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पुष्कर में सजेगा ‘आइसोकॉन’ का मंच, एनेस्थीसिया की नई तकनीकों पर देश-विदेश के विशेषज्ञ करेंगे मंथन

अजमेर के पुष्कर में 1 और 2 अगस्त को आयोजित होने जा रहे प्रतिष्ठित आइसोकॉन (ISOCON) सम्मेलन में देश-विदेश के नामी एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, वैज्ञानिक, शिक्षक और पीजी विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, मरीजों की सुरक्षा और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर गहन मंथन होगा। आयोजन से पहले 31 जुलाई को विशेषज्ञों की कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।

पहली बार अजमेर को मिली प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और उसके एनेस्थीसिया विभाग को पहली बार प्रतिष्ठित आइसोकॉन सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है। 1 और 2 अगस्त को पुष्कर के एक रिसॉर्ट में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित विदेशों से भी ख्यातिनाम एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, चिकित्सा विशेषज्ञ, शिक्षक और रेजिडेंट डॉक्टर भाग लेंगे। आयोजकों के अनुसार यह सम्मेलन चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक उपचार पद्धतियों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “सेफ्टी, साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी इन एनेस्थीसिया” रखी गई है, जो मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्रित है।

31 जुलाई को होगी विशेषज्ञों की प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला

मुख्य सम्मेलन से पहले 31 जुलाई को राजस्थान सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स की ओर से प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें छह तकनीकी सत्र होंगे, जिनमें राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का प्रशिक्षण देंगे। कार्यशाला के प्रमुख विषयों में डिफिकल्ट एयरवे मैनेजमेंट, रीजनल एनेस्थीसिया, एडवांस्ड पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड, मैकेनिकल वेंटिलेशन, ट्रॉमा केयर, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण और रिसर्च मेथडोलॉजी शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि यह कार्यशाला युवा चिकित्सकों के कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वैज्ञानिक सत्रों में आधुनिक चिकित्सा पर होगी गहन चर्चा

दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। कार्यक्रम में की-नोट व्याख्यान, पैनल चर्चा, वाद-विवाद, शोध पत्र प्रस्तुतिकरण और वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें दर्द प्रबंधन, पेरीऑपरेटिव मेडिसिन, मरीजों की सुरक्षा, क्वालिटी इम्प्रूवमेंट और नई चिकित्सा तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा। सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में नवीनतम शोध, तकनीक और व्यावहारिक अनुभवों को साझा कर उपचार सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाना है।

प्रतिष्ठित अतिथियों की मौजूदगी बढ़ाएगी आयोजन की गरिमा

सम्मेलन का उद्घाटन राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी करेंगे। कार्यक्रम में राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति डॉ. प्रमोद योले और एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा देशभर के वरिष्ठ चिकित्सक, मेडिकल शिक्षक और शोधकर्ता भी सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। आयोजकों का मानना है कि विशेषज्ञों की उपस्थिति से चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी तथा युवा डॉक्टरों को अनुभवी विशेषज्ञों से सीखने का अवसर प्राप्त होगा।

रोगी सुरक्षा और उत्कृष्ट सेवाओं पर रहेगा विशेष जोर

आयोजन के दौरान उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों को अचीवमेंट अवॉर्ड और डॉ. आर.के. असेरी प्रोफिशिएंसी अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी प्रदान किए जाएंगे। सम्मेलन के सचिवों के अनुसार इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान, नई तकनीकों और व्यावहारिक प्रशिक्षण को एक मंच पर लाकर एनेस्थीसिया सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। साथ ही युवा चिकित्सकों और अनुभवी विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर रोगी सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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