भरतपुर मेयर की कुर्सी के ‘किंगमेकर’ होंगे निर्दलीय, 9 सितंबर को वोटिंग; 33 का आंकड़ा अहम
भरतपुर नगर निकाय चुनाव में इस बार मुकाबला सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं रह गया है। टिकट वितरण के बाद दोनों दलों से बगावत कर मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। शहर के 65 वार्डों में कई जगह मुकाबला त्रिकोणीय और बहुकोणीय हो गया है। ऐसे में यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन से लेकर मेयर की कुर्सी तक पहुंचने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भरतपुर में 9 सितंबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा।
65 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के साथ निर्दलीयों की चुनौती
भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में पूरी ताकत झोंकी है। दोनों दल बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का दावा कर रहे हैं। हालांकि टिकट वितरण के बाद दोनों पार्टियों के कई दावेदारों ने बगावत करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। व्यक्तिगत जनसंपर्क और स्थानीय पकड़ वाले प्रत्याशियों के कारण कई वार्डों में मुकाबला सीधा न रहकर त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो गया है।
बोर्ड बनाने के लिए 33 पार्षद जरूरी
65 सदस्यीय नगर निगम बोर्ड में बहुमत के लिए 33 पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा। यही संख्या चुनाव परिणाम के बाद सबसे अहम साबित हो सकती है। यदि भाजपा या कांग्रेस 33 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाती है तो बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन लेना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में चुनाव परिणाम के बाद दोनों प्रमुख दलों की नजर निर्दलीय पार्षदों पर रहेगी। कौन-सा दल कितने निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ पाता है, यह बोर्ड गठन की तस्वीर तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
मेयर की कुर्सी पर भी निर्दलीयों का असर
निर्दलीयों की भूमिका सिर्फ बोर्ड गठन तक सीमित नहीं रहने वाली है। यदि किसी दल के पास मेयर चुनाव के लिए जरूरी राजनीतिक समर्थन नहीं होता है तो निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक बन सकता है।
यही वजह है कि चुनाव परिणाम के बाद निर्दलीय पार्षद संभावित ‘किंगमेकर’ की भूमिका में नजर आ सकते हैं। मेयर पद के दावेदारों को अपने पक्ष में पर्याप्त पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में निर्दलीयों का रुख नगर निगम की अगली सरकार और मेयर पद की राजनीति पर असर डाल सकता है।
भाजपा को बढ़त का दावा, कांग्रेस भी मुकाबले में
राजनीतिक आकलन में भाजपा को फिलहाल कांग्रेस के मुकाबले कुछ बढ़त की स्थिति में माना जा रहा है। हालांकि कांग्रेस भी कई वार्डों में मजबूत चुनौती पेश कर रही है। कांग्रेस के लिए बहुमत तक पहुंचने के लिए कई अतिरिक्त वार्डों में जीत दर्ज करना जरूरी होगा।
दूसरी ओर भाजपा भी बागी प्रत्याशियों के कारण प्रभावित होने वाले वार्डों में अपने वोट बैंक को बचाने की कोशिश में जुटी रही। चुनाव परिणाम आने के बाद ही यह साफ होगा कि दोनों प्रमुख दलों में से कौन बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचता है।
9 सितंबर को सुबह 7 से शाम 6 बजे तक मतदान
भरतपुर में नगर निकाय चुनाव के लिए 9 सितंबर को मतदान होगा। मतदान सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 6 बजे तक चलेगा। इससे पहले सोमवार शाम 6 बजे चुनाव प्रचार का दौर समाप्त हो गया। मतदान से 48 घंटे पहले लागू मौन अवधि के चलते अब मतदान समाप्त होने तक चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध रहेगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी कमर चौधरी के अनुसार मौन अवधि में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 समेत संबंधित प्रावधान लागू रहेंगे।
सभा, रोड शो और जुलूस पर रोक
मौन अवधि के दौरान राजनीतिक दल, प्रत्याशी और उनके समर्थक मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सार्वजनिक सभा, नुक्कड़ सभा, रोड शो, जनसभा, कोना बैठक, पदयात्रा या चुनावी जुलूस नहीं निकाल सकेंगे।
मनोरंजन, सांस्कृतिक या संगीत कार्यक्रमों तथा नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए भी चुनाव प्रचार पर रोक रहेगी। मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में प्रचार करना, भीड़ जुटाना या प्रचार सामग्री बांटना भी प्रतिबंधित रहेगा।
शराब की बिक्री और परिवहन पर भी प्रतिबंध
मतदान समाप्त होने तक संबंधित मतदान क्षेत्र में शराब के वितरण, परिवहन, भंडारण और सेवन पर भी रोक रहेगी। शराब की दुकानें, बार और अनुज्ञप्ति प्राप्त परिसर बंद रहेंगे। नियमों का उल्लंघन होने पर लाइसेंस निलंबन समेत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर भी रहेगी निगरानी
मौन अवधि के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चुनावी प्रचार को लेकर भी प्रतिबंध लागू रहेगा। फेसबुक, वाट्सऐप, इंस्टाग्राम और एक्स समेत इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर चुनावी विज्ञापन, भाषण, वीडियो या प्रचार सामग्री प्रकाशित अथवा प्रसारित नहीं की जा सकेगी।
इसके अलावा एग्जिट पोल, ओपिनियन पोल और सर्वे के परिणामों के प्रकाशन पर भी रोक रहेगी।
प्रत्याशियों के वाहन से मतदाताओं को लाने-ले जाने पर रोक
प्रत्याशी, राजनीतिक दल या उनके समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने या वापस ले जाने के लिए अपने वाहनों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। हालांकि दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए नियमानुसार उपलब्ध सरकारी परिवहन सुविधा का लाभ लिया जा सकेगा।
जिला निर्वाचन प्रशासन ने सभी प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों से आदर्श आचार संहिता और मौन अवधि के नियमों का पालन करने की अपील की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।