राजस्थान निकाय चुनाव: 13 अगस्त की लॉटरी तय करेगी महापौर और जिला प्रमुख का आरक्षण
अलवर। राजस्थान में आगामी निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेशभर की जिला परिषदों के जिला प्रमुख तथा नगरीय निकायों के महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के आरक्षण का फैसला 13 अगस्त को जयपुर में होने वाली लॉटरी के जरिए किया जाएगा। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद इन पदों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं की राजनीतिक रणनीति भी बदल सकती है। अलवर में इस लॉटरी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं की नजरें टिकी हैं। वर्तमान में अलवर जिला प्रमुख का पद ओबीसी और महापौर का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है।
13 अगस्त को जयपुर में होगी आरक्षण की लॉटरी
जिला प्रमुख और नगरीय निकायों के प्रमुख पदों के आरक्षण के लिए 13 अगस्त को जयपुर में लॉटरी निकाली जाएगी। इसमें यह तय होगा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों और नगरीय निकायों में जिला प्रमुख, महापौर, सभापति तथा अध्यक्ष के पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। अलवर से भी भाजपा और कांग्रेस के कई नेता इस प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। आरक्षण की नई स्थिति सामने आने के बाद संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल अलवर में जिला प्रमुख की सीट ओबीसी और महापौर का पद सामान्य वर्ग के लिए है।
वार्ड आरक्षण की लॉटरी अभी तय नहीं
नगर निकाय और पंचायत चुनाव में वार्डों के आरक्षण की लॉटरी की तारीख अभी तय नहीं हुई है। अलवर में 16 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा प्रस्तावित है, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्री शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास की जानकारी दी गई है। इस दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में वार्ड आरक्षण की लॉटरी 16 अगस्त के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। इसकी आधिकारिक तारीख सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
आरक्षण तय होते ही कई नेताओं की दावेदारी पर असर
महापौर और जिला प्रमुख पद के आरक्षण की स्थिति कई नेताओं की चुनावी तैयारी को सीधे प्रभावित कर सकती है। राजनीतिक दलों से जुड़े कई नेता इन पदों पर दावेदारी की तैयारी कर रहे हैं और आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। लॉटरी में किस निकाय या जिला परिषद की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होती है, इसी के आधार पर संभावित उम्मीदवारों की तस्वीर सामने आएगी। अलवर में वर्तमान जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर हैं, जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था और बाद में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो गए। निवर्तमान महापौर घनश्याम गुर्जर हैं।
नगर परिषद से नगर निगम बनने के बाद बदला समीकरण
अलवर में निकाय राजनीति में पिछले वर्षों के दौरान बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अलवर नगर परिषद को नगर निगम में क्रमोन्नत किया गया था। उस समय कांग्रेस का बोर्ड बना और बीना गुप्ता सभापति बनीं। बाद में बीना गुप्ता से जुड़े विवाद के बाद न्यायालय के आदेश पर भाजपा के उप सभापति घनश्याम गुर्जर को महापौर बनाया गया। इसके बाद से अलवर नगर निगम की राजनीति में भी बदलाव देखने को मिला। अब नए आरक्षण के साथ आगामी चुनाव में राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों की रणनीति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
नए जिलों के गठन से जिला प्रमुख पद का समीकरण बदला
कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा को अलग जिले बनाए जाने के बाद अलवर जिला परिषद का क्षेत्र और प्रतिनिधित्व भी बदला है। मौजूदा स्थिति में अलवर जिला परिषद में 29 जिला पार्षद रह गए हैं। नए जिलों के गठन के साथ ओबीसी बहुल क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अलग जिलों में चला गया है। ऐसे में आगामी आरक्षण लॉटरी को लेकर अलवर जिला प्रमुख पद के संभावित आरक्षण पर भी चर्चा तेज है। हालांकि, जिला प्रमुख का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, इसका अंतिम निर्णय 13 अगस्त की लॉटरी के बाद ही स्पष्ट होगा। इसके बाद ही राजनीतिक दलों की वास्तविक रणनीति सामने आएगी।