिस्थितियों में ही अवकाश निरस्त किए जाते हैं। आवश्यकता होने पर जवान स्वयं भी अवकाश लेते हैं।इससे विभाग का पक्ष है कि परिस्थितियों के अनुसार पुलिसकर्मियों को छुट्टी उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि नियमित साप्ताहिक अवकाश के रोस्टर को लेकर स्थिति अभी भी चर्चा में है।

चार साल बाद भी नियमित व्यवस्था का इंतजार

2022 में शुरू हुई साप्ताहिक अवकाश की पहल का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन देना था। बूंदी में जनवरी 2023 से इसका प्रयोग भी शुरू हुआ, लेकिन बाद में व्यवस्था नियमित नहीं रह सकी।अब सवाल यही है कि पर्याप्त पुलिस बल और स्पष्ट रोस्टर के साथ साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था दोबारा नियमित रूप से लागू कब होगी। पुलिसकर्मियों के साथ-साथ उनके परिवारों की नजर भी इस व्यवस्था की बहाली पर है।

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Stv News Rajasthan

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