Rajasthan Crop Insurance: फसल बीमा में राजस्थान देश में चौथे स्थान पर, किसानों को मिले 35,600 करोड़ के क्लेम
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के प्रदर्शन मूल्यांकन में राजस्थान ने 43.5 अंक के साथ देश में चौथा स्थान हासिल किया है। राज्य में फसल नुकसान के आकलन से लेकर क्लेम भुगतान तक डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। करीब 90 प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग ऐप के जरिए ऑनलाइन किए जा चुके हैं। वहीं, खरीफ 2016 से खरीफ 2026 तक किसानों ने करीब 7,800 करोड़ रुपए प्रीमियम जमा किया। इसके मुकाबले 35,600 करोड़ रुपए के फसल बीमा क्लेम का भुगतान किया गया।
PM फसल बीमा योजना में राजस्थान चौथे स्थान पर
केंद्र सरकार के योजना-विशिष्ट प्रदर्शन मूल्यांकन में राजस्थान को 43.5 अंक मिले हैं। इसके साथ राजस्थान राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर रहा।राज्यों का मूल्यांकन कई मानकों पर किया गया। इनमें योजना की अधिसूचना, राज्यांश सब्सिडी, बीमा कवरेज और दावा भुगतान शामिल हैं।इसके अलावा फसल कटाई प्रयोग, KCC खातों का नामांकन, YES-TECH और शिकायतों के निस्तारण को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया।
असम पहले और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर
प्रदर्शन मूल्यांकन में असम ने 55.5 अंक के साथ पहला स्थान हासिल किया। उत्तर प्रदेश 47.5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।राजस्थान को 43.5 अंक मिले और वह चौथे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन से जुड़े अलग-अलग मानकों पर आधारित है।राज्य के कृषि विभाग के अनुसार डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल ने राजस्थान के प्रदर्शन को मजबूत किया है।
7,800 करोड़ प्रीमियम के बदले 35,600 करोड़ के क्लेम
राजस्थान में खरीफ 2016 से खरीफ 2026 तक PMFBY के तहत करीब 25.47 करोड़ फसल बीमा पॉलिसियां सृजित की गईं।इस अवधि में किसानों ने लगभग 7,800 करोड़ रुपए का प्रीमियम जमा किया। इसके मुकाबले किसानों को करीब 35,600 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का भुगतान हुआ।यानी भुगतान किए गए क्लेम की राशि किसानों के प्रीमियम से करीब 4.5 गुना रही। केंद्र और राज्य सरकार ने इस दौरान लगभग 19-19 हजार करोड़ रुपए का प्रीमियम अंशदान किया।
90 फीसदी फसल कटाई प्रयोग ऑनलाइन
राजस्थान में करीब 90 प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग ऐप के माध्यम से ऑनलाइन किए जा चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह देश में सबसे अधिक हिस्सेदारी है।डिजिटल प्रक्रिया से फसल उपज के आंकड़े ऑनलाइन दर्ज किए जा सकते हैं। इससे निगरानी और डेटा उपलब्धता में भी सुधार होता है।राज्य को फसल कटाई प्रयोग के ऐप आधारित इस्तेमाल और YES-TECH व्यवस्था में पूरे अंक मिलने की जानकारी दी गई है।
जमीन के रिकॉर्ड को भी पोर्टल से जोड़ा
फसल बीमा पोर्टल के साथ भू-अभिलेखों के एकीकरण में भी राजस्थान ने प्रगति की है।राज्य के 52,946 गांवों में से 47,028 गांवों, यानी करीब 89 प्रतिशत गांवों के भू-अभिलेख फसल बीमा पोर्टल से जोड़े जा चुके हैं।सरकारी जानकारी के अनुसार राजस्थान इस तरह के भूमि अभिलेख एकीकरण में देश का तीसरा राज्य बना है। इससे बीमा प्रक्रिया में डिजिटल सत्यापन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
फर्जीवाड़े पर सख्ती, 10 से ज्यादा FIR
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार फसल बीमा योजना में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने बताया कि फर्जीवाड़े से जुड़े 10 से अधिक मामलों में FIR दर्ज कराई जा चुकी हैं। अधिकारियों को फसल कटाई प्रयोग शत-प्रतिशत ऐप के जरिए ऑनलाइन कराने के निर्देश दिए गए हैं।कृषि विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की भ्रष्टाचार में संलिप्तता मिलने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
डिजिटल सिस्टम से क्लेम प्रक्रिया में बदलाव
PMFBY में पिछले वर्षों के दौरान डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। केंद्र सरकार ने YES-TECH, WINDS पोर्टल और अन्य डिजिटल माध्यमों को योजना में शामिल किया है।केंद्र के अनुसार इन तकनीकी व्यवस्थाओं का उद्देश्य दावा निस्तारण में तेजी और पारदर्शिता बढ़ाना है। 2025 में राजस्थान के झुंझुनूं से करीब 35 लाख किसानों को 3,900 करोड़ रुपए के फसल बीमा भुगतान का डिजिटल हस्तांतरण भी किया गया था।
अब बीमा कवरेज बढ़ाने पर जोर
राष्ट्रीय रैंकिंग में चौथा स्थान हासिल करने के बाद राज्य के सामने अगली चुनौती बीमा कवरेज बढ़ाने की है।इसके साथ ही दावों का समयबद्ध भुगतान और उपज आंकड़ों की शीघ्र स्वीकृति भी महत्वपूर्ण होगी। डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने के साथ किसानों तक इसका वास्तविक लाभ पहुंचाना अहम रहेगा।राजस्थान में फसल बीमा योजना के आंकड़े बताते हैं कि किसानों, राज्य और केंद्र सरकार के प्रीमियम योगदान के साथ बड़ी मात्रा में क्लेम भुगतान हुआ है। अब निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत करना योजना की अगली प्राथमिकता होगी।