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उदयपुर 2 करोड़ रिश्वतकांड में बड़ा खुलासा, ASP दफ्तर से मिलीं 41 फाइलें; पट्टों और भूखंड नंबरों पर सवाल

उदयपुर के बहुचर्चित 272 भूखंड घोटाले से जुड़े 2 करोड़ रुपए के रिश्वतकांड की जांच में एसीबी को कई अहम दस्तावेज मिले हैं। रिश्वत मामले में गिरफ्तार एएसपी मुकेश कुमार सोनी के कार्यालय से नगर निगम के 41 अलग-अलग भूखंडों की फाइलें मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच में यूडीए से निगम तक फाइलों की आवाजाही, भूखंड नंबरों में बदलाव और सील-साइन वाले दस्तावेजों के आधार पर पट्टे जारी करने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। अब एसीबी यह जांच कर रही है कि इन फाइलों की प्रक्रिया में किन अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका रही।

एएसपी कार्यालय से मिलीं 41 भूखंडों की फाइलें

एसीबी की जांच के दौरान एएसपी मुकेश कुमार सोनी के कार्यालय से नगर निगम से जुड़ी 41 अलग-अलग फाइलें मिलने की बात सामने आई है। ये फाइलें अलग-अलग भूखंडों से संबंधित बताई जा रही हैं।जांच एजेंसी अब इन फाइलों में दर्ज दस्तावेजों और उनके तैयार होने की प्रक्रिया की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि ये फाइलें एएसपी कार्यालय तक किस माध्यम से पहुंचीं।

यूडीए की सील और हस्ताक्षर वाले दस्तावेज मिले

जांच में कुछ फाइलों में यूडीए की सील और अधिकारियों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज मिलने की जानकारी है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे नगर निगम में आवंटन पत्र और पट्टे जारी किए जाने की बात सामने आई है।अब एसीबी इन दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच कर रही है। सवाल यह है कि दस्तावेज वास्तव में यूडीए में तैयार हुए थे या किसी स्तर पर उनकी नकल अथवा फर्जी इस्तेमाल किया गया।

असली दस्तावेज थे तो सत्यापन कैसे हुआ?

यदि फाइलों में मौजूद सील और हस्ताक्षर वास्तविक पाए जाते हैं तो जांच का अगला सवाल यह होगा कि इन दस्तावेजों को किस अधिकारी या कर्मचारी ने तैयार किया।इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि निगम में दस्तावेज पहुंचने के बाद उनकी सत्यता का सत्यापन किस स्तर पर किया गया। यदि दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी थी तो उसे रिकॉर्ड की जांच के दौरान क्यों नहीं पकड़ा गया।

गायब फाइलों के बाद बदले भूखंड नंबर

जांच में भूखंडों की मूल फाइलों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार यूडीए से निगम को हस्तांतरित कुछ कॉलोनियों के भूखंडों की मूल फाइलें निगम के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थीं।बाद में कुछ फाइलें सामने आईं तो उनमें भूखंडों के नंबर बदले हुए पाए गए। कुछ मामलों में मूल भूखंड नंबर से जुड़े नए नंबर जैसे 1-ए और 2-ए वाली फाइलें भी सामने आने की बात कही जा रही है।

नंबर बदलने से किसे हुआ फायदा?

भूखंड नंबरों में बदलाव की प्रक्रिया अब एसीबी की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मूल फाइल कहां थी और नए दस्तावेज कब तैयार किए गए।इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि भूखंडों के नंबर बदलने से किसी व्यक्ति या समूह को आर्थिक अथवा संपत्ति संबंधी लाभ मिला या नहीं। संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।

2 करोड़ की रिश्वत मांग की जांच जारी

इसी मामले में एसीबी ने दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला और एएसपी मुकेश कुमार सोनी को गिरफ्तार किया है। दोनों से रिश्वत प्रकरण को लेकर पूछताछ जारी है।एसीबी के अनुसार आरोप है कि परिवादी निरंजन मोगरा और उनकी पत्नी हेमलता कांकरिया को दर्ज मामलों में राहत देने, अन्य मामलों में आरोपी नहीं बनाने और तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज लौटाने के बदले 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई थी।

तीन दिन में सत्यापित हुई रिश्वत की मांग

एसीबी के अनुसार शिकायत मिलने के बाद रिश्वत की मांग का डिजिटल रिकॉर्डिंग के जरिए सत्यापन कराया गया। एजेंसी का दावा है कि तीन दिन की प्रक्रिया में 23 सितंबर को 2 करोड़ रुपए की मांग की पुष्टि हुई।इस दौरान सज्जन सिंह जैन की ओर से परिवादी की एएसपी मुकेश सोनी से वॉट्सऐप कॉल पर बातचीत भी कराई गई। एसीबी ने इन बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जांच में शामिल किया है।

रानी रोड पर बातचीत की भी जांच

जांच के अनुसार रानी रोड पर एएसपी मुकेश सोनी और परिवादी के बीच भी बातचीत हुई थी। एसीबी का दावा है कि इस दौरान एएसपी ने अपने मोबाइल पर एक संदेश लिखकर परिवादी को दिखाया था।इस बातचीत और मोबाइल रिकॉर्ड को भी रिश्वत प्रकरण की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। एसीबी डिजिटल रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।

272 भूखंड घोटाले से जुड़े तारों की जांच

उदयपुर का 272 भूखंड मामला पहले से ही जांच के घेरे में है। अब 41 फाइलों के एएसपी कार्यालय से मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि इन फाइलों का रिश्वत प्रकरण से क्या संबंध है। साथ ही यूडीए, नगर निगम और निजी पक्षों के बीच दस्तावेजों की आवाजाही की भी जांच की जा रही है।

अब अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर नजर

फिलहाल एसीबी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या निजी लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।सबसे अहम सवाल यही है कि 41 फाइलें एएसपी कार्यालय तक कैसे पहुंचीं, भूखंडों के नंबरों में बदलाव किस स्तर पर हुआ और सील-साइन वाले दस्तावेजों के आधार पर पट्टे जारी करने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।

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