बूंदी में 32 डिग्री तापमान में पेड़ के नीचे पढ़ रहे बच्चे, जर्जर स्कूल भवन के बाद नहीं मिली वैकल्पिक व्यवस्था
बूंदी जिले के कापरेन क्षेत्र के खेड़ली बंधा गांव में बच्चों की पढ़ाई बदहाल हालात में चल रही है। करीब एक साल पहले शिक्षा विभाग की सर्वे टीम ने स्कूल भवन को जर्जर और असुरक्षित घोषित कर दिया था। इसके बाद भी अब तक वैकल्पिक भवन की व्यवस्था नहीं हो पाई है। मजबूरी में राजकीय विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र खुले परिसर में पेड़ के नीचे संचालित हो रहे हैं। स्कूल में 33 बच्चों का नामांकन है, जबकि आंगनबाड़ी केंद्र में 14 छोटे बच्चे आते हैं। गर्मी में बच्चे धूप और छांव के बीच जगह बदलकर पढ़ने को मजबूर हैं। बारिश और तेज मौसम खराब होने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है।
एक साल पहले जर्जर घोषित हुआ था स्कूल भवन
खेड़ली बंधा गांव का राजकीय विद्यालय करीब 30 साल पुराना बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक साल पहले शिक्षा विभाग की सर्वे टीम ने भवन का निरीक्षण किया था।
सर्वे के बाद भवन को जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया। भवन के बाहर क्रॉस लगाकर यहां बच्चों को बैठाने पर रोक लगा दी गई। इसके बावजूद स्थायी वैकल्पिक भवन की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
33 बच्चे और 14 आंगनबाड़ी के बच्चे खुले में
विद्यालय में वर्तमान में 33 बच्चों का नामांकन है। वहीं स्कूल परिसर में ही संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में 14 नन्हे बच्चे आते हैं।
भवन असुरक्षित होने के बाद दोनों केंद्रों का संचालन खुले परिसर में करना पड़ रहा है। सामान्य मौसम में बच्चे पेड़ की छांव के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं।
32 डिग्री तापमान में छांव के साथ खिसकते हैं बच्चे
ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ बच्चों को पेड़ की छांव के लिए अपनी जगह बदलनी पड़ती है। सुबह करीब 7 से 9 बजे तक बच्चे खुले परिसर में बैठते हैं।
इसके बाद धूप तेज होने पर बच्चे पेड़ की छांव में चले जाते हैं। दिन बढ़ने के साथ छांव का स्थान बदलता रहता है। ऐसे में बच्चे भी पढ़ाई के दौरान आगे-पीछे खिसकते रहते हैं।
बारिश और अंधड़ में मंदिर बनता है सहारा
बारिश के मौसम में स्थिति और मुश्किल हो जाती है। बादल छाने, तेज अंधड़ या बारिश की स्थिति में आंगनबाड़ी केंद्र की छुट्टी करनी पड़ती है।
स्कूल के बच्चों को मौसम खराब होने पर गांव के मंदिर में ले जाकर बैठाने की व्यवस्था की जाती है। तेज बारिश होने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले दो महीनों में मौसम के कारण कई बार पढ़ाई प्रभावित हुई है।
वन विभाग की खाली चौकी में स्कूल चलाने की मांग
ग्रामीणों ने गांव में खाली पड़ी वन विभाग की चौकी को अस्थायी रूप से स्कूल संचालन के लिए उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में फिलहाल कोई उपयुक्त सार्वजनिक भवन या खाली मकान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वन सुरक्षा चौकी को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके लिए वन विभाग से आवश्यक अनुमति दिलाने की मांग प्रशासन से की गई है।
खुले में पकाना पड़ रहा है बच्चों का पोषाहार
स्कूल शिक्षक और आंगनबाड़ी केंद्र प्रभारी के अनुसार, भवन की खराब स्थिति के कारण पोषाहार भी खुले में पकाना पड़ रहा है।
बारिश के दौरान सामग्री को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ता है। बच्चों को भी खुले में ही पोषाहार कराया जाता है। इससे छोटे बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है।
ग्रामीणों ने जल्द स्थायी भवन की मांग की
उपसरपंच कृष्ण मुरारी गोचर के अनुसार, शिक्षा विभाग की टीम ने करीब एक साल पहले भवन को असुरक्षित घोषित किया था। इसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की खाली चौकी में अस्थायी व्यवस्था करने का सुझाव दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि इस मांग पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से जल्द वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराने और नए स्कूल भवन का निर्माण करवाने की मांग की है।
बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर सवाल
जर्जर भवन के कारण बच्चों को वहां बैठाने पर रोक लगा दी गई, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से पढ़ाई खुले में हो रही है। गर्मी, बारिश और तेज हवा के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
ग्रामीणों की मांग है कि स्थायी भवन बनने तक सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई मौसम पर निर्भर न रहे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके।