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राजस्थान हाईकोर्ट नई बिल्डिंग घोटाला मामला, RSRDC के 3 बड़े अफसर गिरफ्तार

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की नई बिल्डिंग के निर्माण में कथित अनियमितताओं के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेश शर्मा, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अजीत कुमार सांघी और विद्युत प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवहरे माहौर शामिल हैं। आरोप है कि झालामंड स्थित हाईकोर्ट भवन के निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। पुलिस निर्माण सामग्री, तकनीकी रिपोर्ट और दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही कथित लापरवाही से सरकारी खजाने को हुए संभावित नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।

RSRDC के तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी

पुलिस उपायुक्त पश्चिम कमल शेखावत के अनुसार हाईकोर्ट भवन निर्माण में निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर मामला दर्ज किया गया था। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने RSRDC से जुड़े तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार अधिकारियों में प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेश शर्मा, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अजीत कुमार सांघी और विद्युत प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवहरे माहौर शामिल हैं। पुलिस अब इनसे निर्माण कार्य और कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों पर पूछताछ कर रही है।

अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक इस मामले में तीन नई गिरफ्तारियों के साथ अब तक कुल आठ आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। इनमें से पांच आरोपियों का पुलिस रिमांड पूरा हो गया है।

रिमांड अवधि पूरी होने के बाद पांचों को अदालत में पेश किया गया। न्यायालय ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। वहीं, तीन अन्य आरोपी फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ जारी है।

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के घेरे में

मामले की जांच केवल निर्माण सामग्री तक सीमित नहीं है। पुलिस दस्तावेजों, तकनीकी रिपोर्ट और निर्माण कार्य से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि निर्माण के दौरान तय गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ था या नहीं। इसके अलावा कथित अनियमितताओं से सरकारी धन को हुए संभावित नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।

करीब 220 करोड़ रुपए में बना हाईकोर्ट भवन

राजस्थान हाईकोर्ट का नया भवन जोधपुर के झालामंड क्षेत्र में बनाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन का निर्माण RSRDC की ओर से वर्ष 2008 में शुरू कराया गया था।

करीब 11 साल बाद दिसंबर 2019 में निर्माण कार्य पूरा हुआ। इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 220 करोड़ रुपए खर्च होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद निर्माण गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आने के बाद मामला गंभीर जांच के दायरे में आ गया।

करीब दो साल पहले दर्ज हुई थी शिकायत

हाईकोर्ट भवन के निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर करीब दो साल पहले शिकायत दर्ज कराई गई थी। कोर्ट ऑफिसर सेल के कर्मचारी शरद जोशी ने भवन की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर शिकायत की थी।

शिकायत में निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड तथा अन्य पहलुओं की पड़ताल की।

तकनीकी रिपोर्ट और दस्तावेजों की भी जांच

पुलिस जांच में निर्माण कार्य से जुड़े तकनीकी दस्तावेज महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के साथ-साथ तकनीकी रिपोर्ट और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि कथित तौर पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किन अधिकारियों या अन्य लोगों की भूमिका रही। पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

सरकारी खजाने को नुकसान का भी आकलन

मामले में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित निर्माण अनियमितताओं के कारण सरकारी राजकोष को कितना संभावित नुकसान हुआ। इसके लिए निर्माण की लागत, सामग्री की गुणवत्ता और संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। गिरफ्तार अधिकारियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद ही मामले में कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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Stv News Rajasthan

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