बूंदी में अडानी विलमर फैक्ट्री में मेगा मॉक ड्रिल, आपदा से निपटने की तैयारियों की हुई बड़ी परीक्षा
औद्योगिक क्षेत्रों में किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से बूंदी स्थित अडानी विलमर फैक्ट्री में जिला प्रशासन ने व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की। इस अभ्यास के दौरान फैक्ट्री में भीषण आग लगने और कई कर्मचारियों के झुलसने का काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन, चिकित्सा विभाग, सिविल डिफेंस और क्विक रिस्पांस टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया। इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न विभागों की तैयारियों, प्रतिक्रिया समय और आपसी समन्वय का वास्तविक आकलन करना था।
भीषण आग का काल्पनिक दृश्य बनाकर परखी गई तैयारियां
मॉक ड्रिल के तहत फैक्ट्री परिसर में अचानक भीषण आग लगने और कर्मचारियों के घायल होने की स्थिति तैयार की गई। कंट्रोल रूम को जैसे ही सूचना मिली, प्रशासनिक अमला तुरंत सक्रिय हो गया। कुछ ही मिनटों में पुलिस, फायर ब्रिगेड, चिकित्सा दल और अन्य बचाव एजेंसियां घटनास्थल पर पहुंच गईं। पूरे अभियान को वास्तविक आपदा की तरह संचालित किया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में विभागों की कार्यशैली और निर्णय क्षमता का व्यावहारिक परीक्षण किया जा सके। इस दौरान अधिकारियों ने प्रत्येक चरण की निगरानी करते हुए प्रतिक्रिया समय का भी मूल्यांकन किया।
प्रशासन और पुलिस ने संभाली राहत अभियान की कमान
मॉक ड्रिल के दौरान अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट रमेश देव और पुलिस अधीक्षक संजय सिंह चंपावत के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन किया। घटनास्थल पर पहुंचकर अधिकारियों ने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया और पूरे ऑपरेशन की लगातार निगरानी की। पुलिस बल ने सुरक्षा व्यवस्था संभालते हुए क्षेत्र को सुरक्षित किया, ताकि राहत कार्य बिना किसी बाधा के संचालित हो सके। इस अभ्यास के माध्यम से प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में सभी विभाग एकजुट होकर प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
घायलों का रेस्क्यू और चिकित्सा व्यवस्था का हुआ अभ्यास
मॉक ड्रिल में घायल कर्मचारियों की भूमिका निभा रहे लोगों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। चिकित्सा टीम ने घायलों को स्ट्रेचर की सहायता से सुरक्षित बाहर निकाला और एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल भेजने का अभ्यास किया। इस दौरान चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन किया। अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी औद्योगिक दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्तियों को कम से कम समय में आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
फायर ब्रिगेड और सिविल डिफेंस ने दिखाया समन्वय
नगर परिषद की अग्निशमन टीम ने फायर टेंडरों के साथ पहुंचकर निर्धारित समय सीमा में आग पर नियंत्रण पाने का अभ्यास किया। वहीं, सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों ने राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग किया। क्विक रिस्पांस टीम और महिला पुलिस बल ने भी अभियान के दौरान अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। इस संयुक्त अभ्यास से स्पष्ट हुआ कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल किसी भी बड़ी आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है।
प्रतिक्रिया समय और समन्वय का किया गया विस्तृत मूल्यांकन
मॉक ड्रिल के समापन पर अधिकारियों ने सभी विभागों की कार्यप्रणाली का विस्तृत मूल्यांकन किया। इस दौरान विशेष रूप से यह परखा गया कि सूचना मिलने के बाद राहत दल कितनी तेजी से घटनास्थल तक पहुंचे और किस प्रकार आपसी समन्वय के साथ कार्य किया। अधिकारियों ने भविष्य में आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए। अंत में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और राहत कार्य से जुड़े सभी सदस्यों को आपदा के समय सतर्कता, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की शपथ दिलाई गई। इस अभ्यास को औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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