जयपुर अमायरा डेथ केस में CJP की एंट्री, आशुतोष रांका ने सरकार से मांगा न्याय
जयपुर के चर्चित अमायरा डेथ केस को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राजस्थान सरकार, जयपुर पुलिस और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। रांका ने दावा किया कि अमायरा के परिवार को न्याय दिलाने का वादा किया गया है और जब तक मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
9 साल की अमायरा की मौत का मामला फिर चर्चा में
जयपुर के मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में 9 वर्षीय अमायरा की मौत की घटना को कई महीने बीत चुके हैं। CJP नेता आशुतोष रांका ने अपनी पोस्ट में कहा कि बच्ची के परिवार को अब भी न्याय के लिए अदालतों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को टैग करते हुए कहा कि अमायरा का परिवार इस लड़ाई में अकेला नहीं है।
रांका ने मामले को सिस्टम की कार्यप्रणाली का उदाहरण बताते हुए सरकार से पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने की मांग की है।
1 नवंबर 2025 की घटना का किया जिक्र
आशुतोष रांका ने अपनी पोस्ट में अमायरा को पढ़ाई के साथ डांस और म्यूजिक में बेहतर प्रदर्शन करने वाली बच्ची बताया। उनके अनुसार बच्ची स्कूल में बेस्ट ऑलराउंडर रही थी। पोस्ट में दावा किया गया कि उसकी कक्षा के कुछ बच्चे उसे कथित तौर पर परेशान करते थे।
CJP के मुताबिक, 1 नवंबर 2025 को अमायरा ने क्लास में परेशान किए जाने की शिकायत अपनी क्लास टीचर से कई बार की थी। आरोप है कि उस समय शिक्षकों की ओर से बच्ची की शिकायत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद बच्ची स्कूल की चौथी मंजिल पर पहुंची और वहां से गिरने के बाद उसकी मौत हो गई।
स्कूल प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
CJP नेता ने स्कूल प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके आरोपों के मुताबिक, घटना के बाद स्कूल परिसर में उस स्थान की सफाई कराई गई और CCTV फुटेज को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
हालांकि ये आरोप CJP की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में नहीं है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
CBSE की कार्रवाई और हाईकोर्ट का स्टे
आशुतोष रांका ने दावा किया कि मामले के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से भी स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच की गई थी। उनके अनुसार सुरक्षा मानकों में कमियां पाए जाने के बाद स्कूल की कक्षा 9 से 12 तक की मान्यता रद्द करने का आदेश दिया गया था।
CJP के मुताबिक, बाद में स्कूल प्रबंधन ने हाईकोर्ट का रुख किया और CBSE के आदेश पर रोक हासिल कर ली। इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति न्यायालय के आदेशों के अनुसार तय होगी।
शिक्षा विभाग के आदेश को लेकर भी सवाल
रांका ने राजस्थान शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार 18 मार्च 2026 को हाईकोर्ट से CBSE के आदेश पर रोक मिलने के बाद शिक्षा विभाग की ओर से भी इसी तरह का आदेश जारी किया गया था।
CJP नेता का दावा है कि इसके कुछ समय बाद 2 अप्रैल 2026 को सरकारी पक्ष की ओर से अदालत में उस आदेश को वापस लेने या उस पर रोक से संबंधित कार्रवाई की गई। इन दावों की पूरी स्थिति संबंधित सरकारी और न्यायिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
पुलिस जांच और चार्जशीट पर CJP के सवाल
अमायरा केस में पुलिस जांच को लेकर भी आशुतोष रांका ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अदालत में दाखिल पुलिस चार्जशीट में मामले के अनुरूप कड़ी धाराएं नहीं लगाई गईं।
CJP का दावा है कि इसी वजह से आरोपियों को मजिस्ट्रेट कोर्ट से जमानत मिल गई। वहीं परिवार की ओर से मामले में उचित धाराओं और आगे की जांच के लिए सेशंस कोर्ट का रुख किए जाने की बात कही गई है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत की अंतिम प्रक्रिया के बाद ही होगी।
‘अमायरा के माता-पिता अकेले नहीं हैं’
आशुतोष रांका ने अपनी पोस्ट में कहा कि CJP के सह-कन्वीनर अभिजीत दीपके के साथ उन्होंने अमायरा के माता-पिता विजय और शिवानी से न्याय की लड़ाई में साथ देने का वादा किया है।
उन्होंने कहा कि परिवार को न्याय मिलने तक मामला उठाया जाता रहेगा। रांका ने सरकार से स्कूल की प्रिंसिपल और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोष साबित होने पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की मांग की।
सरकार से न्याय की मांग, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
CJP ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अमायरा के परिवार को न्याय दिलाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि इतने लंबे समय बाद भी परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।
फिलहाल इस मामले में CJP की सक्रियता के बाद अमायरा डेथ केस एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही और जांच से जुड़े घटनाक्रम इस मामले की दिशा तय करेंगे।