राजस्थान कांग्रेस में सियासी संग्राम! मालवीय की जॉइनिंग से गहलोत vs डोटासरा आमने-सामने
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के अंदर सियासी घमासान तेज हो गया है। एक बार फिर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है और इस बार मामला सीधे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच टकराव तक पहुंच गया है।
दरअसल, पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने भारत आदिवासी पार्टी यानी BAP छोड़कर 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में वापसी की। लेकिन यह वापसी जितनी सियासी तौर पर अहम मानी जा रही थी, उतनी ही विवादों में भी घिर गई। वजह बनी जॉइनिंग की जगह — कांग्रेस मुख्यालय की बजाय अशोक गहलोत का सिविल लाइंस स्थित आवास।
गहलोत ने सोशल मीडिया पर मालवीय की वापसी का स्वागत करते हुए इसे कांग्रेस परिवार की मजबूती बताया। उन्होंने कहा कि मालवीय सिर्फ गलतफहमी में पार्टी छोड़कर गए थे और अब उनके लौटने से आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस और मजबूत होगी। गहलोत ने यह भी संकेत दिए कि BAP के चलते वोटों का बंटवारा हो रहा था, जिसका फायदा सीधे बीजेपी को मिल रहा था।
लेकिन दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा इस पूरे घटनाक्रम से नाराज नजर आए। उन्होंने बिना नाम लिए साफ कहा कि व्यक्तिवाद ने ही कांग्रेस को पहले नुकसान पहुंचाया है। डोटासरा का इशारा साफ तौर पर गहलोत की तरफ माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में जॉइनिंग की एक परंपरा होती है और उसे नजरअंदाज करना गलत संदेश देता है।
हालांकि बाद में डोटासरा ने अपने बयान को थोड़ा नरम करते हुए कहा कि गहलोत के यहां सिर्फ स्वागत हुआ, लेकिन सियासी हलकों में यह बयानबाजी कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर चुकी है।
वहीं खुद महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने इस पूरे विवाद को ज्यादा तूल न देते हुए कहा कि इसमें कोई बड़ी बात नहीं है कि जॉइनिंग कहां हुई। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा सिर्फ जॉइनिंग का नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और शक्ति संतुलन की लड़ाई का संकेत है।
अब सवाल यह है कि इस गुटबाजी का आगामी पंचायत और निकाय चुनावों पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कांग्रेस समय रहते अपने अंदरूनी मतभेदों को नहीं सुलझाती, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है। खासकर आदिवासी क्षेत्रों में, जहां वोटों का बिखराव पहले ही पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है।
हालांकि, अगर मालवीय की वापसी से BAP कमजोर होती है और कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ती है, तो यह पार्टी के लिए गेमचेंजर भी साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, राजस्थान कांग्रेस इस समय दोराहे पर खड़ी है — एक तरफ वापसी और मजबूती की उम्मीद, तो दूसरी तरफ अंदरूनी खींचतान का खतरा। अब देखना होगा कि चुनावी मैदान में कांग्रेस एकजुट नजर आती है या यह गुटबाजी उसकी राह मुश्किल बनाती है।
इसे भी पढ़ें – NEET प्रदर्शन का नया वीडियो चर्चा में, संसद मार्च को लेकर फिर उठे सवाल