Rajasthan Nikay Chunav: वोटिंग के बाद बदला BJP का आकलन, इन 4 नगर निगमों को लेकर बढ़ी चिंता
खबर का सारांश
राजस्थान निकाय चुनाव के दोनों चरणों का मतदान पूरा होने के बाद भाजपा ने जमीनी फीडबैक जुटाना शुरू कर दिया है। चुनाव से पहले पार्टी ने कई निकायों में बोर्ड बनाने का अनुमान लगाया था। हालांकि, मतदान के बाद कुछ जगहों पर मुकाबला उम्मीद से ज्यादा कड़ा माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीकानेर, अजमेर और भरतपुर नगर निगम में भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। वहीं पाली को लेकर भी पार्टी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। जयपुर में भी शुरुआती अनुमान के मुकाबले सीटों की संख्या कम रहने की आशंका जताई जा रही है।
मतदान खत्म होते ही BJP ने शुरू किया मंथन
निकाय चुनाव का मतदान खत्म होने से पहले ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ जयपुर पहुंच गए। इसके बाद प्रदेश भाजपा कार्यालय में चुनावी फीडबैक का दौर शुरू हुआ। संगठन के नेताओं और अलग-अलग क्षेत्रों में लगाए गए पदाधिकारियों से जानकारी ली गई। मतदान प्रतिशत, स्थानीय समीकरण और प्रत्याशियों की स्थिति को लेकर चर्चा हुई। पार्टी ने चुनाव से पहले 309 नगरीय निकायों में करीब 209 बोर्ड बनाने का अनुमान लगाया था। हालांकि, मतदान के बाद जमीनी स्थिति के आधार पर इस आकलन की समीक्षा की जा रही है।
70 निकायों को पहले ही रखा था डांवाडोल
भाजपा ने चुनाव से पहले करीब 70 निकायों को डांवाडोल श्रेणी में रखा था। इनमें स्थानीय समीकरण और मुकाबले को लेकर पार्टी पूरी तरह आश्वस्त नहीं थी। अब मतदान के बाद कुछ बड़े नगर निगम भी पार्टी की समीक्षा के केंद्र में आ गए हैं। भरतपुर को लेकर भाजपा ने संगठन स्तर पर रणनीति तेज कर दी है। वरिष्ठ नेताओं और भरोसेमंद पदाधिकारियों से स्थानीय समीकरणों का फीडबैक लिया जा रहा है। बीकानेर और अजमेर में भी पार्टी की नजर संभावित परिणामों पर बनी हुई है।
इन चार नगर निगमों में मुकाबला कड़ा होने का अनुमान
पार्टी सूत्रों के अनुसार बीकानेर, अजमेर और भरतपुर में भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। पाली में भी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है। इन निकायों में मतदान के बाद प्रत्याशियों की स्थिति और स्थानीय समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। हालांकि, यह अभी पार्टी का आंतरिक चुनावी अनुमान है। अंतिम स्थिति मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में भाजपा इन नगर निगमों को लेकर अपनी रणनीति और संगठनात्मक तैयारी पर विशेष ध्यान दे रही है।
जयपुर में भी शुरुआती अनुमान में बदलाव
राजधानी जयपुर को लेकर भी भाजपा का शुरुआती आकलन कुछ बदला हुआ माना जा रहा है। पार्टी को यहां अनुमान के मुकाबले सीटों की संख्या कम रहने की आशंका है। हालांकि, भाजपा अभी भी बोर्ड बनाने को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। दूसरी ओर जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अलवर में पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है। इन शहरों को लेकर संगठन के फीडबैक में फिलहाल ज्यादा चिंता सामने नहीं आई है।
कांग्रेस ने भी निकायवार फीडबैक जुटाना शुरू किया
वहीं कांग्रेस ने भी मतदान पूरा होने के बाद निकायवार फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। पार्टी ने अभी यह दावा नहीं किया है कि कितने निकायों में उसके बोर्ड बनेंगे। हालांकि, शुरुआती फीडबैक में कांग्रेस अपनी स्थिति भाजपा के मुकाबले बेहतर बता रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि कई नगर निगमों में भी मुकाबला उसके पक्ष में रह सकता है। इसके अलावा कांग्रेस की नजर केवल बोर्ड गठन पर नहीं है। पार्टी प्रदेश में मिलने वाले वोट शेयर को भी महत्वपूर्ण मान रही है।
2028 की तैयारी के लिए वोट शेयर पर नजर
कांग्रेस के लिए निकाय चुनाव 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पार्टी मतदान प्रतिशत और अपने वोट शेयर का विश्लेषण करेगी। इससे शहरी क्षेत्रों में संगठन की स्थिति और जनाधार का आकलन करने में मदद मिल सकती है। वहीं भाजपा भी सीटों के साथ मतदान पैटर्न और स्थानीय प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। फिलहाल दोनों दलों की नजर 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर है। इसके बाद ही बोर्ड गठन को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।