SriGanganagar Nikay Chunav: महिला संभालेगी जिला प्रमुख की कुर्सी, जानें किस निकाय में कौन लड़ सकेगा चुनाव
श्रीगंगानगर जिले में आगामी निकाय चुनावों को लेकर आरक्षण की तस्वीर साफ हो गई है। जयपुर में हुई आरक्षण लॉटरी में जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं श्रीगंगानगर नगर परिषद सभापति का पद सामान्य यानी ओपन रखा गया है। जिले की 10 नगरपालिकाओं में भी अध्यक्ष पदों का आरक्षण तय हो गया है। अनूपगढ़, सादुलशहर और सूरतगढ़ में अनारक्षित महिला, केसरीसिंहपुर में ओबीसी महिला और घड़साना में एससी महिला के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित किया गया है।
जिला प्रमुख की कुर्सी पर महिला की दावेदारी तय
श्रीगंगानगर जिला प्रमुख पद इस बार अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित हुआ है। इसका मतलब है कि जिले में किसी भी वर्ग की महिला जिला प्रमुख पद के लिए चुनाव लड़ सकती है। आरक्षण की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों और संभावित महिला दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। श्रीगंगानगर में इससे पहले भी महिलाएं जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। सरिता बिश्नोई, शांति देवी पूनिया, प्रियंका श्योराण और कविता रैगर इस पद पर रह चुकी हैं। अब नई आरक्षण व्यवस्था के बाद महिला नेतृत्व को लेकर राजनीतिक समीकरण फिर बदलेंगे।
श्रीगंगानगर नगर परिषद का सभापति पद सामान्य
श्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति पद को अनारक्षित रखा गया है। यानी इस पद के लिए किसी भी वर्ग का उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है। आरक्षण की यह स्थिति सामने आने के बाद नगर परिषद क्षेत्र में संभावित दावेदारों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में सभापति पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। सामान्य श्रेणी में सीट रहने के कारण अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों से जुड़े नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं। चुनावी मैदान में मुकाबला भी दिलचस्प रहने की संभावना है।
अनूपगढ़, सादुलशहर और सूरतगढ़ में महिला अध्यक्ष
आरक्षण लॉटरी के अनुसार अनूपगढ़, सादुलशहर और सूरतगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं। इन निकायों में अब केवल महिला उम्मीदवार ही अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकेंगी। हालांकि अनारक्षित महिला श्रेणी होने के कारण किसी भी वर्ग की महिला इस पद के लिए पात्र होगी। आरक्षण की घोषणा के साथ ही इन तीनों निकायों में महिला दावेदारों की तलाश शुरू होने की संभावना है। राजनीतिक दल भी संगठन और स्थानीय समीकरणों को देखते हुए संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन कर सकते हैं।
केसरीसिंहपुर में ओबीसी महिला के लिए आरक्षित सीट
केसरीसिंहपुर नगरपालिका अध्यक्ष पद इस बार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इसका सीधा असर संभावित दावेदारों के समीकरण पर पड़ेगा। इस पद के लिए ओबीसी वर्ग की महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेगी। आरक्षण सामने आने के बाद राजनीतिक दलों को अब इसी श्रेणी के भीतर मजबूत प्रत्याशी तलाशने होंगे। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चुनावी तैयारी कर रहे कई संभावित दावेदारों के समीकरण भी बदल सकते हैं। अब पार्टियों के सामने संगठनात्मक पकड़, स्थानीय लोकप्रियता और चुनावी समीकरण के आधार पर महिला प्रत्याशी चुनने की चुनौती होगी।
घड़साना में एससी महिला के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित
घड़साना नगरपालिका अध्यक्ष पद एससी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में इस पद पर केवल अनुसूचित जाति वर्ग की महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेगी। आरक्षण की घोषणा के बाद घड़साना में भी चुनावी समीकरण बदल गए हैं। संभावित महिला दावेदारों और राजनीतिक दलों के बीच सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है। अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी चयन में पार्टी संगठन के साथ स्थानीय सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस आरक्षण के चलते अब घड़साना में पुरुष दावेदारों की अध्यक्ष पद पर दावेदारी खत्म हो गई है।
पांच नगरपालिकाओं में सभी वर्गों के लिए मौका
गजसिंहपुर, पदमपुर, रायसिंहनगर, श्रीकरणपुर और श्रीविजयनगर नगरपालिका अध्यक्ष पद को सामान्य यानी ओपन फॉर ऑल श्रेणी में रखा गया है। इन निकायों में किसी भी वर्ग का उम्मीदवार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकता है। सामान्य सीट होने के कारण यहां संभावित दावेदारों का दायरा सबसे ज्यादा रहेगा। राजनीतिक दलों में टिकट के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चुनावी तैयारी कर रहे नेताओं के लिए यह आरक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इन निकायों में जातीय और राजनीतिक समीकरणों के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ भी अहम होगी।
आरक्षण के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
आरक्षण लॉटरी के नतीजों ने श्रीगंगानगर जिले के निकाय चुनावों की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट कर दी है। कहीं महिला उम्मीदवारों के लिए रास्ता खुला है तो कहीं ओबीसी और एससी महिला वर्ग के लिए सीट आरक्षित हुई है। वहीं पांच नगरपालिकाओं में सभी वर्गों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकेंगे। अब राजनीतिक दलों के सामने प्रत्याशी चयन सबसे बड़ी चुनौती होगी। आरक्षण तय होने के बाद संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ने के साथ ही स्थानीय स्तर पर बैठकों और राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर भी तेज होने की संभावना है।