यूपी चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में सीटों पर संग्राम, इमरान मसूद की मांग पर इकरा हसन का पलटवार
यूपी चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में बढ़ी तकरार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन की तस्वीर साफ होने से पहले ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद जहां सपा से अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं, वहीं कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने पलटवार करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देने की स्थिति में फिलहाल सिर्फ सपा और अखिलेश यादव ही हैं।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पिछले कुछ समय से सपा और उसके नेतृत्व को लेकर मुखर नजर आ रहे हैं। उन्होंने मुस्लिम मुद्दों पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीति पर भी सवाल उठाए हैं। मंगलवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित उत्तर प्रदेश विजय संकल्प सम्मेलन में इमरान मसूद समेत प्रदेश के कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता जुटे। हालांकि कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस आयोजन से दूरी बनाए रखी। सम्मेलन में 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत का संकल्प लिया गया।
इसी बीच कैराना सांसद इकरा हसन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देने की क्षमता समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव में ही है। उन्होंने कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन होता है तो यह अच्छी बात होगी, लेकिन किसी कारण से गठबंधन नहीं बनता है तो इसका नुकसान कांग्रेस को ही उठाना पड़ेगा।
इकरा हसन के इस बयान पर कांग्रेस नेता सैयद आसिम वकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इकरा हसन राजनीति में नई हैं और उनका यह पहला सांसद कार्यकाल है। आसिम वकार ने कहा कि इकरा हसन कांग्रेस के सहयोग से ही लोकसभा पहुंची हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस सपा के साथ नहीं होती तो इकरा हसन का सांसद बनना संभव नहीं था। उन्होंने इकरा हसन को अगली बार बयान देने से पहले राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखने की नसीहत दी।
वहीं, इमरान मसूद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पक्ष में माहौल का हवाला देते हुए सपा से राहुल गांधी का मजबूती से साथ देने की अपील की। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्षी दलों के बीच गठबंधन नहीं होने का नुकसान हो सकता है। सीट बंटवारे को लेकर मसूद ने स्पष्ट संकेत दिया कि 2017 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार कांग्रेस को अधिक सीटें मिलनी चाहिए।
सपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती बयानबाजी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता की राह में मौजूद चुनौतियों को सामने ला दिया है। फिलहाल दोनों दल गठबंधन की जरूरत और सीटों के बंटवारे के बीच संतुलन साधने की कोशिश में हैं। ऐसे में चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ सीट शेयरिंग और नेतृत्व को लेकर सियासी रस्साकशी और तेज होने के आसार हैं।