चूरू में हैरान करने वाला मामला: कोबरा ने काटा तो मरीज के साथ जिंदा सांप भी अस्पताल ले पहुंचे परिजन, डॉक्टर बोले- ऐसा न करें
राजस्थान के चूरू जिले में एक अनोखा मामला सामने आया, जहां जहरीले कोबरा के काटने के बाद परिजन मरीज के साथ उस सांप को भी डिब्बे में बंद कर अस्पताल ले आए। डॉक्टरों ने मरीज का उपचार शुरू करने के साथ लोगों से अपील की कि सांप को पकड़कर अस्पताल लाना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि स्नेक बाइट के इलाज के लिए सांप को साथ लाने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि मरीज को बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है।
कोबरा के डंसने के बाद बिगड़ी तबीयत, जिला अस्पताल किया गया रेफर
जानकारी के अनुसार, चूरू जिले के रामगढ़ क्षेत्र निवासी 55 वर्षीय मोहम्मद सलीम खेत पर गए हुए थे। इसी दौरान उन्हें कथित रूप से जहरीले कोबरा ने काट लिया। कुछ ही समय में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजन उन्हें पहले रामगढ़ अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए उन्हें राजकीय भर्तिया अस्पताल, चूरू रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें गहन चिकित्सा इकाई (MICU) में भर्ती कर उपचार शुरू किया, जहां उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
परिजन डिब्बे में बंद कर जिंदा सांप भी अस्पताल ले आए
मरीज के परिजनों ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने काटने वाले सांप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर लिया और मरीज के साथ अस्पताल ले आए। उनका मानना था कि सांप को दिखाने से डॉक्टरों को इलाज में सुविधा होगी। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कदम जोखिम भरा हो सकता है। जिंदा सांप को पकड़ने या साथ लाने के प्रयास में किसी अन्य व्यक्ति को भी डंसने का खतरा रहता है, जिससे एक दुर्घटना कई लोगों के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
डॉक्टरों की सलाह: सांप पकड़ने की नहीं, तुरंत इलाज कराने की जरूरत
राजकीय भर्तिया अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में स्नेक बाइट का उपचार मरीज की स्थिति, लक्षणों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर किया जाता है। इसलिए काटने वाले सांप को पकड़कर अस्पताल लाना आवश्यक नहीं है। डॉक्टरों ने कहा कि सांप को पकड़ने की कोशिश में समय भी नष्ट होता है और अतिरिक्त खतरा भी पैदा हो सकता है। ऐसे मामलों में सबसे पहले मरीज को सुरक्षित स्थान पर लाकर जल्द से जल्द निकटतम अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सही कदम है।
विशेषज्ञ बोले- जंगल घटने से रिहायशी इलाकों में बढ़ रहे सांप
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश सांप बिना उकसावे के हमला नहीं करते। जब उन्हें खतरा महसूस होता है या कोई उन्हें छेड़ता है, तभी वे आत्मरक्षा में डंस सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, शहरीकरण और जंगलों के लगातार कम होने से सांप अब भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगे हैं। चूरू जिले में सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें केवल कुछ ही अत्यधिक विषैले माने जाते हैं। ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने और किसी भी स्नेक बाइट की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है।
इसे भी पढ़ें- मकराना के निजी स्कूल में 3.5 वर्षीय बच्ची से कथित दुष्कर्म का मामला, विरोध प्रदर्शन तेज; पुलिस जांच जारी