झुंझुनूं में निजी स्कूल संचालकों का शक्ति प्रदर्शन, मांगें नहीं मानीं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
राजस्थान के झुंझुनूं में निजी स्कूल संचालकों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्राइवेट स्कूल संघर्ष समिति के बैनर तले निकाली गई रैली में जिलेभर से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और अधिक उग्र किया जाएगा।
गांधी चौक से कलेक्ट्रेट तक निकली आक्रोश रैली
मंगलवार सुबह गांधी चौक पर जिलेभर से निजी विद्यालयों के संचालक, शिक्षक और कर्मचारी एकत्र हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में रैली निकाली। यह आक्रोश रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां सभा आयोजित की गई। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए सरकार से जल्द समाधान की मांग की।
सरकारी नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
सभा को संबोधित करते हुए प्राइवेट स्कूल संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निजी विद्यालय लगातार बेहतर शैक्षणिक परिणाम दे रहे हैं, लेकिन उन्हें प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। झुंझुनूं ब्लॉक अध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि स्कूल वाहनों की फिटनेस के लिए संचालकों को दूसरे शहरों तक जाना पड़ता है, जिससे समय और आर्थिक संसाधनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है। उन्होंने इस प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर सरल और सुविधाजनक बनाने की मांग की।
मांगें नहीं मानी गईं तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन
निजी स्कूल संचालक नरेंद्र सिंह झाझड़िया ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को पूरे राजस्थान में विस्तारित किया जाएगा। वहीं इंजीनियर परवीन कृष्णिया ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिला तो शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन के बाद संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
इन प्रमुख मांगों को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की अपील
संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन में शाला संबल जांच तत्काल रद्द करने, आरटीई के तहत लंबित प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान और यूनिट कॉस्ट में 10 प्रतिशत वृद्धि की मांग उठाई। इसके अलावा बिना पूर्ण शुल्क के टीसी जारी करने संबंधी आदेश वापस लेने, परिवहन विभाग के नियमों को सरल बनाने, प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लंबित भुगतान जारी करने तथा 30 वर्ष से अधिक पुराने विद्यालय भवनों के लिए ही भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र अनिवार्य करने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई।
सरकार के फैसले पर टिकी निजी विद्यालयों की नजर
प्रदर्शन के बाद अब निजी स्कूल संचालकों की निगाहें राज्य सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को जिला स्तर से आगे बढ़ाकर प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार और निजी विद्यालय संगठनों के बीच वार्ता या टकराव की स्थिति बन सकती है।
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