राजस्थान के गांवों में पानी के लिए लगेगी फीस? मंत्री ने दिए संकेत, 50 रुपये का प्रस्ताव चर्चा में
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में नल से मिलने वाले पानी को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने ग्रामीण जलापूर्ति के लिए शुल्क वसूली की संभावना के संकेत दिए हैं। मंत्री ने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए कहा कि कई जगहों पर 50 रुपये मासिक शुल्क लेने की मांग सामने आई है और इस प्रस्ताव को समिति के सामने रखा गया है। हालांकि, इसे अभी पूरे प्रदेश में लागू करने का अंतिम फैसला नहीं बताया गया है। सरकार का तर्क है कि शुल्क व्यवस्था से जलापूर्ति की निगरानी, चोरी पर नियंत्रण और सेवा की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
50 रुपये शुल्क की बात, लेकिन फैसला अभी बाकी
जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने कहा कि ग्रामीण जलापूर्ति के लिए न्यूनतम 50 रुपये शुल्क लेने का विचार समिति के सामने रखा गया है। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि कई स्थानों पर लोग भी ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। मंत्री के अनुसार, शुल्क लेने से लोगों की पानी की सप्लाई को लेकर जिम्मेदारी और निगरानी बढ़ सकती है। हालांकि, फिलहाल इसे अंतिम सरकारी फैसला नहीं माना जा सकता। प्रस्ताव पर संबंधित समिति और सरकार के स्तर पर आगे निर्णय होना बाकी है। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं पर कब और कितना शुल्क लागू होगा, इसकी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
पानी चोरी रोकने में मदद मिलने का तर्क
मंत्री ने शुल्क व्यवस्था के पीछे पानी की चोरी रोकने का तर्क भी दिया। उनका कहना है कि यदि लोग पानी के लिए निर्धारित शुल्क देंगे तो अवैध तरीके से पानी लेने वालों के खिलाफ शिकायत करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो व्यक्ति पहले पानी के टैंकर पर हर महीने करीब 2 हजार रुपये तक खर्च करता था, उसके लिए 50 रुपये का शुल्क अपेक्षाकृत कम हो सकता है। सरकार का मानना है कि शुल्क के साथ जलापूर्ति व्यवस्था की मॉनिटरिंग मजबूत की जा सकती है और लोगों को निर्धारित मात्रा में बेहतर गुणवत्ता का पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।
अवैध पानी लेने पर FIR का भी प्रावधान
जलदाय मंत्री ने अवैध तरीके से पानी लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही है। उनके अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से पानी लेने से रोकने के बावजूद वह ऐसा करना जारी रखता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान समिति के स्तर पर रखा गया है। इसका उद्देश्य जल स्रोतों और सरकारी जलापूर्ति व्यवस्था के दुरुपयोग पर रोक लगाना है। हालांकि, प्रस्तावित शुल्क और कार्रवाई से जुड़े नियमों का अंतिम स्वरूप सरकार की ओर से औपचारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल मंत्री के बयान के बाद ग्रामीण जल उपभोक्ताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ग्रामीण जलापूर्ति के लिए नई संचालन नीति मंजूर
कैबिनेट बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल की आपूर्ति को नियमित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाए रखने के लिए संचालन एवं संधारण नीति को मंजूरी दी गई है। सरकार के मुताबिक इस नीति का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को लंबे समय तक सुचारु बनाए रखना है। इसके तहत जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव, निगरानी और संचालन को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि नई नीति के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसी नीति के तहत शुल्क जैसे प्रस्तावों पर भी आगे निर्णय हो सकता है।
गांव से राज्य स्तर तक बनेगा पांच स्तरीय ढांचा
जलदाय विभाग के अनुसार नई संचालन एवं संधारण नीति के तहत ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक पांच स्तरीय व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका मकसद ग्रामीण जल योजनाओं की निगरानी और रखरखाव को ज्यादा प्रभावी बनाना है। मंत्री के अनुसार नीति में केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों और उसके 19 प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे जल योजनाओं की नियमित निगरानी, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदारियां तय होंगी। साथ ही लंबे समय तक ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन और जलापूर्ति से जुड़ी व्यवस्थाओं को बनाए रखने पर ध्यान दिया जाएगा।
कैबिनेट में पानी के साथ कई बड़े फैसले
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में 13 अगस्त को जयपुर में हुई कैबिनेट बैठक में पानी के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी निर्णय लिए गए। बैठक में समान नागरिक संहिता यानी UCC से जुड़े विधेयक, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति सहित कई विषयों पर फैसले लिए गए। बैठक के बाद सरकार के मंत्रियों ने इन फैसलों की जानकारी दी। ग्रामीण जलापूर्ति को लेकर संचालन एवं संधारण नीति की मंजूरी को भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को लेकर आगे होने वाले निर्णय पर ग्रामीण क्षेत्रों की नजर रहेगी।
क्या पूरे राजस्थान में लगेगा पानी का शुल्क?
मंत्री के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजस्थान के सभी गांवों में नल के पानी के लिए 50 रुपये शुल्क देना होगा? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 50 रुपये शुल्क की बात मंत्री ने अपनी व्यक्तिगत राय के रूप में कही है और इसे समिति के सामने रखने की जानकारी दी है। इसलिए इसे तत्काल लागू हो चुका फैसला मानना सही नहीं होगा। शुल्क की राशि, दायरा, पात्र उपभोक्ता और लागू होने की तारीख जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सरकार की ओर से अंतिम निर्णय और औपचारिक आदेश का इंतजार रहेगा। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं को अभी अंतिम अधिसूचना का इंतजार करना होगा।