आरक्षण लॉटरी पर उठे सवाल, नौगांवा से बड़ौदामेव और राजगढ़ तक सामने आई गड़बड़ियां
नौगांवा। नगरपालिका चुनावों के लिए वार्डों के आरक्षण की निकाली गई लॉटरी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। नौगांवा नगरपालिका के 20 वार्डों में आरक्षित सीटों के निर्धारण में वार्ड संख्या 17 और 19 को लेकर मतदाताओं ने आपत्ति जताई है। दोनों वार्डों को अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि मतदाताओं का दावा है कि इन वार्डों में एससी वर्ग का एक भी मतदाता नहीं है।
वार्ड 17 के मतदाता मनोज कुमार जैन और वार्ड 19 के मुकुट गोयल ने बताया कि वार्ड 17 में कुल 258 और वार्ड 19 में 345 मतदाता हैं। इसके बावजूद दोनों वार्डों को एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। उनका कहना है कि आरक्षण प्रक्रिया में यदि वास्तविक मतदाता संख्या के आधार पर निर्धारण किया गया है तो इसकी दोबारा जांच होनी चाहिए। मतदाताओं ने दोनों वार्डों की पुनः लॉटरी निकालने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई है।
बड़ौदामेव में गलती सामने आने के बाद दोबारा हुई लॉटरी
आरक्षण को लेकर इसी तरह की आपत्ति बड़ौदामेव में भी सामने आ चुकी है। वार्ड 25 में कुल 515 मतदाता हैं, जिनमें 258 पुरुष और 257 महिला मतदाता हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इनमें 513 मतदाता एससी समाज से आते हैं। इसके बावजूद वार्ड 25 को ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया।
मामला सामने आने के बाद गणना में गलती को लेकर संबंधित क्लर्क प्रदीप को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति मिलने पर वार्ड 25 की दोबारा लॉटरी निकाली गई।
राजगढ़ में भी आरक्षण पर उठे सवाल
राजगढ़ के वार्ड 38 में भी आरक्षण को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। लोगों का कहना है कि वार्ड में एससी वर्ग का एक भी मतदाता नहीं है, फिर भी इसे एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।
मामले में एसडीएम एवं रिटर्निंग अधिकारी ने बताया कि वार्डों का आरक्षण वर्ष 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। उस समय वार्ड में एससी वर्ग की आबादी अधिक थी, जिसके आधार पर आरक्षण निर्धारित हुआ है। हालांकि स्थानीय लोगों ने वर्तमान स्थिति के अनुरूप आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
नौगांवा, बड़ौदामेव और राजगढ़ के मामलों ने आरक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता और आंकड़ों की शुद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन और निर्वाचन विभाग इन आपत्तियों पर क्या कदम उठाता है।