राजस्थान निकाय चुनाव के बीच BJP का बड़ा एक्शन, जयपुर के 26 समेत 41 बागी निष्कासित
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने, बागी उम्मीदवारों का समर्थन करने या परिजनों को चुनाव मैदान में उतारने वाले 41 नेताओं और कार्यकर्ताओं को बीजेपी ने प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इनमें अकेले जयपुर के 26 नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं। कार्रवाई के बाद पार्टी के भीतर चुनावी अनुशासन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने पर कार्रवाई
बीजेपी की ओर से की गई कार्रवाई का मुख्य आधार पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ काम करना बताया गया है। पार्टी के अनुसार कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने या बागी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने का रास्ता अपनाया। कुछ मामलों में परिजनों को चुनाव मैदान में उतारने की बात भी सामने आई।
पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठन के निर्णयों के खिलाफ गतिविधि मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। निष्कासन की अवधि छह साल तय की गई है।
जयपुर में 26 नेताओं पर गिरी गाज
बीजेपी की कार्रवाई का सबसे बड़ा असर जयपुर में दिखाई दिया है। यहां कुल 26 नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित किया गया है।
निष्कासित किए गए लोगों में मोहनलाल कुमावत, छीतरमल शर्मा, नेमीचंद सैन, हरिशंकर बोहरा, दिनेश कांवट, चंदा कुमावत, कमलेश तिवारी, बनवारी सैनी, महर्षि शर्मा, पंकज गोयल, राजेश सालोदिया, नारायण सोनी, समा राठौड़, राजू अग्रवाल, जय वशिष्ठ, शंकर शर्मा, शंकर शर्मा की पत्नी, रमेश चंद्र सैनी, स्वाति परनामी, मुकेश किराड़, बीना मेठी, नरेश शर्मा, विश्व सिंह तंवर, शिव सोनी, बरखा सैनी और अविनाश सैनी के नाम बताए गए हैं।
चुनावी बगावत पर बीजेपी का सख्त संदेश
निकाय चुनाव के दौरान टिकट को लेकर कई जगहों पर पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी और बगावत सामने आती है। ऐसे में बीजेपी की यह कार्रवाई पार्टी संगठन की ओर से बागियों को स्पष्ट संदेश के तौर पर देखी जा रही है।
पार्टी का रुख है कि अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ना या उसके विरोध में प्रचार करना संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन है। छह साल के निष्कासन से पार्टी ने चुनाव के दौरान संगठन के फैसले के साथ खड़े रहने पर जोर दिया है।
राजसमंद में AAP से जुड़े विवाद ने भी खींचा ध्यान
राजसमंद के वार्ड 22 में आम आदमी पार्टी से निष्कासित अमित वर्मा का मामला भी चुनावी चर्चा में है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में AAP द्वारा उन्हें छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद उनके अलग-अलग वीडियो सामने आने की बात कही गई है।
एक वीडियो में भाजपा को समर्थन देने की बात सामने आती है, जबकि दूसरे वीडियो में अमित वर्मा ने दबाव में बयान देने का आरोप लगाया है। उनकी पत्नी की ओर से भी AAP को लेकर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों और वीडियो के पूरे संदर्भ को लेकर संबंधित पक्षों का पक्ष महत्वपूर्ण है।
धोइंदा में निर्दलीय प्रत्याशी ने बीजेपी को दिया समर्थन
राजसमंद के धोइंदा वार्ड 9 में भी चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। यहां निर्दलीय उम्मीदवार भरत कुमार ने बीजेपी प्रत्याशी चंपालाल कुमावत को समर्थन देने का ऐलान किया है।
निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थन से वार्ड में मुकाबले के समीकरण प्रभावित होने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर इस समर्थन को बीजेपी प्रत्याशी के लिए अहम माना जा रहा है।
9 और 11 सितंबर को दो चरणों में मतदान
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर मतदान दो चरणों में प्रस्तावित है। प्रदेश के 309 निकायों में 9 और 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे।
चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए मतदान से पहले शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई है। पहले चरण के लिए 7 सितंबर शाम 6 बजे से 9 सितंबर शाम 6 बजे तक और दूसरे चरण के लिए 9 सितंबर शाम 6 बजे से 11 सितंबर शाम 6 बजे तक ‘सूखा दिवस’ प्रभावी रहेगा।
मतगणना के दिन भी रहेगा सूखा दिवस
चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन ने मतगणना के दिन भी शराब बिक्री पर प्रतिबंध रखने का फैसला किया है। 14 सितंबर को मतगणना के दिन पूरे प्रदेश में सूखा दिवस प्रभावी रहेगा।
निकाय चुनाव में मतदान और मतगणना के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। वहीं राजनीतिक दलों की नजर अब अंतिम चरण के प्रचार और मतदान पर है।