अरुणाचल में चीन की गतिविधियों पर खरगे का सवाल, पूछा- क्या भारत ने शेरा-5 तक पहुंच खो दी?
अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित सैन्य गतिविधियों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। खरगे ने दावा नहीं, बल्कि सवालों के जरिए पूछा कि क्या तवांग क्षेत्र के पास टक्सिंग में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की मौजूदगी बढ़ी है और क्या भारतीय सेना की एक निर्धारित पेट्रोलिंग पॉइंट ‘शेरा-5’ तक नियमित पहुंच प्रभावित हुई है। उन्होंने सरकार से सीमा पर जमीनी स्थिति और भारतीय गश्त को लेकर देश के सामने स्पष्ट जानकारी रखने की मांग की।
अरुणाचल में चीनी गतिविधियों पर सरकार से जवाब मांगा
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित गतिविधियों को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है और सीमा से जुड़ी किसी भी गतिविधि को लेकर सरकार को देश को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। खरगे ने विशेष रूप से टक्सिंग क्षेत्र में चीनी सेना की मौजूदगी और भारतीय गश्त से जुड़े सवाल उठाए। हालांकि, उनके द्वारा उठाए गए आरोपों और सवालों पर केंद्र सरकार की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या टक्सिंग के पास PLA की मौजूदगी बढ़ी?
खरगे ने सरकार से पूछा कि क्या चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अरुणाचल प्रदेश के टक्सिंग क्षेत्र के आसपास अपनी गतिविधियां या मौजूदगी बढ़ाई है। उन्होंने इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार से वास्तविक जमीनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि सीमा पर किसी भी तरह का बदलाव देश की सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में सरकार को केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यात्मक जानकारी के साथ स्थिति देश के सामने रखनी चाहिए।
शेरा-5 पेट्रोलिंग प्वाइंट को लेकर उठाया सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने सबसे अहम सवाल भारतीय गश्त से जुड़े पेट्रोलिंग प्वाइंट ‘शेरा-5’ को लेकर उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय पक्ष ने इस निर्धारित पेट्रोलिंग प्वाइंट तक अपनी नियमित पहुंच खो दी है। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमा क्षेत्रों में गश्त का उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण और गतिविधियों पर नजर बनाए रखना होता है। हालांकि, शेरा-5 तक पहुंच प्रभावित होने के खरगे के सवाल की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक तौर पर उठाए गए सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सर्दियों की गश्त और स्थानीय लोगों को लेकर भी सवाल
खरगे ने संवेदनशील सीमा क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भारतीय गश्त कथित तौर पर सीमित रहने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि भारतीय गश्त कुछ समय के लिए कम होती है, जबकि चीनी सेना की मौजूदगी लगातार बनी रहती है, तो इसका सुरक्षा पर क्या असर पड़ता है। उन्होंने स्थानीय समुदायों की पारंपरिक गतिविधियों का मुद्दा भी उठाया। खरगे ने सवाल किया कि क्या स्थानीय लोगों के पारंपरिक चराई और शिकार वाले क्षेत्रों तक उनकी पहुंच प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की।
पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर भी सरकार को घेरा
खरगे ने केवल अरुणाचल प्रदेश तक सवाल सीमित नहीं रखे। उन्होंने पूर्वी लद्दाख में मई 2020 से पहले की स्थिति को लेकर भी केंद्र से जवाब मांगा। उनका सवाल था कि क्या भारतीय सेना को उन सभी क्षेत्रों और पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहले जैसी पहुंच पूरी तरह बहाल हो गई है, जहां वह 2020 से पहले नियमित रूप से गश्त करती थी। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में 2020 के बाद सैन्य तनाव बढ़ा था और दोनों देशों ने कई चरणों में सैनिकों की वापसी तथा तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
गलवान हिंसा का जिक्र कर सरकार पर निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस घटना में भारत के 20 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन को लेकर पूर्व में दिए गए बयानों के संदर्भ में निशाना साधते हुए सरकार की सीमा नीति पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और गृह मंत्री से सीमा की मौजूदा स्थिति पर देश को स्पष्ट जानकारी देने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता और साहस पर पूरा भरोसा है।