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FCRA बिल पर महुआ मोइत्रा का तंज, बोलीं- ‘सारी फंडिंग RSS को ही मिले’

इंट्रो: FCRA बिल को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने बिल पर सवाल उठाते हुए सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित प्रावधानों के जरिए संगठनों की संपत्ति, नकदी और फंड पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जा रही है। महुआ ने कहा कि विपक्ष ने एकजुट होकर बिल को वापस लेने की मांग की थी।

FCRA बिल पर महुआ मोइत्रा का हमला

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने FCRA बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून संगठनों की संपत्ति और वित्तीय संसाधनों पर कब्जा करने का एक और माध्यम बन सकता है। महुआ ने कहा कि विपक्ष इस बिल के प्रावधानों को लेकर गंभीर आपत्ति जता चुका है। उनके मुताबिक, विपक्षी दलों ने एकमत होकर सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की है।

‘सारी फंडिंग सिर्फ RSS को ही मिले’

महुआ मोइत्रा ने अपने बयान के जरिए सरकार पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि ‘सारी फंडिंग सिर्फ RSS को ही मिले’। उनका यह बयान FCRA से जुड़े प्रस्तावित बदलावों और संगठनों की फंडिंग को लेकर विपक्ष की आशंकाओं के संदर्भ में आया। हालांकि, यह महुआ मोइत्रा का राजनीतिक आरोप है और सरकार का पक्ष इस दावे से अलग हो सकता है।

संगठनों की संपत्ति पर कब्जे का लगाया आरोप

महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि FCRA बिल सिर्फ विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए संगठनों की संपत्ति, कैश और दूसरे वित्तीय संसाधनों पर भी नियंत्रण हासिल किया जा सकता है। उन्होंने इसे जमीन हड़पने की कोशिश तक से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की। विपक्ष का कहना है कि ऐसे प्रावधानों से सामाजिक संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।

विपक्ष ने बिल वापस लेने की मांग की

टीएमसी सांसद के मुताबिक, विपक्षी दलों ने FCRA बिल को लेकर एकजुट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष की ओर से बिल वापस लेने की मांग की गई। विपक्ष का तर्क है कि विदेशी योगदान को नियंत्रित करने के नाम पर ऐसे प्रावधान नहीं होने चाहिए, जिनसे संगठनों के कामकाज और वित्तीय स्वतंत्रता पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण हो जाए।

FCRA को लेकर क्यों छिड़ी बहस?

FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act का उद्देश्य भारत में विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करना है। सरकार समय-समय पर विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियमों में बदलाव करती रही है। वहीं विपक्ष और कई संगठन ऐसे बदलावों को लेकर यह आशंका जताते रहे हैं कि इनका इस्तेमाल आलोचनात्मक आवाजों या स्वतंत्र संस्थाओं पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। इसी मुद्दे पर संसद में राजनीतिक टकराव तेज है।

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Stv News Rajasthan

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