मंत्री संजय शर्मा पर जूली का हमला, बोले- महिला IAS से अमर्यादित व्यवहार क्यों?
इंट्रो: अलवर में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा के कलेक्टर अर्तिका शुक्ला के खिलाफ धरने को लेकर अब सियासी विवाद और गहरा गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मंत्री के कथित बयानों को लेकर सवाल उठाए हैं। जूली ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि धरने के दौरान पुलिसकर्मियों और महिला IAS अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी की कार्यशैली से असहमति होने पर संवैधानिक और प्रशासनिक माध्यमों से शिकायत की जानी चाहिए। हालांकि, मंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों और उनके बयान का पूरा संदर्भ सामने रखना भी जरूरी है।
कलेक्टर के खिलाफ धरने से गरमाई सियासत
12 अगस्त को अलवर कलेक्ट्रेट के बाहर राज्य मंत्री संजय शर्मा के धरने के बाद मामला केवल प्रशासनिक विवाद तक सीमित नहीं रहा। मंत्री ने सफाईकर्मियों की नियुक्ति से जुड़े मुद्दे पर प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई थी। इस दौरान उन्होंने जिला कलेक्टर अर्तिका शुक्ला और नगर निगम प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। करीब साढ़े चार घंटे चले घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हस्तक्षेप से विवाद शांत हुआ। इसके बाद सफाई कर्मचारी भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात सामने आई।
जूली ने मंत्री की भाषा पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मंत्री संजय शर्मा पर निशाना साधा। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि सार्वजनिक स्थल पर धरने के दौरान मंत्री ने पुलिसकर्मी और महिला IAS अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। जूली ने कहा कि यदि मंत्री को कलेक्टर की कार्यशैली या किसी प्रशासनिक निर्णय से शिकायत थी, तो इसके लिए संवैधानिक और प्रशासनिक रास्ते मौजूद हैं। उनके अनुसार, इस तरह सार्वजनिक तौर पर महिला अधिकारी के प्रति कथित अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।
‘CM या सांसद से शिकायत करनी चाहिए थी’
जूली ने अपने बयान में कहा कि अगर मंत्री को कलेक्टर से कोई समस्या या शिकायत थी तो उन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अथवा अलवर सांसद और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के समक्ष मामला रखना चाहिए था। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत को उचित मंच पर उठाया जा सकता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से कथित तौर पर अमर्यादित व्यवहार को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने मंत्री से इस मामले में खेद व्यक्त करने की मांग भी की। जूली के बयान के बाद यह घटनाक्रम एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति बना था विवाद का केंद्र
पूरा विवाद सफाई कर्मचारी भर्ती 2012 के अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने से जुड़ा था। मंत्री संजय शर्मा का कहना था कि कई अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। मामले के मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद दस्तावेजों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन के अनुसार, कमेटी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच में नगर निगम आयुक्त की मदद करेगी और पात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे प्रशासनिक विवाद को फिलहाल समाधान की दिशा में ले जाने का प्रयास किया गया है।
प्रशासन और राजनीति आमने-सामने
मंत्री और प्रशासन के बीच सार्वजनिक तौर पर सामने आया यह विवाद राजस्थान की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ मंत्री का दावा है कि उनका उद्देश्य लंबे समय से लंबित सफाईकर्मियों की नियुक्ति का रास्ता साफ कराना था, वहीं विपक्ष ने उनके विरोध के तरीके और कथित भाषा पर सवाल उठाए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि सफाई कर्मचारी भर्ती की दस्तावेज जांच कितनी तेजी से पूरी होती है और पात्र अभ्यर्थियों को तय समय पर नियुक्ति पत्र मिलते हैं या नहीं। साथ ही मंत्री के कथित बयान को लेकर विपक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया आगे भी जारी रहने की संभावना है।