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भोजनशाला में काम करने वाला युवक बना कारोबारी, सांवलिया सेठ को चढ़ाया चांदी का सोलर पैनल

मेहनत, आस्था और विश्वास से सफलता हासिल करने की प्रेरणादायक कहानी चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी से सामने आई है। झालावाड़ के पाटन निवासी आशीष शर्मा, जो कभी सांवलियाजी मंदिर की भोजनशाला में काम करते थे, आज सफल कारोबारी बन चुके हैं। अपने संघर्ष और सफलता के लिए आभार जताते हुए उन्होंने भगवान सांवलिया सेठ को 100 ग्राम चांदी से बना सोलर पैनल भेंट किया। आशीष का कहना है कि उन्होंने भगवान को अपना मालिक मानकर काम शुरू किया और आज मिली सफलता उन्हीं की कृपा है।

भोजनशाला में काम से शुरू हुआ सफर

झालावाड़ जिले के पाटन क्षेत्र निवासी आशीष शर्मा कुछ समय पहले तक चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी मंदिर की भोजनशाला में काम करते थे। मंदिर मंडल की भोजनशाला ठेके पर संचालित होती थी और आशीष वहां ठेकेदार के माध्यम से कार्य कर रहे थे। हालांकि, बाद में जब मंदिर प्रशासन ने भोजनशाला का संचालन खुद संभालना शुरू किया तो ठेका खत्म हो गया और आशीष को काम छोड़ना पड़ा। इसके बाद वह वापस अपने गांव लौट आए।

बेरोजगारी के बाद शुरू किया खुद का व्यवसाय

काम बंद होने के बाद आशीष ने हिम्मत नहीं हारी और भगवान सांवलिया सेठ का नाम लेकर नया व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने सोलर पैनल लगाने का काम शुरू किया। शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन मेहनत और लगन के दम पर उनका कारोबार तेजी से आगे बढ़ा। आशीष ने बताया कि उन्होंने पूरी आस्था के साथ अपने काम की शुरुआत की और धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीतने में सफल रहे।

छह महीने में मिली बड़ी सफलता

आशीष शर्मा के अनुसार, सोलर पैनल के काम में उन्हें महज छह महीने में बड़ी सफलता मिली। वर्तमान में उनके पास छोटे-बड़े करीब 135 साइट के काम हैं। इतनी कम अवधि में कारोबार के विस्तार से उत्साहित आशीष ने भगवान सांवलिया सेठ के प्रति आभार व्यक्त करने का संकल्प लिया। उन्होंने तय किया कि अपनी पहली बड़ी सफलता के बाद वह मंदिर में विशेष भेंट अर्पित करेंगे।

भगवान को भेंट किया चांदी का सोलर पैनल

अपने संकल्प को पूरा करने के लिए आशीष अपने परिवार के साथ सांवलियाजी मंदिर पहुंचे। उन्होंने झालावाड़ में विशेष रूप से 100 ग्राम चांदी का सोलर पैनल मॉडल तैयार करवाया और उसे कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखवाकर मंदिर कार्यालय में भेंट किया। मंदिर प्रशासन की ओर से आशीष का सम्मान किया गया और उन्हें उपरणा ओढ़ाकर प्रसाद भेंट किया गया।

‘सांवलिया सेठ को मालिक मानकर शुरू किया काम’

आशीष शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपना व्यवसाय भगवान सांवलिया सेठ को समर्पित मानकर शुरू किया था। उन्होंने बताया कि आज जो भी सफलता उन्हें मिली है, वह भगवान की कृपा और अपनी मेहनत का परिणाम है। आशीष की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी मेहनत और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।

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