अलवर में सफाईकर्मी भर्ती पर हाई वोल्टेज ड्रामा, अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे मंत्री
अलवर: नगर निगम में 329 सफाई कर्मचारियों की लंबित भर्ती को लेकर अलवर में मंगलवार को दिनभर सियासी और प्रशासनिक हलचल बनी रही। नियुक्ति नहीं मिलने से नाराज वन मंत्री संजय शर्मा सुबह करीब 11 बजे धरने पर बैठ गए। मंत्री के धरने पर बैठने की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। करीब चार घंटे चले धरने के बाद निगम प्रशासन ने पांच अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। वहीं, शेष पात्र अभ्यर्थियों को आगामी 16 अगस्त को आयोजित होने वाले रोजगार मेले में नियुक्ति देने का आश्वासन दिया गया।
2012 की भर्ती, 14 साल से नियुक्ति का इंतजार
मामला वर्ष 2012 में हुई 329 सफाई कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद इन अभ्यर्थियों को लंबे समय तक नियुक्ति नहीं मिल सकी। नियुक्ति की मांग को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा। वर्ष 2019 में हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को 329 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर मामला लगातार लंबित रहा।
डीएलबी और प्रशासन के बीच तालमेल पर उठे सवाल
नियुक्ति में देरी को लेकर विभागीय स्तर पर समन्वय की कमी भी सामने आई। बताया जा रहा है कि स्थानीय प्रशासन और स्वायत्त शासन विभाग यानी डीएलबी के बीच तालमेल नहीं बन पाने के कारण हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की नाराजगी बढ़ती गई। इसी मुद्दे को लेकर वन मंत्री संजय शर्मा ने भी अधिकारियों से जवाब मांगा और मामले का तत्काल समाधान कराने की मांग की।
अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे मंत्री
मामला उस वक्त ज्यादा चर्चा में आ गया, जब वन मंत्री संजय शर्मा खुद धरने पर बैठ गए। सुबह करीब 11 बजे मंत्री के धरने पर बैठने की सूचना प्रशासन तक पहुंची तो अधिकारियों में हलचल शुरू हो गई। मंत्री ने लंबित नियुक्तियों को लेकर नाराजगी जताई और अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति देने की मांग रखी। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम रहा क्योंकि मंत्री अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ धरने पर बैठे नजर आए।
चार घंटे बाद पांच अभ्यर्थियों को मिले नियुक्ति पत्र
करीब चार घंटे तक चले धरने के बाद प्रशासन और निगम अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की। निगम प्रशासन की ओर से पांच पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। इसके साथ ही अन्य पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर भी समयसीमा तय की गई। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि आगामी 16 अगस्त को आयोजित रोजगार मेले के दौरान शेष पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाएगी। इस आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ।
14 साल पुराने मामले के समाधान की उम्मीद
329 सफाईकर्मियों की यह भर्ती करीब 14 वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा में है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं होने से यह मामला लगातार विवादों में रहा। अब मंत्री के धरने के बाद पांच नियुक्तियां होने और बाकी पात्र अभ्यर्थियों के लिए 16 अगस्त की तारीख तय किए जाने से लंबे समय से चल रहे इस मामले के समाधान की उम्मीद जगी है। हालांकि सभी पात्र अभ्यर्थियों को वास्तविक नियुक्ति मिलने के बाद ही इस प्रक्रिया को पूरी तरह सफल माना जाएगा।
अलवर में मंत्री के धरने से गरमाया मामला
सफाई कर्मचारी भर्ती का यह मामला अब प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। अपनी ही सरकार में मंत्री के धरने पर बैठने से विभागीय समन्वय और लंबित मामलों के निपटारे को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल निगाहें 16 अगस्त के रोजगार मेले पर हैं, जहां प्रशासन के आश्वासन के मुताबिक शेष पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जानी है।