लाडकी बहिण योजना के लिए फिर डायवर्ट हुआ फंड, 344 करोड़ ट्रांसफर
महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना को लेकर फंड डायवर्जन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। जुलाई 2026 की किस्त के भुगतान के लिए राज्य सरकार ने सामाजिक न्याय विभाग की निधि से 344.74 करोड़ रुपये महिला एवं बाल विकास विभाग को ट्रांसफर किए हैं। इसके लिए शासनादेश भी जारी किया गया है। यह पहली बार नहीं है जब योजना के भुगतान के लिए दूसरे विभाग की राशि का इस्तेमाल किया गया हो। इससे पहले भी सामाजिक न्याय और आदिवासी विकास विभागों की निधि से रकम ट्रांसफर की जा चुकी है। बार-बार फंड डायवर्जन को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठाता रहा है।
जुलाई की किस्त के लिए 344.74 करोड़ रुपये ट्रांसफर
महाराष्ट्र सरकार ने लाडकी बहिण योजना की पात्र महिलाओं को जुलाई 2026 की किस्त उपलब्ध कराने के लिए सामाजिक न्याय विभाग की निधि से 344.74 करोड़ रुपये महिला एवं बाल विकास विभाग को देने का फैसला किया है। इस संबंध में जारी शासनादेश के बाद फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता दी जाती है। किस्त के भुगतान के लिए दूसरे विभाग की निधि से राशि लेने का फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब सरकारी योजनाओं के बजट और खर्च को लेकर लगातार राजनीतिक बहस जारी है।
पहले भी कई बार दूसरे विभागों से लिया गया फंड
लाडकी बहिण योजना के लिए सामाजिक न्याय विभाग की निधि का इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार फरवरी 2026 में जनवरी की किस्त के लिए करीब 98.45 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इससे पहले जून 2025 में अप्रैल और मई की किस्तों के लिए करीब 410 करोड़ रुपये और अगस्त से अक्टूबर 2025 के दौरान जुलाई और सितंबर की किस्तों के भुगतान के लिए करीब 410.30 करोड़ रुपये की राशि डायवर्ट किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
फंड डायवर्जन का यह चौथा मामला
नए 344.74 करोड़ रुपये के ट्रांसफर के बाद सामाजिक न्याय विभाग की निधि को लाडकी बहिण योजना के लिए इस्तेमाल करने का यह चौथा मामला बताया जा रहा है। लगातार दूसरे विभागों की निधि को योजना के भुगतान में लगाने से बजट प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामाजिक न्याय विभाग के बजट से वंचित और जरूरतमंद वर्गों के लिए कई योजनाएं संचालित की जाती हैं। ऐसे में उस विभाग की राशि दूसरी योजना में इस्तेमाल किए जाने पर उसके मूल आवंटन पर असर की आशंका जताई जा रही है।
आदिवासी विकास विभाग का फंड भी होता रहा इस्तेमाल
लाडकी बहिण योजना के लिए केवल सामाजिक न्याय विभाग की निधि ही चर्चा में नहीं रही है। इससे पहले आदिवासी विकास विभाग की राशि को भी योजना के भुगतान के लिए डायवर्ट किए जाने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सरकार की ओर से योजना के लाभार्थियों को समय पर किस्त उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, लेकिन इसके लिए दूसरे विभागों की निधि के इस्तेमाल को लेकर वित्तीय प्राथमिकताओं पर बहस होती रही है। विपक्ष इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार की बजट व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाता रहा है।
विपक्ष के निशाने पर सरकार, बढ़ सकती है सियासी बहस
फंड ट्रांसफर का नया शासनादेश सामने आने के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। विपक्ष पहले भी आरोप लगाता रहा है कि दूसरे विभागों की योजनाओं के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल लाडकी बहिण योजना की किस्त चुकाने में किया जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि किसी विभाग के लिए निर्धारित बजट को दूसरी योजना में लगाने से संबंधित विभाग की योजनाओं पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार की प्राथमिकता लाभार्थी महिलाओं को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। अब नए फंड ट्रांसफर को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस बढ़ सकती है।