Garba Controversy: आनंद दुबे का सवाल- जब इस्लाम में मूर्ति पूजा नहीं तो गरबा में आकर क्या करेंगे?
गरबा विवाद और मंदिर में मछली खाने को लेकर चल रही बहस के बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गरबा को सनातन परंपरा का पवित्र त्योहार बताते हुए अबू आसिम आजमी की टिप्पणियों पर सवाल उठाया। आनंद दुबे ने कहा कि अलग-अलग धर्मों और समुदायों की अपनी मान्यताएं हैं। इसलिए किसी भी मुद्दे को अनावश्यक विवाद का रूप नहीं देना चाहिए। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के मंदिर में मछली खाने और धीरेंद्र शास्त्री की सात्विकता वाली टिप्पणी का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन और भारत-रूस संबंधों पर भी अपनी बात रखी।
गरबा को लेकर आनंद दुबे ने उठाया सवाल
आनंद दुबे ने कहा कि गरबा सनातन परंपरा का पवित्र त्योहार है। उनके अनुसार, गरबा में लोग मां की प्रतिमा के सामने पूजा और नृत्य करते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि जिस इस्लाम में मूर्ति पूजा की मान्यता नहीं है, वहां से आने वाले लोग गरबा में क्या करेंगे। उन्होंने अबू आसिम आजमी के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें गरबा में नहीं जाने की बात कही गई थी। हालांकि, इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सुवेंदु अधिकारी के मछली खाने पर भी बोले
आनंद दुबे ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कालीघाट मंदिर में मछली खाने से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री हिंदू और सनातन परंपरा के कथावाचक हैं। उनका मानना है कि मंदिर परिसर में सात्विक रहना उचित है। वहीं, सुवेंदु अधिकारी मंदिर परिसर में मछली खाने को लेकर अलग दृष्टिकोण रखते हैं। आनंद दुबे ने कहा कि दोनों अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। इसलिए इसे अनावश्यक विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए।
अपनी-अपनी मान्यताओं के सम्मान की बात
आनंद दुबे ने कहा कि हर व्यक्ति की धार्मिक मान्यताएं अलग हो सकती हैं। उनके अनुसार, किसी के लिए पत्थर में भगवान का स्वरूप हो सकता है, जबकि कोई अलग तरीके से आस्था को देख सकता है। उन्होंने सनातन धर्म की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग विचारों के लिए इसमें स्थान है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति सात्विक भोजन करता है, उसकी भावना का सम्मान होना चाहिए। वहीं, भोजन को व्यक्तिगत पसंद का विषय मानने वालों की पसंद का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
जीव-जंतुओं और पर्यावरण के सम्मान पर जोर
आनंद दुबे ने कहा कि जीव-जंतुओं और पर्यावरण का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय परंपरा में पेड़-पौधों और प्रकृति के प्रति सम्मान का उल्लेख किया। उनके अनुसार, पहले साधु-संत प्रकृति को विशेष महत्व देते थे। हालांकि, समय के साथ यह परंपरा कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में पशु-पक्षियों को लेकर अलग मान्यताएं हैं। इसलिए भोजन को लेकर भी एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।
अबू आजमी, वारिस पठान और नितेश राणे पर निशाना
आनंद दुबे ने अबू आसिम आजमी, एआईएमआईएम नेता वारिस पठान और मंत्री नितेश राणे का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं की भाषा में नफरत दिखाई देती है। हालांकि, यह आनंद दुबे का राजनीतिक आरोप है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर समाज में तनाव बढ़ाने के बजाय आपसी सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
ब्रिक्स सम्मेलन पर भी रखी राय
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर आनंद दुबे ने कहा कि यह भारत, चीन और रूस समेत कई देशों का महत्वपूर्ण समूह है। उन्होंने भारत और रूस के बीच अच्छे संबंधों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ब्रिक्स के मंच पर सकारात्मक चर्चा हो रही है। भारत को यह देखना चाहिए कि रूस के साथ सहयोग से देश को किस तरह आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही।