राजस्थान पुलिस में नई SOP लागू, शिकायतों का 14 दिन में करना होगा निस्तारण
जयपुर। राजस्थान पुलिस ने आमजन की शिकायतों और परिवादों के निस्तारण की प्रक्रिया को समयबद्ध करने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP लागू की है। इसके तहत पुलिस के पास पहुंचने वाले परिवादों को अब लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकेगा। हर शिकायत का अधिकतम 14 दिन के भीतर निस्तारण करना अनिवार्य होगा। यदि किसी मामले में 14 दिन के भीतर अंतिम रिपोर्ट तैयार करना संभव नहीं है, तो संबंधित अधिकारी को तय अवधि में अंतरिम रिपोर्ट भेजनी होगी। इसमें अब तक की गई कार्रवाई, लंबित बिंदुओं और अंतिम निस्तारण में संभावित समय की जानकारी देनी होगी।
डीजीपी कार्यालय से जारी हुए नई SOP के आदेश
नई SOP को लेकर डीजीपी कार्यालय की ओर से पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों के निस्तारण में देरी को कम करना और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। नई प्रक्रिया के तहत डीजीपी कार्यालय में प्राप्त होने वाले परिवादों की निगरानी CCTNS के माध्यम से की जाएगी। इसी प्रणाली के जरिए संबंधित जिला या रेंज से कार्रवाई की रिपोर्ट भी प्राप्त की जाएगी। इससे शिकायत के दर्ज होने से लेकर उसके निस्तारण तक प्रत्येक स्तर पर कार्रवाई की स्थिति की निगरानी संभव होगी।
अंतिम रिपोर्ट से पहले शिकायतकर्ता को बुलाना जरूरी
नई SOP में शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी देने पर विशेष जोर दिया गया है। किसी परिवाद की अंतिम रिपोर्ट डीजीपी कार्यालय को भेजने से पहले जिला स्तर पर कम से कम पुलिस उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी को परिवादी को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। इस मुलाकात और दी गई जानकारी का उल्लेख अंतिम रिपोर्ट में भी करना होगा। यानी शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी दिए बिना परिवाद को अंतिम रूप से बंद करने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकेगी। इससे शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
जिला और रेंज स्तर पर एएसपी को मिलेगी निगरानी की जिम्मेदारी
शिकायतों की निगरानी के लिए जिला और रेंज स्तर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को जीआरओ नियुक्त किया जाएगा। जीआरओ की जिम्मेदारी लंबित परिवादों की नियमित निगरानी करना होगी। अधिकारी CCTNS और राजकॉप सिटीजन ऐप पर दर्ज शिकायतों की मासिक समीक्षा करेगा। इसके अलावा लंबित मामलों के निस्तारण की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी। इस व्यवस्था के जरिए शिकायतों को एक स्तर से दूसरे स्तर पर भेजकर लंबे समय तक लंबित रखने की स्थिति पर नियंत्रण करने का प्रयास किया गया है।
थाना स्तर से रेंज तक हर शिकायत CCTNS पर दर्ज होगी
नई SOP का दायरा केवल डीजीपी कार्यालय से भेजे गए परिवादों तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस थाने, वृत्त, जिला और रेंज स्तर पर व्यक्तिगत रूप से प्राप्त शिकायतों के साथ ई-मेल, CCTNS, राजकॉप सिटीजन ऐप और अन्य माध्यमों से मिलने वाले परिवादों को भी CCTNS पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इन सभी शिकायतों के निस्तारण के लिए भी अधिकतम 14 दिन की समयसीमा निर्धारित की गई है। इससे अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों का एक केंद्रीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी स्थिति की निगरानी की जा सकेगी।
पांच दिन बाद स्मरण पत्र, फिर रेंज स्तर पर जवाबदेही
यदि डीजीपी कार्यालय से भेजे गए परिवाद पर निर्धारित समय में रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती है तो संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट भेजने के लिए पांच दिन के भीतर स्मरण पत्र जारी करना होगा। इसके बाद भी यदि अनुपालना नहीं होती है तो कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित रेंज के महानिरीक्षक पुलिस की होगी। जिला और रेंज स्तर पर लंबित परिवादों की नियमित समीक्षा भी की जाएगी। जिला स्तर पर नियुक्त जीआरओ को प्रत्येक महीने कम से कम एक बार थानाधिकारियों और वृत्ताधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित शिकायतों तथा मासिक निस्तारण की समीक्षा करनी होगी।