‘माइक बंद कर सकते हैं, छात्रों की आवाज नहीं’ : राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान
लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान हुए हंगामे के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर उन्हें बोलने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सदन में उनका माइक बंद कर दिया गया और छात्रों से जुड़े मुद्दे पर उन्हें अपनी बात पूरी नहीं रखने दी गई। राहुल गांधी ने कहा कि वह शाम 6 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
‘मुझे बोलने नहीं दिया’, राहुल गांधी का आरोप
लोकसभा की कार्यवाही के बाद संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया तो सत्ता पक्ष के विरोध के बीच उन्हें अपनी बात पूरी करने का अवसर नहीं मिला। उनका कहना था कि सदन में उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई। राहुल ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि संसद में वह जो कहना चाहते थे, उसे पूरा नहीं कह पाए, इसलिए अब वह प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी बात देश के सामने रखेंगे।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को बनाया मुद्दा
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने संसद में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती गई और इस पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए जवाब मांगा था। राहुल का कहना है कि छात्रों से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
‘माइक बंद हो सकता है, आवाज नहीं’
अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि किसी सांसद का माइक बंद किया जा सकता है, लेकिन छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के मुद्दे उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है और वह इसे आगे भी उठाते रहेंगे। राहुल ने संकेत दिया कि उनकी प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और संसद में हुई घटनाओं पर विस्तार से जानकारी साझा की जाएगी।
सदन में हुआ हंगामा, सत्ता पक्ष ने जताई आपत्ति
लोकसभा में राहुल गांधी के बयान के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उनके आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोपों के समर्थन में तथ्य और साक्ष्य पेश करने की मांग की तथा कहा कि बिना प्रमाण किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने भी सदस्यों से संसदीय मर्यादा बनाए रखने और तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की अपील की।