इन 5 शहरों में 35 रुपये किलो मिलेगा प्याज, सरकार ने शुरू की ‘कांदा एक्सप्रेस’
त्योहारों से पहले प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ते दामों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति तेज कर दी है। इसके लिए महाराष्ट्र के नासिक से विशेष रेलवे रैक ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू की गई है। शुरुआती चरण में पांच बड़े शहरों में प्याज 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य अधिक कीमत वाले बाजारों में आपूर्ति बढ़ाकर खुदरा दामों पर दबाव कम करना है। जरूरत के अनुसार आगे अन्य शहरों को भी इस अभियान में शामिल किया जा सकता है।
नासिक से चलेगी ‘कांदा एक्सप्रेस’
सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र के नासिक से विशेष रेलवे रैक के जरिए बफर स्टॉक का प्याज भेजना शुरू किया है। इस अभियान को ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम दिया गया है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक शुरुआती खेप उन शहरों के लिए भेजी जा रही है, जहां प्याज की कीमत राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। सरकार की कोशिश है कि थोक आपूर्ति बढ़ने से स्थानीय बाजारों में प्याज की उपलब्धता बेहतर हो और ग्राहकों को महंगे दामों से राहत मिल सके।
35 रुपये किलो किस रेट पर मिलेगा प्याज?
सरकार के अनुसार बफर स्टॉक से भेजे जा रहे प्याज को रियायती दर पर 35 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा जाएगा। इसकी खुदरा बिक्री मुख्य रूप से सरकारी सहकारी संस्थाओं NCCF और NAFED के मोबाइल वैन तथा निर्धारित आउटलेट्स के जरिए की जाएगी। इसका उद्देश्य सीधे उपभोक्ताओं तक सस्ता प्याज पहुंचाना है, ताकि बाजार में ऊंची कीमतों के बीच लोगों को कुछ राहत मिल सके। सरकार की योजना मांग और स्थानीय बाजार की स्थिति के आधार पर इस आपूर्ति को आगे भी बढ़ाने की है।
26 अगस्त तक बाजारों में पहुंचने की उम्मीद
‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए भेजी जा रही प्याज की मौजूदा खेप के 26 अगस्त तक संबंधित बाजारों में पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद वहां NCCF और NAFED के माध्यम से खुदरा बिक्री शुरू की जाएगी। सरकार ने संकेत दिया है कि शुरुआती चरण के अनुभव और बाजार की जरूरत को देखते हुए इस अभियान का दायरा बढ़ाया जा सकता है। जिन शहरों में प्याज के दाम राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर बने रहते हैं, वहां आगे अतिरिक्त आपूर्ति भेजने का फैसला लिया जा सकता है।
प्याज की औसत कीमत एक साल में 59 फीसदी बढ़ी
प्याज की कीमतों में तेजी की वजह से सरकार को बफर स्टॉक बाजार में उतारने का फैसला करना पड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 24 अगस्त को प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 27.37 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक साल में औसत खुदरा कीमत में 59 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई। वहीं औसत थोक कीमत भी करीब 68 फीसदी बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।
दिल्ली-चेन्नई में 65 रुपये तक पहुंचा भाव
देश के कई बड़े शहरों में प्याज की कीमत राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक बताई जा रही है। दिल्ली और चेन्नई के कुछ बाजारों में प्याज का खुदरा भाव 55 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं कोलकाता में भी कीमत करीब 53 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। बढ़ती कीमतों का असर खासतौर पर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके रोजमर्रा के भोजन में प्याज की नियमित खपत होती है। सरकार अब ज्यादा कीमत वाले बाजारों में आपूर्ति बढ़ाकर अंतर कम करने की कोशिश कर रही है।
सरकार के पास 1.21 लाख टन बफर स्टॉक
केंद्र सरकार के पास कीमतों को नियंत्रित करने के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक उपलब्ध है। इसे बाजार की जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है। अगस्त और सितंबर में त्योहारों के कारण प्याज की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अलावा मौसम संबंधी परिस्थितियां भी आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सरकार बफर स्टॉक के जरिए बाजार में अतिरिक्त प्याज उपलब्ध कराने की रणनीति पर काम कर रही है।
आगे इन शहरों तक बढ़ सकता है अभियान
सरकार ने फिलहाल पांच अधिक खपत वाले शहरों में रियायती प्याज पहुंचाने की योजना बनाई है। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक बाजार की स्थिति और मांग को देखते हुए कोलकाता और लखनऊ जैसे अन्य शहरों को भी आगे इस अभियान में शामिल किया जा सकता है। इसका मकसद किसी एक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि उन बाजारों में कीमतों को नियंत्रित करना है जहां प्याज के दाम राष्ट्रीय औसत से ज्यादा बने हुए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए बढ़ी आपूर्ति का खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ता है।