एमएलएसयू में छात्रों का अनिश्चितकालीन अनशन दूसरे दिन भी जारी, छात्रसंघ चुनाव और मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रशासन पर उठे सवाल
उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (एमएलएसयू) में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने, छात्र हितों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान और प्रस्तावित मराठी अध्ययन केंद्र का विरोध करने को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। प्रशासनिक भवन के बाहर चार छात्र नेता लगातार दूसरे दिन भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे रहे। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों की बुनियादी समस्याओं के समाधान के बजाय अन्य परियोजनाओं पर अधिक ध्यान दे रहा है।
दूसरे दिन भी जारी रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन अनशन
विश्वविद्यालय परिसर में चल रहा छात्र आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रशासनिक भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर चार छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे रहे और अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते रहे। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लंबे समय से छात्र हितों से जुड़े कई मुद्दे लंबित पड़े हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहा। छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन और अनशन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भी आंदोलनकारियों का समर्थन किया।
हॉस्टलों की बदहाल व्यवस्था पर छात्रों ने जताई नाराजगी
आंदोलनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के छात्रावासों की खराब स्थिति को प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना है कि गर्ल्स और बॉयज हॉस्टलों में नियमित पानी की आपूर्ति नहीं होने से विद्यार्थियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बिजली कटौती के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है और पानी की मोटर बंद रहने से टंकियां भी समय पर नहीं भर पातीं। इसके अलावा कई हॉस्टलों की इमारतें मरम्मत की मांग कर रही हैं। छात्रों ने सुरक्षित और बेहतर आवासीय सुविधाओं के साथ नियमित बिजली-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
दूषित पेयजल और परिसर की सुविधाओं पर भी उठे सवाल
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को भी अपर्याप्त बताया। उनका आरोप है कि आर्ट्स और लॉ कॉलेज में लगे वाटर कूलरों की नियमित सफाई नहीं होने से विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा। साथ ही अभिभावकों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। आंदोलनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय को नई योजनाओं की शुरुआत से पहले मौजूदा सुविधाओं को बेहतर बनाने पर प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
मराठी अध्ययन केंद्र के प्रस्ताव का किया विरोध
छात्र आंदोलन के दौरान प्रस्तावित मराठी अध्ययन केंद्र का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि राजस्थान के विश्वविद्यालयों में सबसे पहले स्थानीय भाषा, संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि राजस्थानी भाषा और उससे जुड़े अध्ययन को पर्याप्त महत्व दिए बिना नए अध्ययन केंद्र स्थापित करना उचित नहीं है। छात्रों ने मांग की कि स्थानीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस विषय पर उनकी आपत्तियों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग हुई तेज
छात्र नेताओं ने कहा कि लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से वंचित रहना पड़ रहा है। उनका कहना है कि छात्रसंघ चुनाव छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं, जिनके अभाव में विद्यार्थियों की समस्याएं प्रभावी ढंग से सामने नहीं आ पातीं। आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नारेबाजी कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आंदोलन को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दूसरी ओर आंदोलन में शामिल छात्र नेताओं का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर में हालात पर सभी की नजर बनी हुई है।
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