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राजस्थान के 168 निकायों में कल मतदान, युवा वोटरों पर BJP-कांग्रेस की नजर; 4 नगर निगम भी शामिल

इंट्रो:
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान बुधवार को होगा। प्रदेश के 39 जिलों के 168 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में मतदाता अपने पार्षद चुनने के लिए वोट डालेंगे। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। पहले चरण में पाली, भरतपुर, भीलवाड़ा और अलवर नगर निगम भी शामिल हैं। चुनावी प्रचार का शोर थमने के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस ने अपना फोकस बूथ मैनेजमेंट, समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने और निर्दलीय प्रत्याशियों के समीकरण पर कर दिया है। इस चरण में बड़ी संख्या में युवा मतदाता और युवा प्रत्याशी भी चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

39 जिलों के 168 निकायों में कल होगी वोटिंग

पहले चरण में प्रदेश के 39 जिलों के 168 नगरीय निकाय क्षेत्रों में मतदान कराया जाएगा। इन निकायों के कुल 5,393 वार्डों में मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित है। चुनाव प्रचार का दौर सोमवार शाम समाप्त हो चुका है। इसके बाद प्रत्याशी और राजनीतिक दल अब मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क और बूथ स्तर की रणनीति पर जोर दे रहे हैं।

चार बड़े नगर निगमों में भी होगा मतदान

पहले चरण के चुनाव में राजस्थान के चार नगर निगम शामिल हैं। इनमें पाली, भरतपुर, भीलवाड़ा और अलवर नगर निगम हैं। वहीं प्रदेश के बाकी नगर निगमों में मतदान दूसरे चरण में होगा। जयपुर नगर निगम समेत छह नगर निगम क्षेत्रों में 11 सितंबर को मतदान प्रस्तावित है। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी। ऐसे में पहले चरण के मतदान के बाद राजनीतिक दल दूसरे चरण के क्षेत्रों में अपनी रणनीति को और तेज कर सकते हैं।

57 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे मतदान

पहले चरण में कुल 57 लाख 52 हजार 278 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनके लिए 7,683 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस चरण में 20,623 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। मतदाताओं को मतदान के लिए निर्धारित पहचान दस्तावेज साथ ले जाना होगा। प्रशासन की ओर से मतदान केंद्रों पर जरूरी व्यवस्थाएं पूरी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

40 फीसदी से ज्यादा युवा मतदाता बनेंगे निर्णायक

निकाय चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 35 वर्ष तक की उम्र वाले मतदाता कुल मतदाताओं के 40 फीसदी से अधिक हैं। बड़ी युवा आबादी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। रोजगार, स्थानीय विकास, सड़क, सफाई, जल निकासी, शिक्षा और अन्य नागरिक सुविधाएं युवा मतदाताओं के लिए अहम मुद्दे हो सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की नजर इस बड़े वोट बैंक पर है।

49 फीसदी से ज्यादा युवा प्रत्याशी मैदान में

सिर्फ मतदाता ही नहीं, बल्कि प्रत्याशियों के स्तर पर भी युवाओं की मजबूत मौजूदगी दिखाई दे रही है। पहले चरण में 40 वर्ष तक की उम्र वाले प्रत्याशियों की हिस्सेदारी 49 फीसदी से अधिक बताई जा रही है। इससे निकाय चुनाव में नई पीढ़ी के नेताओं को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। युवा प्रत्याशियों के बीच मुकाबला कई वार्डों में स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत जनसंपर्क के आधार पर भी प्रभावित हो सकता है।

राजस्थान में कुल 1.44 करोड़ से ज्यादा निकाय मतदाता

प्रदेश के सभी नगरीय निकायों की बात करें तो कुल मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 44 लाख 3 हजार 853 बताई गई है। इनमें 73 लाख 98 हजार 415 पुरुष, 70 लाख 4 हजार 927 महिला और 511 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। वर्ष 2019 की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 27.24 फीसदी की बढ़ोतरी बताई गई है। कुल 309 निकायों के चुनाव में यह बड़ा मतदाता आधार राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट पर फोकस

प्रचार समाप्त होने के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति को बूथ स्तर पर केंद्रित कर दिया है। पार्टी की ओर से कमजोर बूथों की पहचान कर वहां कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। संगठन स्तर पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने और प्रत्याशियों के पक्ष में वोट सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। पार्टी की नजर निर्दलीय प्रत्याशियों और संभावित बागियों के प्रभाव वाले वार्डों पर भी बताई जा रही है।

कांग्रेस की नजर निर्दलीयों और बागियों पर

कांग्रेस ने भी प्रचार खत्म होने के बाद चुनावी प्रबंधन का अगला चरण शुरू किया है। पार्टी ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों पर नजर रख रही है, जो कम अंतर वाले मुकाबलों में वोटों का समीकरण बदल सकते हैं। कांग्रेस नेताओं की ओर से स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रत्याशियों से संपर्क साधने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। पार्टी का आकलन है कि कई वार्डों में 50 से 100 या उससे अधिक वोट भी नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं।

पोस्ट-पोल समीकरण भी रहेंगे अहम

निकाय चुनाव में सिर्फ मतदान से पहले की रणनीति ही नहीं, बल्कि नतीजों के बाद बनने वाले समीकरण भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बढ़ सकती है। यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले प्रत्याशियों और बागियों पर नजर रख रही हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ की स्थिति भी बन सकती है।

2019 के मुकाबले बढ़ा मतदाता आधार

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में 2019 की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 27.24 फीसदी बढ़ोतरी बताई गई है। बढ़ा हुआ मतदाता आधार इस चुनाव की तस्वीर बदल सकता है। खास तौर पर युवा मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी राजनीतिक दलों के लिए चुनौती और अवसर दोनों है। अब यह देखना अहम होगा कि बुधवार को मतदान के दौरान युवा और अन्य वर्गों के मतदाता कितनी संख्या में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं और इसका असर चुनाव परिणामों पर किस तरह दिखाई देता है।

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